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Kathua News: प्रवेशद्वार की शान लखनपुर किला लड़ रहा अस्तित्व की लड़ाई

Mon, 23 Jun 2025 01:36 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Mon, 23 Jun 2025 01:36 AM IST
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Lakhanpur Fort, the pride of the entrance, is fighting for its existence
अतिक्रमण का ​शिकार लखनपुर ​स्थित ऐतिहासिक  किला। संवाद - फोटो : kathua
अतिक्रमण और दुकानों के चलते आने-जाने वाले लोगों को दिखता तक नहीं है किला
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छह कनाल के क्षेत्र में फैले किले के पास मौजूदा समय में तीन कनाल भूमि ही बची

संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। लखनपुर का किला आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। सरकारी उदासीनता और अतिक्रमण का शिकार यह किला कभी राज्य के प्रवेशद्वार की शान था। वर्तमान में किले की स्थिति खस्ता हो चुकी है। अतिक्रमण और दुकानों के चलते किला आने-जाने वाले लोगों को दिखता तक नहीं है। ऐसे में राज्य के प्रवेशद्वार की शान बदहाली का रोना रो रही है।
किले की मौजूदा समय में देखरेख करने वाले महंत शांति गिरी जी महाराज का कहना है कि कभी छह कनाल के करीब क्षेत्र में फैले इस किले के पास मौजूदा समय में तीन कनाल भूमि ही बची है। वहीं, 90 के दशक में किले से सामने बनी दुकानों से इसी भव्यता को नुकसान पहुंचा है। कई बार जिला प्रशासन से लेकर प्रदेश सरकार तक किले की हालत को सुधारने की गुहार लगाई गई, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका का कहना है कि केवल एक बार ही प्रशासन की ओर से किले को और मंदिर की हालत को सुधारने का प्रयास हुआ। इसके बाद फिर किले के उद्धार का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।
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क्या है इतिहास
ग्यारहवीं सदी में इस किले को राजा लखनपाल सिंह ने बनाया था। उन्होंने इस किले में कई साल बिताए। आक्रमणकारियों से लोहा लेते हुए राजा लखनपाल सिंह शहीद हुए। इसके बाद राजा की दो लड़कियों ने आक्रमणकारियों से युद्ध किया और वीरगति को प्राप्त हुईं। उसके बाद धीरे-धीरे किले की देख-रेख नहीं होने से किला एक जंगल में तबदील हो गया। लोगों का किले में आना-जाना भी कम हो गया।
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साधु ने दिया नया जीवन
80 के दशक के दौरान श्रीश्री 1008 गुरु पूर्ण गिरि महाराज ने किले के मंदिर में प्रवेश किया। आसपास के जंगल को साफ कर किले को एक नया जीवन प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने किले और उसमें स्थित काली माता मंदिर की देखरेख की। साधु के प्रयास के बाद 2001-2002 में पर्यटन विभाग ने किले की मरम्मत के लिए राशि जारी की, लेकिन राशि का सदुपयोग नहीं होने के चलते किले की हालत सुधरने का काम अधर में लटक गया। वर्तमान में किले और उसमें बने विभिन्न मंदिरों की देखरेख का कार्य महंत शांति गिरी जी महाराज देख रहे हैं। कभी-कभार प्रशासन की ओर से मदद कर दी जाती है, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे होने के बाद भी किला बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों और यात्रियों से दूर ही है। क्योंकि अतिक्रमण और दुकानों के चलते किला लोगों की आंखों से ओझल ही रहता है। ऐसे में लखनपुर के इतिहास का गवाह किला ही अपने अस्तित्व के लिए जंग लड़ रहा है।

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किले की जमीन पर किसी भी तरह के अतिक्रमण का मामला संज्ञान में नही आया है। अगर ऐसा है तो इसी जांच करवाई जाएगी। अगर किसी भी तरह का अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे हटाने के लिए जो भी आवश्यक कार्रवाई होगी। उसे पूरा किया जाएगा।
- विक्रम कुमार, तहसीलदार कठुआ

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लखनपुर का किला ऐतिहासिक है। इसका संरक्षण और विकास होना ही चाहिए। क्योंकि यह किला जम्मू कश्मीर में आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के अलावा लखनपुर की पहचान बन सकता है। लिहाजा इसके लिए 1.25 करोड़ की योजना के माध्यम से यहां एक डारमेट्री और गेस्ट हाउस बनाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही किले को संरक्षित करने के लिए स्टेट डिमार्टमेंट ऑफ आर्केलॉजी को भी जल्द लिखा जाएगा।

- डॉ. भारत भूषण, विधायक कठुआ
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