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Kathua News: चांदल और सित्ती में किसानों को सरसों बीज बांटे गए
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सब-डिवीजन बसोहली के अंतर्गत ब्लॉक बनी के गांव चांदल और सित्ती में कृषि विभाग ने जेके-सीआईपी परियोजना के तहत एकदिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया। दोनों गांवों से कुल 150-150 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। जिन्हें तिलहन फसलों के विस्तार, सरकारी योजनाओं की जानकारी, और बीज वितरण के माध्यम से किसानों की आय में स्थिर वृद्धि को प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में विधायक बनी डॉ. रामेश्वर सिंह और एसडीसी बनी ने सहभागिता कर किसानों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण व पहाड़ी क्षेत्रों में इस प्रकार के संपर्क कार्यक्रम तकनीक, संसाधन और भरोसे को सीधे किसानों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनते जा रहे हैं। जबकि विभाग की ओर से एसडीएओ बसोहली रवि सिंह ने उपस्थित किसानों को कृषि विभाग की चल रही योजनाओं, उपलब्ध अनुदानों और तकनीकी सहायता की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने तिलहन विशेषकर सरसों की खेती के आर्थिक लाभ, बाजार मांग, तथा रबी मौसम में इसकी उपयुक्तता पर जोर देते हुए किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित किया।
कृषि विभाग ने कार्यक्रम के दौरान किसानों को सरसों बीज निःशुल्क वितरित किए, ताकि क्षेत्र में तिलहन फसलों का रकबा बढ़े और स्थानीय स्तर पर तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले। अधिकारियों ने बताया कि सुधरी हुई किस्मों के उपयोग और समय पर बुवाई से उत्पादन व गुणवत्ता में सुधार संभव है, जिससे किसानों को बेहतर आय प्राप्त होगी।
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कार्यक्रम में विधायक बनी डॉ. रामेश्वर सिंह और एसडीसी बनी ने सहभागिता कर किसानों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण व पहाड़ी क्षेत्रों में इस प्रकार के संपर्क कार्यक्रम तकनीक, संसाधन और भरोसे को सीधे किसानों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनते जा रहे हैं। जबकि विभाग की ओर से एसडीएओ बसोहली रवि सिंह ने उपस्थित किसानों को कृषि विभाग की चल रही योजनाओं, उपलब्ध अनुदानों और तकनीकी सहायता की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने तिलहन विशेषकर सरसों की खेती के आर्थिक लाभ, बाजार मांग, तथा रबी मौसम में इसकी उपयुक्तता पर जोर देते हुए किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित किया।
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कृषि विभाग ने कार्यक्रम के दौरान किसानों को सरसों बीज निःशुल्क वितरित किए, ताकि क्षेत्र में तिलहन फसलों का रकबा बढ़े और स्थानीय स्तर पर तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले। अधिकारियों ने बताया कि सुधरी हुई किस्मों के उपयोग और समय पर बुवाई से उत्पादन व गुणवत्ता में सुधार संभव है, जिससे किसानों को बेहतर आय प्राप्त होगी।
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