{"_id":"684de355d18e90aed1078385","slug":"land-selected-for-fruit-and-vegetable-market-kathua-news-c-201-1-knt1002-121032-2025-06-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: फल, सब्जी मंडी के लिए चयनित भूमि पर जब्त गाड़ियों का ठिकाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: फल, सब्जी मंडी के लिए चयनित भूमि पर जब्त गाड़ियों का ठिकाना
Sun, 15 Jun 2025 02:32 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 15 Jun 2025 02:32 AM IST
विज्ञापन
चड़वाल में मंडी के लिए चयनित भूमि पर खड़े पुलिस द्वारा जब्त किए वाहन।
अरुण खजूरिया
हीरानगर। चड़वाल में फल, सब्जी मंडी शुरू होने का इंतजार करीब 11 वर्षों से किया जा रहा है। इसके लिए 11 वर्ष पहले चयनित की गई भूमि अब पुलिस की ओर से जब्त किए गए वाहनों को रखने का ठिकाना बन गई है।
मंडी के लिए चयनित करीब छह कनाल भूमि की घेराबंदी, फिलिंग और शेड निर्माण पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद किसी भी आढ़ती को यहां बैठने की जगह नहीं मिली। यहां 38 आढ़तियों ने प्रति दुकान के 50,000 रुपये के हिसाब से 19 लाख रुपये उद्यान योजना एवं विपणन विभाग के पास जमा करवाए लेकिन 11 वर्षों बाद भी मंडी न बनने के कारण उन्हें यहां दुकान नहीं मिली। इस कारण चार व्यापारियों ने जमा राशि वापस से ली।
विभाग का कहना है कि यह भूमि घास चराई योग्य है जिसकी वजह से यहां निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। आढ़तियों के रुपये लौटाने के लिए विभाग ने समाचार पत्रों में भी विज्ञापन दिया, जिसके बाद चार आढ़तियों ने रुपये वापस ले लिए हैं। अन्य आढ़ती भी कभी भी रुपये वापस ले सकते हैं जबकि आढ़तियों का कहना है कि अगर यह भूमि घास चराई की थी तो विभाग को इस भूमि पर घेराबंदी, फिलिंग और शेड निर्माण में लाखों रुपये खर्च नहीं करने चाहिए थे।
विज्ञापन
फल सब्जी मंडी आढ़ती यूनियन दयाला चक के अध्यक्ष अशोक खजूरिया ने बताया कि चड़वाल में पुलिस चौकी के साथ विभाग ने वर्ष 2013-14 में छह कनाल भूमि चयनित की। आढ़तियों के लिए यहां दुकान की जगह का मूल्य डेढ़ लाख रुपये रखा गया, इसे तीन किस्तों में चुकाना था। पहली किस्त के तौर पर करीब 38 आढ़तियों ने 19 लाख रुपये विभाग में जमा करवा दिए।
इसके बाद आढ़तियों को जम्मू बुलाकर दुकानों के लिए प्लॉट नंबर भी आवंटित किए गए। उन्होंने कहा कि इस मद में हुई अनियमितता की जांच और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मौजूदा मंडी परिसर में लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हाईवे विस्तारीकरण के कारण मंडी आने वाले वाहन चालक भी परेशान होते हैं। इसलिए विभाग को आढ़तियों की समस्या का समाधान करना चाहिए।
मंडी के लिए चयनित की गई जमीन राजस्व अभिलेखों में घास चराई के लिए दर्ज है। इसके लिए राजस्व विभाग से पत्राचार जारी है। आढ़तियों की ओर से पेशगी के तौर पर जमा कराई गई राशि लौटाने के लिए विभाग ने समाचार पत्रों में विज्ञापन भी निकाले हैं। संबंधित आढ़ती जमा राशि कभी भी वापस ले सकते हैं। - शिवरतन सांगड़ा, एएमओ, कठुआ।
