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जलशक्ति विभाग के खिलाफ प्रदर्शन
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पेयजल समस्या के चलते जलशक्ति विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते खरोट वासी, संवाद।
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। जलशक्ति विभाग के खिलाफ खरोट के लोगों का गुस्सा रविवार को फूट पड़ा। गांव का तालाब जहां एक महीने से क्षतिग्रस्त हो चुका है, वहीं ट्यूबवेल पर ताला जड़ा देख उनका गुस्सा सातवें आसमान पर रहा।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जलशक्ति विभाग की लचर कार्यप्रणाली के चलते हालात ऐसे बन गए हैं कि ग्रामीणों को अपने पुश्तैनी घरों को छोड़कर पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। आलम यह है कि पीने का पानी आठ-आठ दिन बाद मिल रहा है। इस बीच उन्हें मजबूरन तालाब का पानी पीने को मजबूर होना पड़ता है, जो बरसात में दूषित होने के बाद बीमारियों को भी दावत देता है।
प्रदर्शनकारियों में शामिल कुलदीप भूषण ने बताया कि जलशक्ति विभाग को कई बार बताया गया कि ट्यूबवेल बंद रहता है। हालात यह हो चुके हैं कि ग्रामीण पलायन को मजबूर हो रहे हैं। ट्यूबवेल न चलने पर ग्रामीण तालाब का पानी पीने को मजबूर होते हैं, लेकिन बारिश के चलते तालाब भी क्षतिग्रस्त हो गया है। करोड़ों की राशि व्यर्थ बर्बाद की जा रही है। ट्यूबवेल का फायदा क्षेत्र की आबादी को सही से नहीं मिल पा रहा है। लोग निजी तौर पर पानी के टैंकर मंगा रहे हैं।
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अन्य प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तालाब टूटे एक महीना हो गया, लेकिन इसे ठीक करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। आठ-आठ दिन पानी मिले हो जाते हैं। ऐसे में गर्मी के दिन तो क्षेत्र के लोगों के लिए मुसीबत से कम नहीं। वे तालाब का पानी पीने को मजबूर हो रहे हैं। उन्हें कर्मचारियों से कोई बैर नहीं, लेकिन अधिकारी अपने ढांचों पर भी नजर रखें। अधिकतर लोग गरीब और दैनिक वेतनभोगी हैं। ऐसे में रोज रोज पानी का टैंकर मंगाने में भी असमर्थ हैं। प्रशासन व्यवस्था को दुरुस्त कर उन्हें राहत दिलाए।
............
क्षेत्र में पानी की कोई दिक्कत नहीं है। मामला रविवार को ही संज्ञान में आया है। सोमवार को मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे और कारणों की जांच की जाएगी।
- विक्रम डोगरा, कार्यकारी अभियंता, जलशक्ति विभाग
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ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जलशक्ति विभाग की लचर कार्यप्रणाली के चलते हालात ऐसे बन गए हैं कि ग्रामीणों को अपने पुश्तैनी घरों को छोड़कर पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। आलम यह है कि पीने का पानी आठ-आठ दिन बाद मिल रहा है। इस बीच उन्हें मजबूरन तालाब का पानी पीने को मजबूर होना पड़ता है, जो बरसात में दूषित होने के बाद बीमारियों को भी दावत देता है।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल कुलदीप भूषण ने बताया कि जलशक्ति विभाग को कई बार बताया गया कि ट्यूबवेल बंद रहता है। हालात यह हो चुके हैं कि ग्रामीण पलायन को मजबूर हो रहे हैं। ट्यूबवेल न चलने पर ग्रामीण तालाब का पानी पीने को मजबूर होते हैं, लेकिन बारिश के चलते तालाब भी क्षतिग्रस्त हो गया है। करोड़ों की राशि व्यर्थ बर्बाद की जा रही है। ट्यूबवेल का फायदा क्षेत्र की आबादी को सही से नहीं मिल पा रहा है। लोग निजी तौर पर पानी के टैंकर मंगा रहे हैं।
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अन्य प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तालाब टूटे एक महीना हो गया, लेकिन इसे ठीक करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। आठ-आठ दिन पानी मिले हो जाते हैं। ऐसे में गर्मी के दिन तो क्षेत्र के लोगों के लिए मुसीबत से कम नहीं। वे तालाब का पानी पीने को मजबूर हो रहे हैं। उन्हें कर्मचारियों से कोई बैर नहीं, लेकिन अधिकारी अपने ढांचों पर भी नजर रखें। अधिकतर लोग गरीब और दैनिक वेतनभोगी हैं। ऐसे में रोज रोज पानी का टैंकर मंगाने में भी असमर्थ हैं। प्रशासन व्यवस्था को दुरुस्त कर उन्हें राहत दिलाए।
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क्षेत्र में पानी की कोई दिक्कत नहीं है। मामला रविवार को ही संज्ञान में आया है। सोमवार को मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे और कारणों की जांच की जाएगी।
- विक्रम डोगरा, कार्यकारी अभियंता, जलशक्ति विभाग