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दीवारों से निशान हट गए, पर दिल में अभी भी जख्म ताजा

Jammu and Kashmir Bureau जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2020 11:54 PM IST
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हीरानगर। 18 वर्ष पूर्व हीरानगर मोड़ पर हुए आतंकी हमले के निशान दीवारों से भले ही मिट गए हों, लेकिन अपनों को खोने वालों के दिलों के घाव आज भी ताजा हैं। इस हमले में जिन्होंने अपने पिता, पति और बच्चों को खोया, वह आज भी कहीं आतंकी हमले की खबर सुनते हैं तो सन्न रह जाते हैं।
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सीमा पार से आतंकियों ने हीरानगर मोड़ पर 1 अक्तूबर 2002 को निहत्थे लोगों पर हमला कर दिया। इस हमले के दौरान नौ लोग मारे गए। जिनकी याद में यूथ फेडरेशन हीरानगर की ओर से हर वर्ष शहीदी दिवस का आयोजन किया जाता है। इस बार की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम में फेडरेशन के सदस्यों के अलावा कुछ शहीदों के परिजन भी उपस्थित रहते हैं। शहीदों की तस्वीरों पर पुष्प अर्पित करने के बाद उनकी आत्मा की शांति के लिए हवन यज्ञ किया जाएगा। इस हमले में कुल नौ लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। जिसके लिए यहां इन शहीदों की याद में शहीदी दिवस मनाया जाता है।

हमले में मारे गए इन लोगों की सूची
18 वर्ष पूर्व हीरानगर में हुए आतंकी हमले में नौ लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इनमें विक्रांत शर्मा, सतीश शर्मा, जनक राज, सांझी राम, जनक राज, चमन लाल, मोहिंदर पाल, कुलदीप सिंह और स्वर्ण कुमार शामिल हैं।
हमले में छह स्थानीय और तीन यात्रियों की हुई थी मौत
आतंकी पाकिस्तान से घुसपैठ कर एक मेटाडोर में सवार हुए। रास्ते में आतंकियों ने अपने हथियार निकाल मेटाडोर को हाईजैक करने की कोशिश की। चालक ने उनकी इस कोशिश को नाकाम कर दिया और हीरा नगर मोड़ पर गिरधारी लाल डोगरा चौक में गाड़ी को डिवाइडर से टकराकर आतंकियों का संतुलन बिगाड़ दिया। इसके बाद आतंकी मेटाडोर से निकल कर मुख्य चौक पर हाईवे से गुजरने वाली गाड़ियों को रोकने लगे। कोई गाड़ी नहीं रुकने पर उन्होंने एक टूरिस्ट बस में ग्रेनेड फेंका और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस दौरान नौ मासूम लोगों की मौत हो गई, जिसमें से छह हीरानगर तहसील के रहने वाले थे, जबकि तीन अखनूर, किश्तवाड़ और हटली कठुआ के निवासी थे।
अभी भी आतंकी पुराने रूटों का कर रहे हैं इस्तेमाल
2002 में हुए इस आतंकी हमले में जो आंतकवादी हीरानगर पहुंचे वह सीमा पार से आए थे। गुप्तचर एजेंसियों की ओर से यह जानकारी दी गई कि यह घुसपैठ हीरानगर सेक्टर के लोंडी इलाके से हुई। इसके बाद भी इस रूट से घुसपैठ का सिलसिला बंद नहीं हुआ। अभी भी सीमा पार से आने वाले घुसपैठिए पुराने सेफ रूटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। 2002 के बाद से सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के भले ही कई दावे किए गए हों, लेकिन अभी भी आतंकियों के लिए पुराने रास्ते सेफ रूट हैं।
श्रद्धांजलि और हवन यज्ञ के दौरान दो गज की दूरी
यूथ फेडरेशन के चेयरमैन धीरज गुप्ता ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी शहीदी दिवस पूरी तैयारी के साथ मनाया जाएगा। कोरोना काल के चलते सभी नियमों का पालन किया जाएगा। श्रद्धांजलि और हवन यज्ञ के दौरान दो गज की दूरी का पूरा ख्याल रखा जाएगा।

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