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पढ़ाई की चिंता, पलायन के कारण छात्रों का कोर्स पिछड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला,कठुआ
Updated Wed, 15 Oct 2014 01:48 AM IST
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एक सप्ताह से अधिक समय से स्कूल और पुस्तकों से दूर राहत शिविरों में रह रहे विद्यार्थियों को पढ़ाई की चिंता सताने लगी है।
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सेलेबस पीछे छुट रहा है और बच्चे खेलों के माध्यम से और अपने स्तर पर पढ़ाई कर समय बिता रहे हैं। स्कूल कब खुलेंगे और वह कब पीछे छूट चुके पाठ्यक्रम को पूरा करेंगे इसकी चिंता सता रही है।
हीरानगर राहत शिविर में रह रहे आठवीं कक्षा के छात्र प्रमोद कुमार ने कहा कि वह करीब एक सप्ताह पहले पहाड़पुर गांव से आकर हीरानगर में ठहरे थे।
इसके बाद से वह गांव में नहीं गए हैं। शिविर में भी पाठ्यक्रम की चिंता सता रही है। वही दसवीं के छात्र विवेक कुमार ने कहा कि लौंडी गांव से आकर वह छन्न खतिरयां में ठहरे हैं।
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पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पा रहा है। जिस स्कूल में वह ठहरे हैं वहां भी शिक्षक नहीं आ रहे हैं। मढ़ीन और हीरागनर शिक्षा जोन के सभी स्कूल बंद हैं।
ऐसे में वह पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। दसवीं की कक्षा है और एक सप्ताह का पाठ्यक्रम कब पूरा होगा और स्कूल कब लगेंगे इसकी भी कोई जानकारी नहीं है।
ऐसे में शिक्षा की चिंता सताने लगी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की मांग है कि राहत शिविरों वाले स्कूलों में शिक्षकों को भेजा जाए जो उन्हें पढ़ाया जा सके और उनका पाठ्यक्रम भी पूरा हो सके।
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