{"_id":"6a0e05d16695652eb60d9308","slug":"tea-gardens-will-now-be-ready-in-billawar-kathua-news-c-201-1-knt1008-132264-2026-05-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: बिलावर में अब तैयार होंगे चाय के बागान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: बिलावर में अब तैयार होंगे चाय के बागान
विज्ञापन
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस
रोजगार सृजन के साथ-साथ पर्यटन को करेंगे आकर्षित
विभाग का दावा, इलाके में रोपे गए 25 हजार पौधों में 70 फीसदी तक मिली सफलता
साहिल खजूरिया
कठुआ। हिमाचल के पालमपुर की तरह बिलावर के विभिन्न क्षेत्रों को अब चाय की महक और स्वाद से जाना पहचाना जाएगा। विभाग का दावा है कि बीते साल बिलावर के ध्यौता, धार डुगनू और कोहग इलाके में ग्रामीणों को ट्रायल के तौर पर बांटे गए 25 हजार पौधों में से 70 फीसदी कामयाब रहे हैं। मुफीद मौसम और तापमान मिलने के बाद कृषि विभाग अब कलस्टर तैयार करने की तैयारी में है।
विभाग ने धार डुगनू, बग्गन, च्यू मढून के अलावा रामपुर को एक से दो कनाल के चाय बाग तैयार करने के लिए चिह्नित किया है। कामयाब रहने पर इसे और विस्तार देने की योजना है। रामपुर में ट्रायल सफल रहा तो आने वाले वर्षों में धार सड़क से घाटी को जाने वाले पर्यटकों की रौनक बढ़ने की भी उम्मीद है। यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि चाय के बागान रोजगार सृजन के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देंगे।
पालमपुर के कृषि विश्वविद्यालय से बीते साल चाय के पौधे ट्रायल के तौर पर लाए गए थे, जिन्हें अलग-अलग क्षेत्र के किसानों ने हाथों हाथ लिया था। कृषि विभाग ने दावा किया है कि यह ट्रायल 70 फीसदी तक कामयाब रहा है। इस साल और पौधे लाकर अब एक ही जगह एक साथ रोपे जाएंगे। कलस्टर तैयार किए जाएंगे ताकि नतीजों तक पहुंचा जा सके। दरअसल, शिवालिक क्षेत्र की जलवायु पालमपुर से काफी मिलती-जुलती है जो चाय की खेती के लिए प्रसिद्ध है। इसी को देखते हुए बीते साल बिलावर इलाके में इसका ट्रायल शुरू किया गया था। (संवाद)
विज्ञापन
वर्जन
बीते साल किसानों को ट्रायल के तौर पर वितरित किए गए चाय के पौधों के बेहतरीन नतीजे सामने आए हैं। जलवायु अनुकूल बिलावर के विभिन्न इलाकों में 70 फीसदी तक यह सफल रहे हैं। ऐसे में इस साल एक से दो कनाल के अलग-अलग कलस्टर तैयार करने की योजना है। इसके लिए पालमपुर से चाय के पौधे लगाकर यह कलस्टर तैयार करवाए जाएंगे। - रवि शर्मा, सब डिवीजनल कृषि अधिकारी
विज्ञापन
रोजगार सृजन के साथ-साथ पर्यटन को करेंगे आकर्षित
विभाग का दावा, इलाके में रोपे गए 25 हजार पौधों में 70 फीसदी तक मिली सफलता
साहिल खजूरिया
कठुआ। हिमाचल के पालमपुर की तरह बिलावर के विभिन्न क्षेत्रों को अब चाय की महक और स्वाद से जाना पहचाना जाएगा। विभाग का दावा है कि बीते साल बिलावर के ध्यौता, धार डुगनू और कोहग इलाके में ग्रामीणों को ट्रायल के तौर पर बांटे गए 25 हजार पौधों में से 70 फीसदी कामयाब रहे हैं। मुफीद मौसम और तापमान मिलने के बाद कृषि विभाग अब कलस्टर तैयार करने की तैयारी में है।
विभाग ने धार डुगनू, बग्गन, च्यू मढून के अलावा रामपुर को एक से दो कनाल के चाय बाग तैयार करने के लिए चिह्नित किया है। कामयाब रहने पर इसे और विस्तार देने की योजना है। रामपुर में ट्रायल सफल रहा तो आने वाले वर्षों में धार सड़क से घाटी को जाने वाले पर्यटकों की रौनक बढ़ने की भी उम्मीद है। यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि चाय के बागान रोजगार सृजन के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देंगे।
विज्ञापन
पालमपुर के कृषि विश्वविद्यालय से बीते साल चाय के पौधे ट्रायल के तौर पर लाए गए थे, जिन्हें अलग-अलग क्षेत्र के किसानों ने हाथों हाथ लिया था। कृषि विभाग ने दावा किया है कि यह ट्रायल 70 फीसदी तक कामयाब रहा है। इस साल और पौधे लाकर अब एक ही जगह एक साथ रोपे जाएंगे। कलस्टर तैयार किए जाएंगे ताकि नतीजों तक पहुंचा जा सके। दरअसल, शिवालिक क्षेत्र की जलवायु पालमपुर से काफी मिलती-जुलती है जो चाय की खेती के लिए प्रसिद्ध है। इसी को देखते हुए बीते साल बिलावर इलाके में इसका ट्रायल शुरू किया गया था। (संवाद)
विज्ञापन
वर्जन
बीते साल किसानों को ट्रायल के तौर पर वितरित किए गए चाय के पौधों के बेहतरीन नतीजे सामने आए हैं। जलवायु अनुकूल बिलावर के विभिन्न इलाकों में 70 फीसदी तक यह सफल रहे हैं। ऐसे में इस साल एक से दो कनाल के अलग-अलग कलस्टर तैयार करने की योजना है। इसके लिए पालमपुर से चाय के पौधे लगाकर यह कलस्टर तैयार करवाए जाएंगे। - रवि शर्मा, सब डिवीजनल कृषि अधिकारी