यह मामला संज्ञान में है, लेकिन घास चराई की भूमि के कारण यह कार्य रुका है। इसका कोई सरल रास्ता निकालने के लिए पहले भी संबंधित विभाग के अधिकारियों से बात की गई है। जल्द ही जिला उपायुक्त से भी बात करेंगे। - विजय शर्मा, विधायक।
विज्ञापन
हीरानगर। चड़वाल में फल, सब्जी मंडी शुरू होने का इंतजार करीब 11 वर्षों से किया जा रहा है। इसके लिए 11 वर्ष पहले चयनित की गई भूमि अब पुलिस की ओर से जब्त किए गए वाहनों को रखने का ठिकाना बन गई है।
मंडी के लिए चयनित करीब छह कनाल भूमि की घेराबंदी, फिलिंग और शेड निर्माण पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद किसी भी आढ़ती को यहां बैठने की जगह नहीं मिली। यहां 38 आढ़तियों ने प्रति दुकान के 50,000 रुपये के हिसाब से 19 लाख रुपये उद्यान योजना एवं विपणन विभाग के पास जमा करवाए लेकिन 11 वर्षों बाद भी मंडी न बनने के कारण उन्हें यहां दुकान नहीं मिली। इस कारण चार व्यापारियों ने जमा राशि वापस से ली।
विज्ञापन
विभाग का कहना है कि यह भूमि घास चराई योग्य है जिसकी वजह से यहां निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। आढ़तियों के रुपये लौटाने के लिए विभाग ने समाचार पत्रों में भी विज्ञापन दिया, जिसके बाद चार आढ़तियों ने रुपये वापस ले लिए हैं। अन्य आढ़ती भी कभी भी रुपये वापस ले सकते हैं जबकि आढ़तियों का कहना है कि अगर यह भूमि घास चराई की थी तो विभाग को इस भूमि पर घेराबंदी, फिलिंग और शेड निर्माण में लाखों रुपये खर्च नहीं करने चाहिए थे।
विज्ञापन
फल सब्जी मंडी आढ़ती यूनियन दयाला चक के अध्यक्ष अशोक खजूरिया ने बताया कि चड़वाल में पुलिस चौकी के साथ विभाग ने वर्ष 2013-14 में छह कनाल भूमि चयनित की। आढ़तियों के लिए यहां दुकान की जगह का मूल्य डेढ़ लाख रुपये रखा गया, इसे तीन किस्तों में चुकाना था। पहली किस्त के तौर पर करीब 38 आढ़तियों ने 19 लाख रुपये विभाग में जमा करवा दिए।
इसके बाद आढ़तियों को जम्मू बुलाकर दुकानों के लिए प्लॉट नंबर भी आवंटित किए गए। उन्होंने कहा कि इस मद में हुई अनियमितता की जांच और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मौजूदा मंडी परिसर में लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हाईवे विस्तारीकरण के कारण मंडी आने वाले वाहन चालक भी परेशान होते हैं। इसलिए विभाग को आढ़तियों की समस्या का समाधान करना चाहिए।
मंडी के लिए चयनित की गई जमीन राजस्व अभिलेखों में घास चराई के लिए दर्ज है। इसके लिए राजस्व विभाग से पत्राचार जारी है। आढ़तियों की ओर से पेशगी के तौर पर जमा कराई गई राशि लौटाने के लिए विभाग ने समाचार पत्रों में विज्ञापन भी निकाले हैं। संबंधित आढ़ती जमा राशि कभी भी वापस ले सकते हैं। - शिवरतन सांगड़ा, एएमओ, कठुआ।
यह मामला संज्ञान में है, लेकिन घास चराई की भूमि के कारण यह कार्य रुका है। इसका कोई सरल रास्ता निकालने के लिए पहले भी संबंधित विभाग के अधिकारियों से बात की गई है। जल्द ही जिला उपायुक्त से भी बात करेंगे। - विजय शर्मा, विधायक।