{"_id":"5f6e52028ebc3e9bd646dc25","slug":"protest-kathua-news-jmu219452655","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृषि विधेयक के विरोध में बिफरे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कृषि विधेयक के विरोध में बिफरे किसान
विज्ञापन
कृषि विधेयक के विरोध में प्रदर्शन करते किसान संगठनों के सदस्य।
कठुआ। केंद्र सरकार के कृषि सुधार विधेयक के विरोध में राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के प्रदर्शन में कठुआ के किसान भी शामिल हुए। शुक्रवार को कांग्रेस ने डीसी दफ्तर और जम्मू-कश्मीर किसान तहरीक के बैनर तले किसानों ने ड्रीम लैंड पार्क के बाहर प्रदर्शन किया। किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री गारू राम की अध्यक्षता में किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और राष्ट्रपति को डीसी कठुआ के माध्यम से ज्ञापन भी भेजा।
पूर्व मंत्री गारू राम ने कहा कि एक तरफ सरकार 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की बात करती है। वहीं इस तरह के विधेयक लाकर किसानों को पूंजीपतियों और जमाखोरों के हवाले कर दे रही है। इस तरह की व्यवस्था केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी प्रभावित करेगी। इसका कांग्रेस कड़ा विरोध करती है। कहा कि शुक्रवार को उन्होंने डीसी के माध्यम से प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम अपनी मांगों का ज्ञापन भेजा है। अगर इसके बाद भी सरकार की आंखें नहीं खुलीं तो पार्टी आंदोलन शुरू कर देगी। इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता पंकज डोगरा, सरपंच जराई आराधना अंडोत्रा, निर्दोष शर्मा, तरसेम लाल सैनी आदि मौजूद थे।
-------------------
कृषि विधेयक किसान ही नहीं जनता विरोधी भी
ग्रीन लैंड पार्क में प्रदर्शन के दौरान जम्मू-कश्मीर किसान तहरीक के प्रांतीय प्रधान बनारसी दास ने कहा कि सरकार की ओर से लाया गया विधेयक कृषि सुधार नहीं, बल्कि किसान विरोधी है। इससे न केवल महंगाई बढ़ेग, बल्कि यह आम लोगों, कामगारों और किसानों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार का दायित्व होता है कि वह किसान के फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करे और फसल को खरीदने की भी व्यवस्था करे। लेकिन इस विधेयक के कानून बन जाने की स्थिति में न तो किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिलेगा, बल्कि जमाखोरी को भी बढ़ावा मिलेगा। आवश्यक सेवा के दायरे में आने वाले खाद्य पदार्थों, जिसमें दालें, आलू, तिलहन और प्याज इत्यादि को निकाल दिया गया है। कुल मिलाकर यह बिल न केवल किसान विरोधी, बल्कि आम लोगों को भी प्रभावित करेगा। जिसका किसान संगठन विरोध करते हैं। बनारसी दास ने कहा कि अगर सरकार ने इस विधेयक को एक कानून की शक्ल देनी है तो पहले इस पर पूरी चर्चा होनी चाहिए। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य को निर्धारित करने के साथ-साथ कृषि उत्पादन को खरीद की व्यवस्था सरकार अपने जिम्मे लेनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसके खिलाफ किसानों का प्रदर्शन निरंतर जारी रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
पूर्व मंत्री गारू राम ने कहा कि एक तरफ सरकार 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की बात करती है। वहीं इस तरह के विधेयक लाकर किसानों को पूंजीपतियों और जमाखोरों के हवाले कर दे रही है। इस तरह की व्यवस्था केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी प्रभावित करेगी। इसका कांग्रेस कड़ा विरोध करती है। कहा कि शुक्रवार को उन्होंने डीसी के माध्यम से प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम अपनी मांगों का ज्ञापन भेजा है। अगर इसके बाद भी सरकार की आंखें नहीं खुलीं तो पार्टी आंदोलन शुरू कर देगी। इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता पंकज डोगरा, सरपंच जराई आराधना अंडोत्रा, निर्दोष शर्मा, तरसेम लाल सैनी आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
-------------------
कृषि विधेयक किसान ही नहीं जनता विरोधी भी
ग्रीन लैंड पार्क में प्रदर्शन के दौरान जम्मू-कश्मीर किसान तहरीक के प्रांतीय प्रधान बनारसी दास ने कहा कि सरकार की ओर से लाया गया विधेयक कृषि सुधार नहीं, बल्कि किसान विरोधी है। इससे न केवल महंगाई बढ़ेग, बल्कि यह आम लोगों, कामगारों और किसानों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार का दायित्व होता है कि वह किसान के फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करे और फसल को खरीदने की भी व्यवस्था करे। लेकिन इस विधेयक के कानून बन जाने की स्थिति में न तो किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिलेगा, बल्कि जमाखोरी को भी बढ़ावा मिलेगा। आवश्यक सेवा के दायरे में आने वाले खाद्य पदार्थों, जिसमें दालें, आलू, तिलहन और प्याज इत्यादि को निकाल दिया गया है। कुल मिलाकर यह बिल न केवल किसान विरोधी, बल्कि आम लोगों को भी प्रभावित करेगा। जिसका किसान संगठन विरोध करते हैं। बनारसी दास ने कहा कि अगर सरकार ने इस विधेयक को एक कानून की शक्ल देनी है तो पहले इस पर पूरी चर्चा होनी चाहिए। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य को निर्धारित करने के साथ-साथ कृषि उत्पादन को खरीद की व्यवस्था सरकार अपने जिम्मे लेनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसके खिलाफ किसानों का प्रदर्शन निरंतर जारी रहेगा।
विज्ञापन