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घर जाने को बचैन बीस हजार श्रमिक
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अपने गृहजिलों को जाने के लिए बसों पर सामान रखते लोग।
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। जिले में श्रम विभाग के पास पंजीकृत करीब 12 हजार श्रमिकों के साथ साथ गैर पंजीकृत लगभग आठ हजार अन्य श्रमिक अब घर जाने को बेचैन हैं। लॉकडाउन के बीच जहां इन इकाइयों में प्रबंधकों की ओर से अप्रैल के वेतन में कटौती की गई है, वहीं श्रमिकों के सब्र का बांध भी टूटता नजर आ रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह भी है कि यदि ये सभी श्रमिक अपने-अपने राज्यों को लौट गए तो जिले में चल रही इकाइयों में काम कैसे चलेगा और अर्थव्यवस्था में सुधार कैसे होगा। इसी को रोकने के लिए गृह मंत्रालय ने निर्देश दिए थे कि श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार दिया जाए। जिसके बाद प्रदेश प्रशासन की ओर से अपील की गई, लेकिन लॉकडाउन लगातार बढ़ने के बाद अन्य राज्यों से आए श्रमिक अब घरों को वापस लौटना चाहते हैं। इसका परिणाम यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में ये श्रमिक अब पिछले एक सप्ताह से पैदल ही घरों की ओर निकलना शुरू कर दिए हैं।
प्रदेश सरकार की ओर से किए जा रहे श्रमिक वर्ग के घर वापसी के लिए पंजीकरण में भी एक बड़ी मुसीबत सामने आ रही है, जिससे श्रमिक वर्ग को दो-चार होना पड़ रहा है। दिहाड़ी लगाकर गुजारा करने वाले इन श्रमिकों में अधिकतर ऐसे हैं, जो पढ़े-लिखे नहीं है, लेकिन सरकार ने इनके पंजीकरण के लिए पोर्टल तैयार किया है जहां उन्हें पंजीकरण के लिए कहा जा रहा है। ऐसे में अधिकतर श्रमिक पशोपेश में हैं कि सरकार उचित प्रबंध करने की जगह उन्हें इस तरह से परेशान क्यों कर रही है। एक श्रमिक ने बताया कि यदि वह इतने पढ़े-लिखे होते कि पंजीकरण करवा सकते तो शायद बेहतर नौकरियों के लिए पंजीकरण किया होता। यह एक किस्म का उनके साथ मजाक है।
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पूर्व में एकत्रित किए गए श्रमिकों के डाटे के अनुसार वर्तमान में 11 हजार आठ सौ लोग विभिन्न श्रेणी के श्रमिकों के रूप में कठुआ में मौजूद हैं। श्रम आयुक्त कार्यालय के ओर से ऑनलाइन पंजीकरण किया जा रहा है। घरों को लौटने के लिए पूछताछ करने वाले श्रमिकों को यह पंजीकरण लिंक उपलब्ध करवाया जा रहा है। पूर्व में एकत्रित डाटा के अनुसार सीटीएम में जहां 58 सौ के लगभग श्रमिक हैं तो वहीं ग्रेफ के पास विभिन्न राज्यों और प्रदेशों के चार सौ श्रमिक हैं। रामनगर कॉलोनी में एक हजार से अधिक श्रमिक परिवार वर्तमान में ठहरे हुए हैं।
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सपना सिंह
सहायक श्रम आयुक्त, कठुआ
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प्रदेश सरकार की ओर से किए जा रहे श्रमिक वर्ग के घर वापसी के लिए पंजीकरण में भी एक बड़ी मुसीबत सामने आ रही है, जिससे श्रमिक वर्ग को दो-चार होना पड़ रहा है। दिहाड़ी लगाकर गुजारा करने वाले इन श्रमिकों में अधिकतर ऐसे हैं, जो पढ़े-लिखे नहीं है, लेकिन सरकार ने इनके पंजीकरण के लिए पोर्टल तैयार किया है जहां उन्हें पंजीकरण के लिए कहा जा रहा है। ऐसे में अधिकतर श्रमिक पशोपेश में हैं कि सरकार उचित प्रबंध करने की जगह उन्हें इस तरह से परेशान क्यों कर रही है। एक श्रमिक ने बताया कि यदि वह इतने पढ़े-लिखे होते कि पंजीकरण करवा सकते तो शायद बेहतर नौकरियों के लिए पंजीकरण किया होता। यह एक किस्म का उनके साथ मजाक है।
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पूर्व में एकत्रित किए गए श्रमिकों के डाटे के अनुसार वर्तमान में 11 हजार आठ सौ लोग विभिन्न श्रेणी के श्रमिकों के रूप में कठुआ में मौजूद हैं। श्रम आयुक्त कार्यालय के ओर से ऑनलाइन पंजीकरण किया जा रहा है। घरों को लौटने के लिए पूछताछ करने वाले श्रमिकों को यह पंजीकरण लिंक उपलब्ध करवाया जा रहा है। पूर्व में एकत्रित डाटा के अनुसार सीटीएम में जहां 58 सौ के लगभग श्रमिक हैं तो वहीं ग्रेफ के पास विभिन्न राज्यों और प्रदेशों के चार सौ श्रमिक हैं। रामनगर कॉलोनी में एक हजार से अधिक श्रमिक परिवार वर्तमान में ठहरे हुए हैं।
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सपना सिंह
सहायक श्रम आयुक्त, कठुआ