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Kathua News: भूकंप में जर्जर हुई बावली का अब होगा जीर्णोद्धार
Tue, 25 Mar 2025 12:51 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 25 Mar 2025 12:51 AM IST
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बिलावर में रैंकियां बावली का चल रहा जीर्णोद्धार का काम। संवाद
- फोटो : kathua
एक समय पर बिलावर के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत थी बावली, मरम्मत कराएगा लोक निर्माण विभाग
बिलावर। कभी पूरे कस्बे के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत रही बिलावर की ऐतिहासिक रैंकियां बावली को अब पुनर्जीवित किया जा रहा है। 300 साल पहले पाल वंश के राजाओं की ओर से निर्मित इस बावली को 1988 में आए भूकंप ने गंभीर क्षति पहुंचाई। इसके बाद यह प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो गई।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस ऐतिहासिक धरोहर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए 32 लाख रुपए की राशि जारी की है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार बावली के जलस्रोत की मरम्मत की जाएगी। इसके आसपास बैठने की व्यवस्था और बावली को जोड़ने वाले रास्तों को पक्का कर फुटपाथ का निर्माण किया जाएगा। इसका काम वर्तमान में चल रहा है।
कस्बे के ज्यादातर लोग इसी बावली के पेयजल पर निर्भर थे। साल 1988 में भूकंप आने की वजह से यह बावली खंडहर बनती जा रही थी। लोगों ने बताया कि जिस समय बिलावर कस्बे में जल शक्ति विभाग की ओर से पेयजल सप्लाई उपलब्ध नहीं थी उस समय इसी बावली पर पूरे कस्बे के लोग पेयजल के लिए निर्भर थे। यह बावली न सिर्फ पेयजल का स्रोत रही, बल्कि एक धरोहर के रूप में भी देखी जाती रही है। लंबे समय से इस बावली के जीर्णोद्वार की मांग की जा रही थी। संवाद जम्मू-कश्मीर पुरातत्व विभाग की टीम ने बिलावर का दौरा करके रैंक की बावली का निरीक्षण किया था। इसके बाद सरकार की ओर से बावली के जीणोद्वार, सौंदर्यीकरण के लिए राशि जारी कर दी गई है। बावली के पास लोगों के बैठने के लिए व्यवस्था की जाएगी और बावली को जोड़ने वाले रास्ते को पक्का कर फुटपाथ बनाया जाएगा।
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मोहम्मद रजाक, कनिष्ठ अभियंता लोक निर्माण विभाग
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बिलावर। कभी पूरे कस्बे के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत रही बिलावर की ऐतिहासिक रैंकियां बावली को अब पुनर्जीवित किया जा रहा है। 300 साल पहले पाल वंश के राजाओं की ओर से निर्मित इस बावली को 1988 में आए भूकंप ने गंभीर क्षति पहुंचाई। इसके बाद यह प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो गई।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस ऐतिहासिक धरोहर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए 32 लाख रुपए की राशि जारी की है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार बावली के जलस्रोत की मरम्मत की जाएगी। इसके आसपास बैठने की व्यवस्था और बावली को जोड़ने वाले रास्तों को पक्का कर फुटपाथ का निर्माण किया जाएगा। इसका काम वर्तमान में चल रहा है।
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कस्बे के ज्यादातर लोग इसी बावली के पेयजल पर निर्भर थे। साल 1988 में भूकंप आने की वजह से यह बावली खंडहर बनती जा रही थी। लोगों ने बताया कि जिस समय बिलावर कस्बे में जल शक्ति विभाग की ओर से पेयजल सप्लाई उपलब्ध नहीं थी उस समय इसी बावली पर पूरे कस्बे के लोग पेयजल के लिए निर्भर थे। यह बावली न सिर्फ पेयजल का स्रोत रही, बल्कि एक धरोहर के रूप में भी देखी जाती रही है। लंबे समय से इस बावली के जीर्णोद्वार की मांग की जा रही थी। संवाद जम्मू-कश्मीर पुरातत्व विभाग की टीम ने बिलावर का दौरा करके रैंक की बावली का निरीक्षण किया था। इसके बाद सरकार की ओर से बावली के जीणोद्वार, सौंदर्यीकरण के लिए राशि जारी कर दी गई है। बावली के पास लोगों के बैठने के लिए व्यवस्था की जाएगी और बावली को जोड़ने वाले रास्ते को पक्का कर फुटपाथ बनाया जाएगा।
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मोहम्मद रजाक, कनिष्ठ अभियंता लोक निर्माण विभाग