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Kathua News: अब बनी के चलाह में महक बिखेरेगा लैवेंडर, 30 हजार पौधे लगाए

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-ंकठुआ के बनी में जम्मू संभाग के पहले फार्म की शुरुआत
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिला कठुआ के उपमंडल बनी का गांव चलाह अब लैवेंडर के फूलों से महकेगा। कृषि विभाग ने जम्मू संभाग के पहले लैवेंडर फार्म की रविवार को शुरुआत कर दी। डीडीसी बनी रीता ठाकुर, मुख्य कृषि अधिकारी संजीव राय गुप्ता और सब डिवीजन बसोहली कृषि अधिकारी रोहित सिंह बलौरिया ने इसका शुभारंभ किया। पहले फेज में 20 कनाल भूमि पर 30 हजार लैवेंडर के पौधे लगाए हैं।
कृषि विभाग ने 40 कनाल में फार्म स्थापित किया है। डोडा से पौधे मंगवाए हैं। फिलहाल, 20 कनाल में पौधे लगाए हैं। भविष्य में फार्म को 40 कनाल तक फैलाया जाएगा। कृषि उत्पादन एवं किसान कल्याण विभाग कठुआ ने अरोमा मिशन के तहत यह पहल की है। जानकारी के मुताबिक विभाग ने कुछ दिन पहले ही जिला उपायुक्त राकेश मिन्हास से इस फार्म के लिए जमीन मांगी थी। प्रशासन ने चलाह में 40 कनाल भूमि विभाग को सौंपी तो रविवार को वहां फार्म की शुरुआत कर दी गई।
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किसानों की जागरुकता और आय का वैकल्पिक साधन बनेगा फार्म
मुख्य कृषि अधिकारी संजीव राय गुप्ता ने बताया कि फार्म किसानों के बीच लैवेंडर की खेती के बारे में जागरूकता बढ़ाएगा। भविष्य में आय के वैकल्पिक स्रोत के रूप में उदाहरण स्थापित करेगा। क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। कश्मीर के कृषि निदेशक की सहायत से 30 हजार पौधे मिले हैं। इन्हें बनी के चलाह में लगाया है। धार चलाह में यह लैवेंडर फार्म निकटवर्ती बनी और डुग्गन ब्लॉक के किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री का स्रोत होगा, जो जम्मू-कश्मीर के अन्य क्षेत्रों में भी पौधों की आपूर्ति करेगा।
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डुग्गन में सफल रहा था पायलट प्रोजेक्ट
मुख्य कृषि अधिकारी गुप्ता ने बताया कि कुछ समय पहले डुग्गन में 10 एकड़ पर लैवेंडर की खेती को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया था, जोकि सफल रहा। इसके बाद लैवेंडर फार्म स्थापित करने की योजना बनाई। लैवेंडर का पौधा 15 वर्ष तक फूल देता है। कम रखरखाव की जरूरत होती है। पहले ही साल फूल आने शुरु हो जाते हैं। दूसरे वर्ष से कटाई की जा सकती है। साबुन, सौंदर्य प्रसाधन, इत्र और दवाओं में उपयोग किए जाने वाले इन फूलों से किसान को प्रति कनाल करीब 10 हजार रुपए आमदन हो सकती है। प्रति कनाल औसत उपज 2.5 किलोग्राम तेल है।
2016 में शुरु हुआ था अरोमा मिशन
बता दें कि 2016 में केंद्र सरकार ने सुगंधित औषधीय गुणों वाले लैवेंडर की खेती को बढ़ावा देने के मकसद से ''अरोमा मिशन'' की शुरुआत की थी। लैवेंडर यूरोप की मूल फसल है। इसे जम्मू-कश्मीर के टेंपरेट क्षेत्रों में पेश किया गया था। मुख्य कृषि अधिकारी गुप्ता ने बताया कि इस फार्म से जम्मू संभाग के चाहवान किसानों को मुफ्त में पौधे दिए जाएंगे, जिससे वह आमदन बढ़ा सकेंगे।

मशरूम, मधुमक्खी पालन के बाद अब लैवेंडर की खेती से हासिल करेगा मुकाम
डीडीसी बनी रीता ठाकुर ने कहा कि कृषि विभाग बनी क्षेत्र के क्षेत्रों में मशरूम, मधुमक्खी पालन और बेमौसमी सब्जियों की खेती में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। लैवेंडर फार्म बनी और आसपास के किसानों की आय बढ़ाएगा। निकट भविष्य में प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी बनेगा। कृषि विभाग की बनी के किसानों के उत्थान में की गई पहल सराहनीय है।
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