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Kathua News: मंदिर में चोरी करने के आरोपी को कोर्ट ने किया बरी
Sun, 31 Aug 2025 01:11 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 31 Aug 2025 01:11 AM IST
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कठुआ। शहर से सटे चक सज्जन के मंदिर में चोरी मामले में आरोपी को कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार, मंदिर में चोरी करने हुए किसी प्रत्यक्षदर्शी ने आरोपी को चोरी करते नहीं देखा है। इसके अलावा कोर्ट ने पाया कि आरोपी की कथित स्वीकारोक्ति और चोरी की बरामदगी में भी विरोधाभास है। बरामदगी के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था और इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने कोर्ट में खुद माना उसने किसी के कहने पर आरोपी का नाम लिया था। कोर्ट ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है।
पुलिस की ओर से कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार मामला 19 जुलाई 2015 है। जब आरोपी दविंद्र कुमार पर चक सज्जन के मंदिर में मंदिर से पीतल की घंटी, तांबे का नाग, पानी की टंकी और लोहे की पाइप चोरी करने का आरोप लगाया गया था। इस संबंध में शिकायतकर्ता कुलदीप राज ने 22 जुलाई 2015 को पुलिस स्टेशन कठुआ में शिकायत दर्ज कराई करवाई थी। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धारा 457, 380 के तहत मामला दर्ज कर उसके खिलाफ 22 दिसंबर 2015 को आरोप पत्र दायर किए गए थे। जिसमें आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे चलाने का दावा किया था। इसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को मामले में साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया। जिसमें अभियोजन पक्ष ने पांच गवाहों में से चार गवाह कोर्ट में पेश किए गए। कोर्ट में किसी भी गवाही ने आरोपी की चोरी करते हुए नहीं देखा था। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने खुद कबूला कि उसके किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध करने में पूरी तरह असफल रहा और आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी करने का निर्णय सुनाया गया। इसके अलावा कोर्ट ने मामले में जब्त संपत्ति को उसके वास्तविक मालिक को सौंपने का निर्देश दिया है।
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पुलिस की ओर से कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार मामला 19 जुलाई 2015 है। जब आरोपी दविंद्र कुमार पर चक सज्जन के मंदिर में मंदिर से पीतल की घंटी, तांबे का नाग, पानी की टंकी और लोहे की पाइप चोरी करने का आरोप लगाया गया था। इस संबंध में शिकायतकर्ता कुलदीप राज ने 22 जुलाई 2015 को पुलिस स्टेशन कठुआ में शिकायत दर्ज कराई करवाई थी। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धारा 457, 380 के तहत मामला दर्ज कर उसके खिलाफ 22 दिसंबर 2015 को आरोप पत्र दायर किए गए थे। जिसमें आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे चलाने का दावा किया था। इसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को मामले में साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया। जिसमें अभियोजन पक्ष ने पांच गवाहों में से चार गवाह कोर्ट में पेश किए गए। कोर्ट में किसी भी गवाही ने आरोपी की चोरी करते हुए नहीं देखा था। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने खुद कबूला कि उसके किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध करने में पूरी तरह असफल रहा और आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी करने का निर्णय सुनाया गया। इसके अलावा कोर्ट ने मामले में जब्त संपत्ति को उसके वास्तविक मालिक को सौंपने का निर्देश दिया है।
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