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उज्ज दरिया पर पुल के निर्माण की सुस्त रफ्तार पर लोगों ने जताया रोष
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उज्ज दरिया पर पुल के निर्माण को पूरा किए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते जुथाना वासी, संवाद।
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। पांच हजार की आबादी वाली तीन पंचायतों के लोग पिछले पांच वर्षों से जिस पुल के निर्माण का सपना देख रहे हैं, वह पूरा होता नजर नहीं आ रहा। इस कारण क्षेत्र के लोगों में सरकार, विभाग और जनप्रतिनिधियों के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है।
बरनोटी ब्लॉक की पंचायत जुथाना के लोग रविवार को निर्माणाधीन पुल के किनारे एकत्रित हुए। उन्होंने कहा कि लगभग पांच साल पहले उज्ज दरिया पर पुल का निर्माण शुरू हुआ था। जेकेपीसीसी परियोजना पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रही है, वहीं ठेकेदार भी काम में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। हालात यह हैं कि काम खानाबदोशों की तरह किया जा रहा है।
लोगों ने कहा कि कुछ महीने काम करने के बाद ठेकेदार मशीनों से लेकर शटरिंग को दूसरी साइट पर शिफ्ट कर देता है। ग्रामीण जब बोलते हैं तो एक मशीन खड़ी कर दी जाती है। यह दिलासा देने के लिए कि काम शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हो रहा है।
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ग्रामीणों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि बरसात में पुल का निर्माण भले न हो पाए, लेकिन अप्रोच सड़क का काम किया जाना चाहिए। लेकिन, उसे भी अंजाम नहीं दिया जा रहा है। वर्तमान में वैक्सीनेशन की प्रक्रिया चल रही है, और ग्रामीणों को इसके लिए दन्नी पीएचसी में जाना पड़ता है। इसके लिए उफनते दरिया को पार करना ही एक जरिया है।
उन्होंने बताया कि लाहड़ी, बोहड़ा और जुथाना पंचायतों के लोग पुल का काम पूरा न होने से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। गर्भवती महिलाओं से लेकर गंभीर बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाना भी किसी मुसीबत से कम नहीं लगता है। कई लोग इसी वजह से रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
रक्षा देवी ने बताया कि महिलाओं और बच्चों को मजबूरी में दरिया पार करना पड़ता है। दरिया पार करते हुए महिलाओं के कपड़े भीग जाते हैं। वे कपड़े भी मजबूरन उन्हें खुले में ही बदलने पड़ते हैं। सरकार क्षेत्र के लोगों की समस्या को गंभीरता से ले और पुल का काम जल्द पूरा करे।
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1800 मीटर अप्रोच रोड का बड़ा कार्य शेष
जिले में बारिश के दौरान सबसे अधिक उफान पर रहने वाले उज्ज दरिया से जिले की तीन पंचायतों का संपर्क आए दिन मुख्यालय से कट जाता है। फिर चाहे किसी गंभीर को अस्पताल तक पहुंचाना हो, या फिर किसी जरूरी काम से किसी को कहीं जाना हो, सब काम धरे के धरे रह जाते हैं।
लगभग 46 करोड़ की लागत से 500 मीटर लंबे पुल का निर्माण उज्ज दरिया पर वर्ष 2016 से शुरू किया गया है। इसमें 13 स्तंभ बन चुके हैं, और चार पर स्लैब भी पड़ चुकी है। लेकिन, पुल के दोनों ओर 1800 मीटर अप्रोच रोड का बड़ा कार्य शेष बचा हुआ है, जो एक सिरे पर जखोल से जुड़ कर दूसरे सिरे पर जुथाना से जुड़ता है। इस पुल का निर्माण कार्य करीब डेढ़ साल से फंड के अभाव में बंद पड़ा था। सरकार ने गत 9 जनवरी को पुल के निर्माण के लिए फंड जारी करने का दावा किया, जिससे लोगों को इस बरसात से पहले पुल का निर्माण होने की उम्मीद जगी। लेकिन, कार्य की सुस्त रफ्तार ने ग्रामीणों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है।
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बरनोटी ब्लॉक की पंचायत जुथाना के लोग रविवार को निर्माणाधीन पुल के किनारे एकत्रित हुए। उन्होंने कहा कि लगभग पांच साल पहले उज्ज दरिया पर पुल का निर्माण शुरू हुआ था। जेकेपीसीसी परियोजना पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रही है, वहीं ठेकेदार भी काम में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। हालात यह हैं कि काम खानाबदोशों की तरह किया जा रहा है।
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लोगों ने कहा कि कुछ महीने काम करने के बाद ठेकेदार मशीनों से लेकर शटरिंग को दूसरी साइट पर शिफ्ट कर देता है। ग्रामीण जब बोलते हैं तो एक मशीन खड़ी कर दी जाती है। यह दिलासा देने के लिए कि काम शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हो रहा है।
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ग्रामीणों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि बरसात में पुल का निर्माण भले न हो पाए, लेकिन अप्रोच सड़क का काम किया जाना चाहिए। लेकिन, उसे भी अंजाम नहीं दिया जा रहा है। वर्तमान में वैक्सीनेशन की प्रक्रिया चल रही है, और ग्रामीणों को इसके लिए दन्नी पीएचसी में जाना पड़ता है। इसके लिए उफनते दरिया को पार करना ही एक जरिया है।
उन्होंने बताया कि लाहड़ी, बोहड़ा और जुथाना पंचायतों के लोग पुल का काम पूरा न होने से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। गर्भवती महिलाओं से लेकर गंभीर बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाना भी किसी मुसीबत से कम नहीं लगता है। कई लोग इसी वजह से रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
रक्षा देवी ने बताया कि महिलाओं और बच्चों को मजबूरी में दरिया पार करना पड़ता है। दरिया पार करते हुए महिलाओं के कपड़े भीग जाते हैं। वे कपड़े भी मजबूरन उन्हें खुले में ही बदलने पड़ते हैं। सरकार क्षेत्र के लोगों की समस्या को गंभीरता से ले और पुल का काम जल्द पूरा करे।
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1800 मीटर अप्रोच रोड का बड़ा कार्य शेष
जिले में बारिश के दौरान सबसे अधिक उफान पर रहने वाले उज्ज दरिया से जिले की तीन पंचायतों का संपर्क आए दिन मुख्यालय से कट जाता है। फिर चाहे किसी गंभीर को अस्पताल तक पहुंचाना हो, या फिर किसी जरूरी काम से किसी को कहीं जाना हो, सब काम धरे के धरे रह जाते हैं।
लगभग 46 करोड़ की लागत से 500 मीटर लंबे पुल का निर्माण उज्ज दरिया पर वर्ष 2016 से शुरू किया गया है। इसमें 13 स्तंभ बन चुके हैं, और चार पर स्लैब भी पड़ चुकी है। लेकिन, पुल के दोनों ओर 1800 मीटर अप्रोच रोड का बड़ा कार्य शेष बचा हुआ है, जो एक सिरे पर जखोल से जुड़ कर दूसरे सिरे पर जुथाना से जुड़ता है। इस पुल का निर्माण कार्य करीब डेढ़ साल से फंड के अभाव में बंद पड़ा था। सरकार ने गत 9 जनवरी को पुल के निर्माण के लिए फंड जारी करने का दावा किया, जिससे लोगों को इस बरसात से पहले पुल का निर्माण होने की उम्मीद जगी। लेकिन, कार्य की सुस्त रफ्तार ने ग्रामीणों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है।