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Kathua News: शिक्षक मिशन युवा सर्वेक्षण में व्यस्त, स्कूलों पर लटक रहे ताले
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-जिले भर से 660 शिक्षकों को किया गया नियुक्त, एक अध्यापक वाले स्कूल ज्यादा प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। केंद्र की ओर जारी मिशन युवा सर्वेक्षण से जिले भर के स्कूलों शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। सबसे अधिक प्रभावित एकमात्र शिक्षक वाले स्कूल हो रहे हैं जहां सप्ताह के कई दिनों तक ताला लटका रहता है। जिले भर से कुल 660 शिक्षकों को मिशन के तहत सर्वेक्षण में लगाया गया है।
शिक्षकों को ऐसे समय में जिला प्रशासन की ओर से यह जिम्मेदारी दी गई है जब बच्चों की वार्षिक परीक्षाएं बिल्कुल सिर पर हैं। केंद्र सरकार की ओर से जारी सर्वेक्षण के लिए अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित की गई है। अगर सर्वेक्षण आगे बढ़ता है तो स्कूली शिक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसकी कल्पना न तो शिक्षा विभाग कर पा रहा है और न ही जिला प्रशासन। इस बात की पुष्टि शिक्षा जोन बसोहली के गर्ल्स प्राइमरी स्कूल कुंड और बरनोटी जोन के दन्नी बाखता के स्कूल कर रहे है। स्कूलों में अध्यापक की उपस्थिति न होने से स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी से भी की है।
बसोहली विधायक ने अपने क्षेत्र में ऐसे मामले सामने आने के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी को शिक्षकों की स्कूलों में उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे। सूत्रों की मानें तो सर्वेक्षण में लगाए गए शिक्षकों से न केवल एक अध्यापक वाले स्कूलों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि हाई स्कूलों और हायर सेकेंडरी स्कूल भी इससे अछूते नहीं हैं। इसकी पुष्टि हाल ही में मुख्य शिक्षा अधिकारी की ओर से जिला उपायुक्त के समक्ष यह मामला उठाने से होती है। इसमें कहा गया कि कई हायर सेकेंडरी और हाई स्कूलों के साइंस विषय के शिक्षकों को भी सर्वे में लगाया गया है। जबकि बोर्ड परीक्षाएं आगामी 15 फरवरी से शुरू हो रही हैं।
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ऐसे में साइंस विषयों के शिक्षकों को विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में उपलब्ध होना चाहिए। जिन सरकारी स्कूलों में शिक्षा सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है, ऐसे 35 शिक्षकों की सूची जिला उपायुक्त को सौंपी गई। इन 35 शिक्षकों में से सिर्फ पांच को ही वापस स्कूलों में तैनात किया गया। 30 स्कूलों के बच्चे अब भी मास्टर जी के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। केंद्र की ओर जारी मिशन युवा सर्वेक्षण से जिले भर के स्कूलों शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। सबसे अधिक प्रभावित एकमात्र शिक्षक वाले स्कूल हो रहे हैं जहां सप्ताह के कई दिनों तक ताला लटका रहता है। जिले भर से कुल 660 शिक्षकों को मिशन के तहत सर्वेक्षण में लगाया गया है।
शिक्षकों को ऐसे समय में जिला प्रशासन की ओर से यह जिम्मेदारी दी गई है जब बच्चों की वार्षिक परीक्षाएं बिल्कुल सिर पर हैं। केंद्र सरकार की ओर से जारी सर्वेक्षण के लिए अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित की गई है। अगर सर्वेक्षण आगे बढ़ता है तो स्कूली शिक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसकी कल्पना न तो शिक्षा विभाग कर पा रहा है और न ही जिला प्रशासन। इस बात की पुष्टि शिक्षा जोन बसोहली के गर्ल्स प्राइमरी स्कूल कुंड और बरनोटी जोन के दन्नी बाखता के स्कूल कर रहे है। स्कूलों में अध्यापक की उपस्थिति न होने से स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी से भी की है।
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बसोहली विधायक ने अपने क्षेत्र में ऐसे मामले सामने आने के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी को शिक्षकों की स्कूलों में उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे। सूत्रों की मानें तो सर्वेक्षण में लगाए गए शिक्षकों से न केवल एक अध्यापक वाले स्कूलों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि हाई स्कूलों और हायर सेकेंडरी स्कूल भी इससे अछूते नहीं हैं। इसकी पुष्टि हाल ही में मुख्य शिक्षा अधिकारी की ओर से जिला उपायुक्त के समक्ष यह मामला उठाने से होती है। इसमें कहा गया कि कई हायर सेकेंडरी और हाई स्कूलों के साइंस विषय के शिक्षकों को भी सर्वे में लगाया गया है। जबकि बोर्ड परीक्षाएं आगामी 15 फरवरी से शुरू हो रही हैं।
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ऐसे में साइंस विषयों के शिक्षकों को विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में उपलब्ध होना चाहिए। जिन सरकारी स्कूलों में शिक्षा सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है, ऐसे 35 शिक्षकों की सूची जिला उपायुक्त को सौंपी गई। इन 35 शिक्षकों में से सिर्फ पांच को ही वापस स्कूलों में तैनात किया गया। 30 स्कूलों के बच्चे अब भी मास्टर जी के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।