फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Kathua News ›   Less Doctors in Kathua Hospital

Kathua News: बिना डाॅक्टरों के फार्मासिस्ट के सहारे चल रहीं हीरानगर उपमंडल की सात पीएचसी

Thu, 29 May 2025 01:09 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Thu, 29 May 2025 01:09 AM IST
विज्ञापन
Less Doctors in Kathua Hospital
कठुआ। जम्मू-कश्मीर में सरकार बनने के सात महीने बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आ सका है। ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित किए गए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएससी) इसके जीते-जागते उदाहरण हैं।
विज्ञापन

हीरानगर उपमंडल में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बनाई गई तीन पीएचसी और चार नई तरह की पीएचसी में एक भी चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है।

फार्मासिस्टों के सहारे चल रहीं इन सभी पीएचसी में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर सिर्फ मरहम-पट्टी ही हो रही है। बेहतर इलाज के लिए ग्रामीणों को आज भी उपजिला अस्पताल या राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ जाना पड़ रहा है। इससे न केवल स्थानीय लोगों के समय की बर्बादी होती है, बल्कि इससे सरकार की गांव स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे की पोल भी खुल रही है।
विज्ञापन

अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे हरिया चक और मढ़ीन पीएचसी में दो-दो एमबीबीएस चिकित्सा अधिकारियों के पद सृजित होने के बावजूद जहां पिछले कई साल से डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पहाड़ी और कंडी क्षेत्र की पीएचसी डिंगा अंब की भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। चड़वाल, दनोह, चकड़ा और भैइया नई तरह की स्वास्थ्य उपकेंद्र का दर्जा बढ़ाकर इन्हें सिर्फ एनटीपीएचसी तो बना दिया, लेकिन डाॅक्टरों की तैनाती एक में भी नहीं हुई।
मढ़ीन निवासी प्रवीन शर्मा ने बताया कि पहले पीएचसी में डॉक्टरों की तैनाती होती थी और लोगों को मामूली इलाज के लिए उपजिला अस्पताल हीरानगर और कठुआ अस्पताल नहीं जाना पड़ता था लेकिन पिछले कई सालों से पीएचसी मढ़ीन में चिकित्सा अधिकारी न होने से स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ महिलाओं और नवजात शिशु का टीकाकरण केंद्र बनकर रह गया है।
इमारत की हालत भी जर्जर हो चुकी है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। चकड़ा निवासी संतोष कुमार ने बताया कि उनके गांव में नई तरह की पीएचसी बनने के बाद लोगों में बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद थी, लेकिन समय के साथ स्वास्थ्य विभाग की ओर से किसी भी डॉक्टर की तैनाती न होने से लोगों में निराशा है।


---कोट---

वर्तमान सरकार ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति में विफल रही है। विधानसभा सत्र में भी इलाके में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया था। विधानसभा के पटल पर स्वास्थ्य मंत्री का आश्वासन मिलने के बाद भी पीएचसी और उपजिला अस्पताल हीरानगर के खाली पदों को नहीं भरा गया है, जोकि बहुत निंदनीय है। भविष्य में भी खाली पदों को भरने की जद्दोजहद जारी रहेगी। - अधिवक्ता विजय शर्मा, विधायक, हीरानगर।
---
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed