फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Kathua News ›   There is no veterinary centre in Mehtabpur and nearby villages

Kathua News: मेहताबपुर और आसपास गांवों में नहीं है पशु चिकित्सा केंद्र

Mon, 21 Apr 2025 01:36 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Mon, 21 Apr 2025 01:36 AM IST
विज्ञापन
There is no veterinary centre in Mehtabpur and nearby villages
बीमार मवेशियों के इलाज के लिए आठ किलोमीटर दूर डिस्पेंसरियों की लेनी पड़ती है मदद
विज्ञापन




कठुआ। पंचायत मेहताबपुर और साथ लगते गांव में कोई भी पशु चिकित्सा केंद्र नहीं है। पशुपालकों को मजबूरन बीमार मवेशियों के इलाज के लिए आठ किलोमीटर दूर हटली स्थित पशु चिकित्सा केंद्र या फिर खरोट और गोविंदसर आना पड़ता है। लोग पिछले 20 साल से पंचायत में डिस्पेंसरी की मांग कर रहे है, लेकिन संबंधित विभाग हर बार मांग को अनसुना कर देता है। इस कारण लोगों में रोष है।



लोगों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर सरकार से बैक टू विलेज प्रोग्राम में तीन बार इलाके में पशु डिस्पेंसरी स्थापित करने की मांग की जा चुकी है। मगर हर बार जिला प्रशासन और सरकार के अधिकारियों से सिर्फ आश्वासन ही मिला है। बिना पशु डिस्पेंसरी के कई बार मवेशी बिना इलाज ही मर जाते हैं। ज्यादातर गांव कंड़ी और पहाड़ी इलाके में आते हैं। संवाद
विज्ञापन



जब कभी मवेशी बीमार पड़ता है, तो ग्रामीणों के पास पंचायत में इलाज के लिए एक भी चिकित्सा केंद्र नहीं है। लोग बीमार मवेशियों के इलाज के लिए हटली या खरोट डिस्पेंसरी आते हैं। कई बार समय पर इलाज न मिलने पर मवेशियों की मौत हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


-दिलावर सिंह, पूर्व सरपंच मेहताबपुर



मेहताबपुर, कलसपुर, गैतरवां, मरौली, बडोली, पटोली, डिलवां, खनैयरा, डोल पशु डिस्पेंसरी न होने से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई बार मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में ला चुके हैं। मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों को मवेशियों के इलाज के लिए कई बार निजी पशु चिकित्सक की मदद लेनी पड़ती है।


- मंगल सिंह निवासी मेहतावपुर।






ज्यादातर ग्रामीण भेड़-बकरी पालन और दूध के कारोबार पर ही निर्भर हैं। सरकार को चाहिए की उनके इलाके में भी डिस्पेंसरी की व्यवस्था की जाए।
-करण कुमार, निवासी गैतरवां

पंचायत में पशु डिस्पेंसरी न होने से उनके मवेशी बीमार होने पर बेमौत मर जाते हैं। इससे पशुपालकों को न केवल वित्त नुकसान हो रहा है, बल्कि पशुपालन की ओर लोगों का रुझान भी खत्म हो रहा है।
- मोहिंद्र सिंह, स्थानीय निवासी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed