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Kathua News: माता वैष्णो देवी यात्रा जारी, बादल छाए रहने हेलिकॉप्टर सेवा प्रभावित
Thu, 14 Aug 2025 02:01 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 14 Aug 2025 02:01 AM IST
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कटड़ा। धर्मनगरी कटड़ा में बुधवार को बादल छाए रहने से दिनभर मौसम सुहाना रहा। बादलों की मौजूदगी ने यात्रियों को गर्मी से राहत दी। त्रिकुट पर्वत पर धुंध छाए रहने के कारण हेलिकॉप्टर सेवा प्रभावित रही। श्रद्धालुओं को पैदल, घोड़ा, पिट्ठू या पालकी के सहारे भवन की ओर प्रस्थान करना पड़ा।
मौसम की अनिश्चितता के बावजूद यात्रा सामान्य रूप से जारी रही। सभी मार्ग श्रद्धालुओं के आने-जाने के लिए खुले थे और सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सफाई के भी पुख्ता इंतजाम रहे। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार पंजीकरण केंद्र से 21,500 श्रद्धालु मां वैष्णो देवी के दरबार में मत्था टेकने पहुंचे। बुधवार को शाम 4 बजे तक करीब 18,000 श्रद्धालु भवन की ओर रवाना हो चुके थे। भवन में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जोश देखते ही बनता था। कतारों में खड़े भक्त मां के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। रास्ते में जगह-जगह लंगर सेवा और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई थी। स्थानीय प्रशासन ने मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए हेलिकॉप्टर सेवाओं के पुन: संचालन के लिए स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी, जबकि यात्री आस्था और उत्साह के साथ पैदल या घोड़ा पिट्टू का सहारा लेकर मां के जयकारे लगाते हुए यात्रा जारी रख रहे हैं।
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मौसम की अनिश्चितता के बावजूद यात्रा सामान्य रूप से जारी रही। सभी मार्ग श्रद्धालुओं के आने-जाने के लिए खुले थे और सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सफाई के भी पुख्ता इंतजाम रहे। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार पंजीकरण केंद्र से 21,500 श्रद्धालु मां वैष्णो देवी के दरबार में मत्था टेकने पहुंचे। बुधवार को शाम 4 बजे तक करीब 18,000 श्रद्धालु भवन की ओर रवाना हो चुके थे। भवन में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जोश देखते ही बनता था। कतारों में खड़े भक्त मां के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। रास्ते में जगह-जगह लंगर सेवा और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई थी। स्थानीय प्रशासन ने मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए हेलिकॉप्टर सेवाओं के पुन: संचालन के लिए स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी, जबकि यात्री आस्था और उत्साह के साथ पैदल या घोड़ा पिट्टू का सहारा लेकर मां के जयकारे लगाते हुए यात्रा जारी रख रहे हैं।
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