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Kathua News: मछली चोरी रोकने के लिए हाईटेक हो रहा मत्स्य पालन विभाग
Thu, 12 Jun 2025 12:36 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 12 Jun 2025 12:36 AM IST
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रंजीत सागर डील में उतारी गई हाईस्पीड मोटर बोट।
कठुआ। मत्स्य पालन विभाग रंजीत सागर झील में मछली चोरी की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए अब विभाग हाईटेक हो रहा है। इसी कड़ी में करीब 22 लाख रुपये की लागत से तेज चलने वाली एक नाव (हाईस्पीड बोट) खरीदी गई है। यह कठुआ पहुंच चुकी है। इससे झील के 58 प्रतिशत हिस्से की निगरानी की जा सकेगी।
अभी विभाग जमीन से या निजी नावों के जरिए ही झील की निगरानी करता है। इससे सीमित क्षेत्र में ही नजर रखी जा सकती है लेकिन अब तेज चलने वाली नाव के जरिए झील के अधिकतर हिस्से में सतत निगरानी की जाएगी।
मछली चोरी करके पंजाब के इलाके में भाग जाने वाले मछुआरों को भी पकड़ा जा सकेगा। विभाग को उम्मीद है कि नई नाव की तैनाती से इन घटनाओं पर अंकुश लग सकेगा।
रंजीत सागर झील के जम्मू कश्मीर वाले हिस्से में पिछले एक साल से मछली पकड़ने का ठेका नहीं हो पाया है। विभाग की ओर से पहले से निर्धारित न्यूनतम बोली राशि को डेढ़ करोड़ से घटाकर एक करोड़ रुपये किया गया है। इसके बाद भी ठेकेदारों ने बोली में रुचि नहीं दिखाई।
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ऐसे में पंजाब की ओर से आए दिन मछली पकड़ने वाले मछुआरे जम्मू कश्मीर के हिस्से से भी मछली चोरी करके लौट जाते हैं। विभाग की ओर से इन आरोपियों के खिलाफ कई बार अभियान भी चलाया गया है।
विभाग के सहायक निदेशक पवन पाल शर्मा ने बताया कि पिछले एक साल में विभाग ने कई बार निजी नाव के जरिए मछली चोरी करने वालों पर शिकंजा कसा है। रंजीत सागर झील में मछली चोरी को रोकने के लिए स्थानीय लोगों समेत अन्य क्षेत्रों से भी स्टाफ को तैनात किया गया है।
इसके बावजूद पिछले लंबे समय से तेज चलने वाली नाव की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब अपनी नाव होने से 24 घंटे निगरानी की जा सकेगी और झील के भीतर कभी भी अभियान चलाया जा सकेगा।
बैकअप के लिए एक-दो रेस्क्यू बोट भी खरीदी जाएंगी
नई बोट को रंजीत सागर झील में उतारने के बाद मत्स्य पालन विभाग और भी सतर्कता बढ़ाने की तैयारी में है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार दो-तीन और रेस्क्यू बोट भी खरीदने की योजना है। झील में मछली चोरों पर कार्रवाई समेत किसी भी परिस्थिति में राहत, बचाव और बैकअप टीम के तौर पर शेष नाव का इस्तेमाल किया जाएगा। रेस्क्यू बोट आने के बाद कई क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई भी संभव हो जाएगी। विभाग ने इसकी योजना और प्रस्ताव बनाकर मंजूरी के लिए भेज दिया है।
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अभी विभाग जमीन से या निजी नावों के जरिए ही झील की निगरानी करता है। इससे सीमित क्षेत्र में ही नजर रखी जा सकती है लेकिन अब तेज चलने वाली नाव के जरिए झील के अधिकतर हिस्से में सतत निगरानी की जाएगी।
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मछली चोरी करके पंजाब के इलाके में भाग जाने वाले मछुआरों को भी पकड़ा जा सकेगा। विभाग को उम्मीद है कि नई नाव की तैनाती से इन घटनाओं पर अंकुश लग सकेगा।
रंजीत सागर झील के जम्मू कश्मीर वाले हिस्से में पिछले एक साल से मछली पकड़ने का ठेका नहीं हो पाया है। विभाग की ओर से पहले से निर्धारित न्यूनतम बोली राशि को डेढ़ करोड़ से घटाकर एक करोड़ रुपये किया गया है। इसके बाद भी ठेकेदारों ने बोली में रुचि नहीं दिखाई।
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ऐसे में पंजाब की ओर से आए दिन मछली पकड़ने वाले मछुआरे जम्मू कश्मीर के हिस्से से भी मछली चोरी करके लौट जाते हैं। विभाग की ओर से इन आरोपियों के खिलाफ कई बार अभियान भी चलाया गया है।
विभाग के सहायक निदेशक पवन पाल शर्मा ने बताया कि पिछले एक साल में विभाग ने कई बार निजी नाव के जरिए मछली चोरी करने वालों पर शिकंजा कसा है। रंजीत सागर झील में मछली चोरी को रोकने के लिए स्थानीय लोगों समेत अन्य क्षेत्रों से भी स्टाफ को तैनात किया गया है।
इसके बावजूद पिछले लंबे समय से तेज चलने वाली नाव की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब अपनी नाव होने से 24 घंटे निगरानी की जा सकेगी और झील के भीतर कभी भी अभियान चलाया जा सकेगा।
बैकअप के लिए एक-दो रेस्क्यू बोट भी खरीदी जाएंगी
नई बोट को रंजीत सागर झील में उतारने के बाद मत्स्य पालन विभाग और भी सतर्कता बढ़ाने की तैयारी में है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार दो-तीन और रेस्क्यू बोट भी खरीदने की योजना है। झील में मछली चोरों पर कार्रवाई समेत किसी भी परिस्थिति में राहत, बचाव और बैकअप टीम के तौर पर शेष नाव का इस्तेमाल किया जाएगा। रेस्क्यू बोट आने के बाद कई क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई भी संभव हो जाएगी। विभाग ने इसकी योजना और प्रस्ताव बनाकर मंजूरी के लिए भेज दिया है।