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उज्ज दरिया की बाढ़ में फंसी तीन महिलाएं
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कठुआ/हीरानगर। उज्ज दरिया की बाढ़ में सोमवार सुबह फंसी तीन महिलाओं को एसडीआरएफ और पुलिस ने चार घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बचा लिया गया है।
देर रात हुई बारिश के बाद अचानक सुबह उज्ज दरिया का जलस्तर बढ़ गया। छब्बे चक निवासी ये महिलाएं सुबह उज्ज दरिया की ओर गई थीं और वहीं फंस गईं। इसके बाद परिवार के लोगों की सूचना पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा। एसडीआरएफ और पुलिस टीम ने तेज बहाव के बीच रस्से डालकर महिलाओं को सुरक्षित किनारे पर पहुंचा दिया। रेस्क्यू की गई महिलाओं की पहचान शकुंतला देवी (45), शालू देवी (18) और अंजू बाला सभी निवासी छब्बे चक के रूप में हुई है।
उधर, क्षेत्र के लोगों में भारी रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि पहले भी कई बार प्रशासन को छब्बे चक के नजदीक उज्ज दरिया की बाढ़ से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया है। तटबंध स्थापित किए जाने की भी मांग की गई है। लेकिन, हर बार सिर्फ वादे किए जाते हैं, और क्षेत्र के लोग मौत के मुहाने पर जीने को मजबूर हैं। हर साल बाढ़ का पानी खेतों और रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचाता है। इसका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर जिले में मानसून की दस्तक से पहले की बरसात ने इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। रात करीब एक बजे के शुरू हुई बारिश का सिलसिला सुबह चार बजे तक जारी रहा। इस दौरान 73 एमएम बारिश दर्ज की गई। देखते ही देखते नदी-नाले उफान पर आ गए। शहर में जगह-जगह कीचड़ के ढेर और नाले ओवरफ्लो हुए। आसमान से मेघ बरसे, तो वहीं बिजली विभाग इस बार भी पस्त हो गया। शहर और आसपास के कई इलाकों में रातभर बिजली गुल रही।
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देर रात हुई बारिश के बाद अचानक सुबह उज्ज दरिया का जलस्तर बढ़ गया। छब्बे चक निवासी ये महिलाएं सुबह उज्ज दरिया की ओर गई थीं और वहीं फंस गईं। इसके बाद परिवार के लोगों की सूचना पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा। एसडीआरएफ और पुलिस टीम ने तेज बहाव के बीच रस्से डालकर महिलाओं को सुरक्षित किनारे पर पहुंचा दिया। रेस्क्यू की गई महिलाओं की पहचान शकुंतला देवी (45), शालू देवी (18) और अंजू बाला सभी निवासी छब्बे चक के रूप में हुई है।
उधर, क्षेत्र के लोगों में भारी रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि पहले भी कई बार प्रशासन को छब्बे चक के नजदीक उज्ज दरिया की बाढ़ से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया है। तटबंध स्थापित किए जाने की भी मांग की गई है। लेकिन, हर बार सिर्फ वादे किए जाते हैं, और क्षेत्र के लोग मौत के मुहाने पर जीने को मजबूर हैं। हर साल बाढ़ का पानी खेतों और रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचाता है। इसका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
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दूसरी ओर जिले में मानसून की दस्तक से पहले की बरसात ने इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। रात करीब एक बजे के शुरू हुई बारिश का सिलसिला सुबह चार बजे तक जारी रहा। इस दौरान 73 एमएम बारिश दर्ज की गई। देखते ही देखते नदी-नाले उफान पर आ गए। शहर में जगह-जगह कीचड़ के ढेर और नाले ओवरफ्लो हुए। आसमान से मेघ बरसे, तो वहीं बिजली विभाग इस बार भी पस्त हो गया। शहर और आसपास के कई इलाकों में रातभर बिजली गुल रही।
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