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श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से होता है मन से मोह माया का अंत : पंडित रवि शास्त्री
Mon, 31 Jul 2023 12:25 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 31 Jul 2023 12:25 AM IST
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शिवा नगर स्थित शिव मंदिर में पिछले सात दिनों से जारी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन
कठुआ। शिवा नगर स्थित शिव मंदिर में पिछले सात दिनों से जारी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन हो गया है। रविवार को कथा के अंतिम दिन कलश विसर्जन शोभायात्रा के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
कथा व्यास पंडित रवि शास्त्री ने श्रद्धालुओं की श्रीमद् भागवत कथा के कारण राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत के श्रवण मात्र से मानव के मन से मोह माया का अंत हो जाता है और वह भगवान के परमधाम का अधिकारी बन जाता है। उन्होंने कहा कि परीक्षित की सर्प दंश के कारण कथा के दौरान ही मृत्यु हो गई थी, परंतु कथा सुनने से राजा परीक्षित का ध्यान संसार से हटकर स्वर्ग के सुख में लीन रहा। उन्होंने कहा कि परीक्षित ने राजा रहते हुए अपने जीवन में जो धर्म के बड़े काम किए थे उन्हें पुण्य का फल स्वरूप भगवान के चरणों में स्थान मिला।
कथा व्यास ने बताया कि परमात्मा का विधान है कि जो अंत समय में जिस भाव से जो भी स्मरण करता है वह उसी को प्राप्त होता है। इसी विधान के अनुसार राजा परीक्षित का स्थूल शरीर जो कि सर्प के विष मर चुका था। अपने सूक्ष्म शरीर से युक्त सुखदेव ऋषि के साथ विमान में बैठकर स्वर्ग चला गया।
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श्रीमद् भागवत पुराण के श्रवण से हमारे जन्म जन्मांतर के पापों का नाश होता है और ज्ञान के चक्षु खुल जाते हैं। यह हमें सांसारिक मोह माया से मुक्त करने में सहयोग करते हैं। लिहाजा हमें सपरिवार भागवत कथा का श्रवण पूर्ण निष्ठा ध्यान से करना चाहिए।
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कठुआ। शिवा नगर स्थित शिव मंदिर में पिछले सात दिनों से जारी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन हो गया है। रविवार को कथा के अंतिम दिन कलश विसर्जन शोभायात्रा के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
कथा व्यास पंडित रवि शास्त्री ने श्रद्धालुओं की श्रीमद् भागवत कथा के कारण राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत के श्रवण मात्र से मानव के मन से मोह माया का अंत हो जाता है और वह भगवान के परमधाम का अधिकारी बन जाता है। उन्होंने कहा कि परीक्षित की सर्प दंश के कारण कथा के दौरान ही मृत्यु हो गई थी, परंतु कथा सुनने से राजा परीक्षित का ध्यान संसार से हटकर स्वर्ग के सुख में लीन रहा। उन्होंने कहा कि परीक्षित ने राजा रहते हुए अपने जीवन में जो धर्म के बड़े काम किए थे उन्हें पुण्य का फल स्वरूप भगवान के चरणों में स्थान मिला।
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कथा व्यास ने बताया कि परमात्मा का विधान है कि जो अंत समय में जिस भाव से जो भी स्मरण करता है वह उसी को प्राप्त होता है। इसी विधान के अनुसार राजा परीक्षित का स्थूल शरीर जो कि सर्प के विष मर चुका था। अपने सूक्ष्म शरीर से युक्त सुखदेव ऋषि के साथ विमान में बैठकर स्वर्ग चला गया।
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श्रीमद् भागवत पुराण के श्रवण से हमारे जन्म जन्मांतर के पापों का नाश होता है और ज्ञान के चक्षु खुल जाते हैं। यह हमें सांसारिक मोह माया से मुक्त करने में सहयोग करते हैं। लिहाजा हमें सपरिवार भागवत कथा का श्रवण पूर्ण निष्ठा ध्यान से करना चाहिए।