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Kathua News: जिले में अब ट्राउट मछलियों का स्वाद चख सकेंगे पर्यटक
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। बर्फीले पानी की मछली ट्राउट के जरिये जिले में पर्यटकों को आकर्षित करने और इन मछलियां का स्थानीय बाजार तलाशने के लिए विभाग ने कवायद तेज कर दी है। इस समय खुडवा ट्राउट फार्म में लगभग आठ हजार मछलियों को तैयार किया जा रहा है, जो अगले डेढ़ से दो महीने में बिक्री के लिए तैयार हो जाएंगी।
इसी के साथ यहां आने वाले पर्यटक इसका स्वाद भी चख सकेंगे। बीते साल आई बाढ़ के चलते रेस-वे को नुकसान होने के चलते ट्राउट मछलियों को भी नुकसान पहुंचा था। हालांकि इसके बाद विभाग ने रेस वे की मरम्मत और साफ-सफाई के काम के अलावा फार्म को सुचारू करने के लिए अन्य व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित कर ली है।
बनी भद्रवाह मार्ग से सटा सरकारी ट्राउट मछली पालन केंद्र न सिर्फ मछली के शौकीन लोगों को यहां आकर्षित करता रहा है बल्कि सरथल, भद्रवाह की ओर जाने वाले पर्यटक भी इस मछली पालन से संबंधित जानकारी यहां लेने आते हैं। बनी और आसपास के स्थानीय बाजार में इस महंगी मछली की अधिक मांग नहीं है, जबकि जम्मू और पठानकोट के होटलों में यह मछली हाथों हाथ बिकती है।
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यहां दाम भी अच्छे मिलते हैं। इसे देखते हुए मत्स्य पालन विभाग जम्मू और पठानकोट में व्यापारियों से भी संपर्क बनाए हुए हैं। उधर, स्थानीय पर्यटक भी इसका स्वाद चखने के लिए पहुंचते हैं।
विभाग के सहायक निदेशक पवन शर्मा ने बताया कि जो युवा ट्राउट पालन से अच्छी आमदनी हासिल करना चाहते हैं, वे इसे व्यवसाय के रूप में शुरू कर सकते हैं। अधिकारी ने बताया कि ताजे पानी की इस मछली के पालन से स्वरोजगार के नए विकल्प खुलने भी तय हैं। मछली पालन की ओर युवाओं का रुझान भी बढ़ा है। पिछले कुछ वर्षों में बनी में करीब छह ट्राउट फार्म सक्रिय हैं। बनी के खुडवा फार्म में ट्राउट मछली की कीमत प्रति किलो छह सौ रुपये है।
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कठुआ। बर्फीले पानी की मछली ट्राउट के जरिये जिले में पर्यटकों को आकर्षित करने और इन मछलियां का स्थानीय बाजार तलाशने के लिए विभाग ने कवायद तेज कर दी है। इस समय खुडवा ट्राउट फार्म में लगभग आठ हजार मछलियों को तैयार किया जा रहा है, जो अगले डेढ़ से दो महीने में बिक्री के लिए तैयार हो जाएंगी।
इसी के साथ यहां आने वाले पर्यटक इसका स्वाद भी चख सकेंगे। बीते साल आई बाढ़ के चलते रेस-वे को नुकसान होने के चलते ट्राउट मछलियों को भी नुकसान पहुंचा था। हालांकि इसके बाद विभाग ने रेस वे की मरम्मत और साफ-सफाई के काम के अलावा फार्म को सुचारू करने के लिए अन्य व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित कर ली है।
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बनी भद्रवाह मार्ग से सटा सरकारी ट्राउट मछली पालन केंद्र न सिर्फ मछली के शौकीन लोगों को यहां आकर्षित करता रहा है बल्कि सरथल, भद्रवाह की ओर जाने वाले पर्यटक भी इस मछली पालन से संबंधित जानकारी यहां लेने आते हैं। बनी और आसपास के स्थानीय बाजार में इस महंगी मछली की अधिक मांग नहीं है, जबकि जम्मू और पठानकोट के होटलों में यह मछली हाथों हाथ बिकती है।
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यहां दाम भी अच्छे मिलते हैं। इसे देखते हुए मत्स्य पालन विभाग जम्मू और पठानकोट में व्यापारियों से भी संपर्क बनाए हुए हैं। उधर, स्थानीय पर्यटक भी इसका स्वाद चखने के लिए पहुंचते हैं।
विभाग के सहायक निदेशक पवन शर्मा ने बताया कि जो युवा ट्राउट पालन से अच्छी आमदनी हासिल करना चाहते हैं, वे इसे व्यवसाय के रूप में शुरू कर सकते हैं। अधिकारी ने बताया कि ताजे पानी की इस मछली के पालन से स्वरोजगार के नए विकल्प खुलने भी तय हैं। मछली पालन की ओर युवाओं का रुझान भी बढ़ा है। पिछले कुछ वर्षों में बनी में करीब छह ट्राउट फार्म सक्रिय हैं। बनी के खुडवा फार्म में ट्राउट मछली की कीमत प्रति किलो छह सौ रुपये है।