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Kathua News: एक साल में दो बार बही सहार खड्ड पर बनी सड़क, जान जोखिम में डालकर गुजर रहे ग्रामीण
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। सहार खड्ड पर चन्नग्रा और बटाला के बीच बना वेंटेड काजवे ग्रामीणों के लिए राहत की जगह परेशानी का कारण बन गया है। पिछले एक साल में बरसात में दो बार आई बाढ़ ने इस मार्ग को भारी नुकसान पहुंचाया है। वहीं, करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित नए वेंटेड काजवे का निर्माण नहीं होने से दर्जनों गांवों के लोग आज भी जान जोखिम में डालकर खड्ड पार करने को मजबूर हैं। बारिश के दौरान खड्ड में पानी का बहाव बढ़ने पर लोगों की चिंता और बढ़ जाती है।
वर्ष 2025 में बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने सहार खड्ड पर बने काजवे को भारी नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद भी ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुईं। इसी वर्ष फिर आई बाढ़ ने मार्ग को और अधिक क्षतिग्रस्त कर दिया। हालात ऐसे हैं कि लोगों को या तो वैकल्पिक मार्ग से होकर लंबा सफर तय करना पड़ता है या फिर मजबूरी में खड्ड के बीच से गुजरना पड़ता है। यह मार्ग बटाला, शेरपुर, जखबड़, कुलियां, पटायरी, भिगवां और मुठ्ठी सहित दर्जनों गांवों के लोगों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामकाज, शिक्षा, रोजगार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ता है। काजवे की खराब हालत के कारण उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। सबसे ज्यादा परेशानी किसानों और स्कूली बच्चों को झेलनी पड़ रही है। किसानों के लिए खेतों तक पहुंचना और कृषि संबंधी काम निपटाना मुश्किल हो जाता है। वहीं, बारिश के बीच खड्ड पार करने की मजबूरी बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती है। नौकरीपेशा लोगों को भी समय पर अपने कार्यस्थल पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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बारिश में बढ़ जाता है खतरा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
-- स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि बारिश के दौरान खड्ड में पानी बढ़ने पर रास्ता पार करना खतरनाक हो जाता है। इसके बावजूद जरूरी कामों के लिए लोगों को जोखिम उठाना पड़ता है। खड्ड के बीच से गुजरने वाले वाहनों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। ऐसे में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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ढाई करोड़ के प्रस्तावित काजवे से बंधी उम्मीदें
-- ग्रामीणों को उम्मीद है कि करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित वेंटेड काजवे का निर्माण जल्द शुरू होगा। जिससे इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकेगा। लोगों का मानना है कि जब तक नए काजवे का निर्माण नहीं होता, तब तक उन्हें इसी तरह परेशानी और खतरे के बीच सफर करना पड़ेगा। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग निर्माण कार्य में तेजी लाए और तब तक मौजूदा मार्ग पर आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए, ताकि किसी अनहोनी से पहले उनकी समस्या का समाधान हो सके।
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कठुआ। सहार खड्ड पर चन्नग्रा और बटाला के बीच बना वेंटेड काजवे ग्रामीणों के लिए राहत की जगह परेशानी का कारण बन गया है। पिछले एक साल में बरसात में दो बार आई बाढ़ ने इस मार्ग को भारी नुकसान पहुंचाया है। वहीं, करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित नए वेंटेड काजवे का निर्माण नहीं होने से दर्जनों गांवों के लोग आज भी जान जोखिम में डालकर खड्ड पार करने को मजबूर हैं। बारिश के दौरान खड्ड में पानी का बहाव बढ़ने पर लोगों की चिंता और बढ़ जाती है।
वर्ष 2025 में बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने सहार खड्ड पर बने काजवे को भारी नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद भी ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुईं। इसी वर्ष फिर आई बाढ़ ने मार्ग को और अधिक क्षतिग्रस्त कर दिया। हालात ऐसे हैं कि लोगों को या तो वैकल्पिक मार्ग से होकर लंबा सफर तय करना पड़ता है या फिर मजबूरी में खड्ड के बीच से गुजरना पड़ता है। यह मार्ग बटाला, शेरपुर, जखबड़, कुलियां, पटायरी, भिगवां और मुठ्ठी सहित दर्जनों गांवों के लोगों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामकाज, शिक्षा, रोजगार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ता है। काजवे की खराब हालत के कारण उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। सबसे ज्यादा परेशानी किसानों और स्कूली बच्चों को झेलनी पड़ रही है। किसानों के लिए खेतों तक पहुंचना और कृषि संबंधी काम निपटाना मुश्किल हो जाता है। वहीं, बारिश के बीच खड्ड पार करने की मजबूरी बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती है। नौकरीपेशा लोगों को भी समय पर अपने कार्यस्थल पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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बारिश में बढ़ जाता है खतरा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
ढाई करोड़ के प्रस्तावित काजवे से बंधी उम्मीदें