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Kathua News: बिना डॉक्टर के चल रही पीएचसी मढ़ीन, 15 साल से एमबीबीएस डॉक्टर के पद खाली
Mon, 23 Jun 2025 09:19 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 23 Jun 2025 09:19 PM IST
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इमारत की मरम्मत के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को भी किया जाए बेहतर
संवाद न्यूज एजेंसी
हीरानगर। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर प्रदेश सरकार के दावे फिलहाल जमीन स्तर पर खोखले ही साबित हो रहे हैं। उपमंडल में ज्यादातर प्राइमरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) बिना डॉक्टर के चल रहे हैं। जहां स्थाई कर्मचारियों के हाथों में लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है।
मढ़ीन पीएचसी करीब तीन दशक से अधिक पुराना स्वास्थ्य केंद्र है। लेकिन आज भी यहां सुविधा नाम मात्र ही है। स्वास्थ्य केंद्र की करीब 25 वर्ष पुरानी इमारत की हालत भी खस्ता हो चुकी थी लेकिन हाल ही में इसकी मरम्मत का काम कराया गया। लोगों का कहना है कि इमारत की मरम्मत तो कर दी, बेहतर होगा यहां स्वास्थ्य सुविधाओं को भी बेहतर किया जाए। करीब 15 वर्षों से अधिक समय से यहां डॉक्टर के पद खाली हैं। दो एमबीबीएस डॉक्टर के पद होने के बावजूद सरकार यहां डॉक्टर नियुक्त नहीं कर पाई है। ज्यादातर सीमावर्ती इलाके इस स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ते हैं। डॉक्टरों की सुविधा न होने के कारण मजबूरन लोगों को या तो झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है और या फिर आसपास के निजी स्वास्थ्य केंद्रों में।
स्थानीय निवासी मखनी वर्मा ने कहा कि प्राइमरी हेल्थ सेंटर मात्र नाम का रह गया है। यह स्वास्थ्य केंद्र अस्थाई कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। बरसात के मौसम में धान की रोपाई के दौरान कई बार किसानों को सांप काट लेते हैं। लेकिन यहां इलाज की सुविधा न होने के कारण लोगों को कठुआ या किसी दूसरे अस्पताल में जाना पड़ता है। अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर के दो पद हैं, लेकिन यह डॉक्टर कभी भी यह लोगों को देखने को नहीं मिले। प्रदेश की मौजूदा सरकार को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
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चौधरी शिवदेव सिंह ने कहा अस्पताल की पुरानी इमारत की मरम्मत का काम तो किया गया है, लेकिन अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं अभी भी अधूरी हैं। उन्होंने कहा कस्बे के बीच स्वस्थ केंद्र होने के बावजूद लोगों को स्वास्थ्य की जांच के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों में जाना पड़ता है। सरकारों की ओर से कई वर्षों से स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन इस स्वास्थ्य केंद्र की हालत हमें बदलती नहीं दिखी है।
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कोट
अस्पताल की पुरानी इमारत की मरम्मत का काम पूरा हो गया है, करीब 15 लाख इस पर खर्च हुए हैं। इमारत के साथ-साथ जल्द स्वास्थ्य सुविधाएं भी बेहतर होंगी। डॉक्टर के खाली पड़े पद की जानकारी विभाग उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है।
- डॉ. स्वामी शरण, बीएमओ।
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हीरानगर। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर प्रदेश सरकार के दावे फिलहाल जमीन स्तर पर खोखले ही साबित हो रहे हैं। उपमंडल में ज्यादातर प्राइमरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) बिना डॉक्टर के चल रहे हैं। जहां स्थाई कर्मचारियों के हाथों में लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है।
मढ़ीन पीएचसी करीब तीन दशक से अधिक पुराना स्वास्थ्य केंद्र है। लेकिन आज भी यहां सुविधा नाम मात्र ही है। स्वास्थ्य केंद्र की करीब 25 वर्ष पुरानी इमारत की हालत भी खस्ता हो चुकी थी लेकिन हाल ही में इसकी मरम्मत का काम कराया गया। लोगों का कहना है कि इमारत की मरम्मत तो कर दी, बेहतर होगा यहां स्वास्थ्य सुविधाओं को भी बेहतर किया जाए। करीब 15 वर्षों से अधिक समय से यहां डॉक्टर के पद खाली हैं। दो एमबीबीएस डॉक्टर के पद होने के बावजूद सरकार यहां डॉक्टर नियुक्त नहीं कर पाई है। ज्यादातर सीमावर्ती इलाके इस स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ते हैं। डॉक्टरों की सुविधा न होने के कारण मजबूरन लोगों को या तो झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है और या फिर आसपास के निजी स्वास्थ्य केंद्रों में।
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स्थानीय निवासी मखनी वर्मा ने कहा कि प्राइमरी हेल्थ सेंटर मात्र नाम का रह गया है। यह स्वास्थ्य केंद्र अस्थाई कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। बरसात के मौसम में धान की रोपाई के दौरान कई बार किसानों को सांप काट लेते हैं। लेकिन यहां इलाज की सुविधा न होने के कारण लोगों को कठुआ या किसी दूसरे अस्पताल में जाना पड़ता है। अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर के दो पद हैं, लेकिन यह डॉक्टर कभी भी यह लोगों को देखने को नहीं मिले। प्रदेश की मौजूदा सरकार को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
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चौधरी शिवदेव सिंह ने कहा अस्पताल की पुरानी इमारत की मरम्मत का काम तो किया गया है, लेकिन अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं अभी भी अधूरी हैं। उन्होंने कहा कस्बे के बीच स्वस्थ केंद्र होने के बावजूद लोगों को स्वास्थ्य की जांच के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों में जाना पड़ता है। सरकारों की ओर से कई वर्षों से स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन इस स्वास्थ्य केंद्र की हालत हमें बदलती नहीं दिखी है।
कोट
अस्पताल की पुरानी इमारत की मरम्मत का काम पूरा हो गया है, करीब 15 लाख इस पर खर्च हुए हैं। इमारत के साथ-साथ जल्द स्वास्थ्य सुविधाएं भी बेहतर होंगी। डॉक्टर के खाली पड़े पद की जानकारी विभाग उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है।
- डॉ. स्वामी शरण, बीएमओ।