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Kathua News: होली पर बरसेगा गुलाल, डिजाइनर पिचकारियों की खूब खरीदारी
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कठुआ में होली के लिए पिचकारियां खरीदते लोग। संवाद
-चाइनीज के मुकाबले भारतीय उत्पादों की अधिकता, बच्चों में खासा उत्साह
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। रंगों के पर्व होली को लेकर दुकानें सज चुकी हैं। रंगोत्सव का उत्साह हर किसी को बाजार की ओर खींच रहा है। शहर के बाजारों में रंग-गुलाल और पिचकारियों की खरीदारी शुरू हो गई है। दुकानों पर रौनक दिखने लगी है। त्योहार को लेकर बच्चों में खासा उत्साह है।
बाजार में सजी दुकानों पर नजर दौड़ाएं तो एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चाइनीज के मुकाबले भारतीय उत्पादों की अधिकता नजर आ रही है। पिछले कुछ सालों में ग्राहकों का चाइनीज उत्पादों से मोहभंग हुआ है। एक-दो अपवाद काे अगर छोड़ दिया जाए तो दुकानदार भी अब भारतीय उत्पादों से ही दुकानों को सजा रहे हैं। इस बार बाजार में जहां स्काई गुलाल, वैलून गुलाल, इलेक्ट्रॉनिक गुलाल गन, सिलेंडर गुलाल पिचकारी जैसी नई आइटमें भी देखने को मिल रही हैं।
बाजार में इस बार बंदूक के डिजाइन वाली पिचकारियां खूब दिखाई दे रही हैं जो सामान्य तौर पर 20 से 250 रुपये तक बिक रही हैं। आज भी पंप के डिजाइन वाली पिचकारी की सबसे ज्यादा मांग बनी हुई है। रंग और गुलाल की स्थिति भी ऐसी ही है। पानी में घोल कर इस्तेमाल किए जाने वाले रंग बिक रहे हैं। वहीं, 80 प्रतिशत ग्राहकों की पसंद आज भी गुलाल बना हुआ हुआ। 40 प्रतिशत तक ग्राहक हर्बल रंग की खरीदारी कर रहे हैं।
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होली के उत्पादों के कारोबार से जुड़े राहुल बावा की मानें तो इस वर्ष के दाम में कोई बदलाव नहीं आया है। वहीं, इस बार होली से काफी पहले ही मौसम बदल गया था। जिसे देखते हुए उन्होंने 30 प्रतिशत के करीब ज्यादा माल मंगवाया है। महाशिवरात्रि के आसपास हुई बारिश के कारण बाजार में खरीदारी नहीं शुरू हुई थी लेकिन पिछले दो दिन से जिस तरह से कारोबार ने गति पकड़ी है। उसने काफी राहत प्रदान की है।
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केमिकल युक्त रंगों से बचें, हो सकता है त्वचा रोग
रंगों के पर्व पर अक्सर लोग केमिकल युक्त रंगों का भी प्रयोग करते हैं। जिससे चेहरे और शरीर पर त्वचा रोग हो सकता है। इससे बचने के लिए सबसे पहले तो रंगों के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए। पहले भी होली हर्बल और ऑर्गेनिक रंगों से ही खेली जाती थी। लिहाजा इसका ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। केमिकल रंगों के रिएक्शन से बचने के लिए हमें स्किन हाइड्रेशन पर काम करना चाहिए। होली खेलने से पहले चेहरे व शरीर पर मॉइश्चराइजर अच्छी तरह से लगा लें। होली से एक-दो दिन पहले सिर पर अच्छे से सरसों का तेल लगाएं, जिससे बालों पर कलर बहुत ज्यादा देरी तक टिके नहीं। वहीं, होली के बाद रंगों को उतारने के लिए मलाई, मॉइश्चराइजर, कोकोनट ऑयल का इस्तेमाल करें साथ ही शरीर पर लाल धब्बे, खुजली इत्यादि महसूस होने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
