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Kathua News: नायब तहसीलदार भर्ती के लिए उर्दू भाषा की अनिवार्यता का विरोध
Thu, 12 Jun 2025 12:35 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 12 Jun 2025 12:35 AM IST
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कठुआ में प्रदर्शन करते अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता।
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कठुआ। नायब तहसीलदार पद की भर्ती के लिए उर्दू भाषा को अनिवार्य करने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कड़ा विरोध जताया है। परिषद के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को परशुराम चौक पर प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
परिषद के जिला संयोजक कुलदीप कुमार ने भर्ती परीक्षा में उर्दू की अनिवार्यता को जम्मू संभाग के युवाओं से भेदभाव बताया। उन्होंने कहा कि इससे जम्मू क्षेत्र के लोग चयन से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि नायब तहसीलदार पद की भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में भी उर्दू भाषा से 100 अंकों के प्रश्नों को शामिल किया जा रहा है। यह जम्मू संभाग के युवाओं की अनदेखी है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
जम्मू कश्मीर सेवा चयन बोर्ड को भी घेरे में लेते हुए एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि इसकी भर्ती परीक्षाएं भी पूरी नहीं हो पा रहीं हैं। भले ही सरकार उर्दू को प्रोत्साहन देना चाहती हो तो लेकिन इसका अर्थ यह कभी नहीं हो सकता कि हमारी राष्ट्र भाषा हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की अनदेखी हो। युवाओं ने भर्ती परीक्षा में हिंदी, डोगरी, संस्कृत और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले युवाओं को भी समान अवसर दिलाने की मांग की है।
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उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द सरकार ने अपने इस फैसले में बदलाव नहीं किया तो आने वाले दिनों में पूरे संभाग के युवा इसके खिलाफ सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इस दौरान कमल सिंह, रमेश चंद्र, गुलाब सिंह, उमेश कुमार, सतनाम सिंह आदि युवा शामिल रहे।
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परिषद के जिला संयोजक कुलदीप कुमार ने भर्ती परीक्षा में उर्दू की अनिवार्यता को जम्मू संभाग के युवाओं से भेदभाव बताया। उन्होंने कहा कि इससे जम्मू क्षेत्र के लोग चयन से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि नायब तहसीलदार पद की भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में भी उर्दू भाषा से 100 अंकों के प्रश्नों को शामिल किया जा रहा है। यह जम्मू संभाग के युवाओं की अनदेखी है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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जम्मू कश्मीर सेवा चयन बोर्ड को भी घेरे में लेते हुए एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि इसकी भर्ती परीक्षाएं भी पूरी नहीं हो पा रहीं हैं। भले ही सरकार उर्दू को प्रोत्साहन देना चाहती हो तो लेकिन इसका अर्थ यह कभी नहीं हो सकता कि हमारी राष्ट्र भाषा हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की अनदेखी हो। युवाओं ने भर्ती परीक्षा में हिंदी, डोगरी, संस्कृत और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले युवाओं को भी समान अवसर दिलाने की मांग की है।
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उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द सरकार ने अपने इस फैसले में बदलाव नहीं किया तो आने वाले दिनों में पूरे संभाग के युवा इसके खिलाफ सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इस दौरान कमल सिंह, रमेश चंद्र, गुलाब सिंह, उमेश कुमार, सतनाम सिंह आदि युवा शामिल रहे।