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भारतीय मजदूर संघ ने किया सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
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केंद्र सरकार की श्रम विरोधी नीति के खिलाफ प्रदर्शन करते भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ता, संवाद।
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। बेलगाम हो रही महंगाई के मद्देनजर भारतीय मजदूर संघ की कठुआ इकाई ने वीरवार को सरकार के खिलाफ कड़ा रोष जताया है। संघ के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते समाज के सबसे कमजोर तबके का शोषण करने का आरोप लगाया है।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे संघ के प्रधान अशफाक अहमद चौहान ने कहा कि सरकार श्रमिक वर्ग के खिलाफ काम कर रही है। सरकार ने नियोक्ताओं को तो मजबूत किया है, लेकिन फिक्स टर्म रोजगार मजदूर वर्ग के रोजगार की गारंटी को नष्ट किया है। यदि कोई नियोक्ता जानबूझकर श्रमिकों को ईएसआई, पीएफ और सामाजिक सुरक्षा कानूनों से वंचित करता है, तो श्रमिक अधिकारी तब तक कार्रवाई नहीं कर सकते, जब तक उन्हें सरकार से अनुमति नहीं मिल जाती।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में न्यूनतम मजदूरी वर्ष 2017 में अंतिम बार संशोधित कर 6750 रुपये तय की गई थी। इसके बाद से सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। लेकिन, पांच साल बीत जाने के बाद भी आज तक दोबारा इस पर विचार नहीं किया गया। इससे मजदूर तबके का अपनी जरूरत की चीजों का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का वेतन छह महीने से नहीं मिला। जबकि काम का बोझ प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। ऐसी ही स्थिति दिहाड़ी मजदूरों और योजना कर्मचारियों की है। उनका वेतन लंबित होने बावजूद श्रम अदालतों के आदेशों को उपायुक्त लागू नहीं करते।
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अशफाक ने कहा कि गरीब श्रमिक अपने बकाया को पाने के लिए वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को जल्द उनकी शिकायतों पर विचार करना होगा। नहीं तो आने वाले समय में मजदूर वर्ग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के क्रोध का सामना करना पड़ेगा। इस मौके पर सुनील कुमार, रमेश बनोत्रा, महेंद्र सिंह, हरजीत सिंह, करनैल सिंह, आदि मौजूद रहे।
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प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे संघ के प्रधान अशफाक अहमद चौहान ने कहा कि सरकार श्रमिक वर्ग के खिलाफ काम कर रही है। सरकार ने नियोक्ताओं को तो मजबूत किया है, लेकिन फिक्स टर्म रोजगार मजदूर वर्ग के रोजगार की गारंटी को नष्ट किया है। यदि कोई नियोक्ता जानबूझकर श्रमिकों को ईएसआई, पीएफ और सामाजिक सुरक्षा कानूनों से वंचित करता है, तो श्रमिक अधिकारी तब तक कार्रवाई नहीं कर सकते, जब तक उन्हें सरकार से अनुमति नहीं मिल जाती।
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उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में न्यूनतम मजदूरी वर्ष 2017 में अंतिम बार संशोधित कर 6750 रुपये तय की गई थी। इसके बाद से सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। लेकिन, पांच साल बीत जाने के बाद भी आज तक दोबारा इस पर विचार नहीं किया गया। इससे मजदूर तबके का अपनी जरूरत की चीजों का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का वेतन छह महीने से नहीं मिला। जबकि काम का बोझ प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। ऐसी ही स्थिति दिहाड़ी मजदूरों और योजना कर्मचारियों की है। उनका वेतन लंबित होने बावजूद श्रम अदालतों के आदेशों को उपायुक्त लागू नहीं करते।
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अशफाक ने कहा कि गरीब श्रमिक अपने बकाया को पाने के लिए वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को जल्द उनकी शिकायतों पर विचार करना होगा। नहीं तो आने वाले समय में मजदूर वर्ग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के क्रोध का सामना करना पड़ेगा। इस मौके पर सुनील कुमार, रमेश बनोत्रा, महेंद्र सिंह, हरजीत सिंह, करनैल सिंह, आदि मौजूद रहे।