-डॉ. गंगाराम कुंडल, सीनियर रेजीडेंट डाॅक्टर, जीएमसी कठुआ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। रंगों के पर्व होली को लेकर दुकानें सज चुकी हैं। रंगोत्सव का उत्साह हर किसी को बाजार की ओर खींच रहा है। शहर के बाजारों में रंग-गुलाल और पिचकारियों की खरीदारी शुरू हो गई है। दुकानों पर रौनक दिखने लगी है। त्योहार को लेकर बच्चों में खासा उत्साह है।
बाजार में सजी दुकानों पर नजर दौड़ाएं तो एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चाइनीज के मुकाबले भारतीय उत्पादों की अधिकता नजर आ रही है। पिछले कुछ सालों में ग्राहकों का चाइनीज उत्पादों से मोहभंग हुआ है। एक-दो अपवाद काे अगर छोड़ दिया जाए तो दुकानदार भी अब भारतीय उत्पादों से ही दुकानों को सजा रहे हैं। इस बार बाजार में जहां स्काई गुलाल, वैलून गुलाल, इलेक्ट्रॉनिक गुलाल गन, सिलेंडर गुलाल पिचकारी जैसी नई आइटमें भी देखने को मिल रही हैं।
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बाजार में इस बार बंदूक के डिजाइन वाली पिचकारियां खूब दिखाई दे रही हैं जो सामान्य तौर पर 20 से 250 रुपये तक बिक रही हैं। आज भी पंप के डिजाइन वाली पिचकारी की सबसे ज्यादा मांग बनी हुई है। रंग और गुलाल की स्थिति भी ऐसी ही है। पानी में घोल कर इस्तेमाल किए जाने वाले रंग बिक रहे हैं। वहीं, 80 प्रतिशत ग्राहकों की पसंद आज भी गुलाल बना हुआ हुआ। 40 प्रतिशत तक ग्राहक हर्बल रंग की खरीदारी कर रहे हैं।
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होली के उत्पादों के कारोबार से जुड़े राहुल बावा की मानें तो इस वर्ष के दाम में कोई बदलाव नहीं आया है। वहीं, इस बार होली से काफी पहले ही मौसम बदल गया था। जिसे देखते हुए उन्होंने 30 प्रतिशत के करीब ज्यादा माल मंगवाया है। महाशिवरात्रि के आसपास हुई बारिश के कारण बाजार में खरीदारी नहीं शुरू हुई थी लेकिन पिछले दो दिन से जिस तरह से कारोबार ने गति पकड़ी है। उसने काफी राहत प्रदान की है।
केमिकल युक्त रंगों से बचें, हो सकता है त्वचा रोग
रंगों के पर्व पर अक्सर लोग केमिकल युक्त रंगों का भी प्रयोग करते हैं। जिससे चेहरे और शरीर पर त्वचा रोग हो सकता है। इससे बचने के लिए सबसे पहले तो रंगों के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए। पहले भी होली हर्बल और ऑर्गेनिक रंगों से ही खेली जाती थी। लिहाजा इसका ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। केमिकल रंगों के रिएक्शन से बचने के लिए हमें स्किन हाइड्रेशन पर काम करना चाहिए। होली खेलने से पहले चेहरे व शरीर पर मॉइश्चराइजर अच्छी तरह से लगा लें। होली से एक-दो दिन पहले सिर पर अच्छे से सरसों का तेल लगाएं, जिससे बालों पर कलर बहुत ज्यादा देरी तक टिके नहीं। वहीं, होली के बाद रंगों को उतारने के लिए मलाई, मॉइश्चराइजर, कोकोनट ऑयल का इस्तेमाल करें साथ ही शरीर पर लाल धब्बे, खुजली इत्यादि महसूस होने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
-डॉ. गंगाराम कुंडल, सीनियर रेजीडेंट डाॅक्टर, जीएमसी कठुआ।