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Kathua News: सेना ने शहीदों के परिजनों को दिए प्रशस्ति पत्र
Sat, 26 Jul 2025 01:25 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sat, 26 Jul 2025 01:25 AM IST
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सेना की ओर से इस बार 26 साल में पहली बार शहीदों के परिजनों को घर जाकर दिए गए प्रशस्ति पत्र। फा
कारगिल की धरती को कठुआ के सात सपूतों ने अपने लहू से सींचा, 9 जून 1999 को दो बलिदानियों की शहादत ने झकझोर दिया था जिला
परिजनों को स्मृति चिह्न सहित एक फोटो और प्रमाणपत्र किए भेंट
कठुआ। 1999 में हुआ कारगिल युद्ध भारतीय सेना की गौरवगाथा का एक स्वर्णिम अध्याय है। इसमें देश भर से 527 जांबाजों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इसमें कठुआ जिले के विभिन्न इलाकों से सात जांबाज सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय दिया।
इस बार सेना की विशेष टुकड़ी ने कारगिल शहीदों के घर-घर जाकर परिवार वालों को सम्मानित कर उन्हें शहीद वीर जवानों की गाथाओं को सुनाया। ऐसा 26 साल में पहली बार हुआ कि कारगिल में तैनात भारतीय सेना की आठवीं माउंटेन डिवीजन की विशेष टुकड़ी ने कारगिल शहीदों को घर में जाकर विशेष रूप से सम्मान दिया। इससे पहले कारगिल विजय दिवस हर वर्ष शहीद परिवार के नजदीक में तैनात सेना बटालियन के जवान ही शहीद के घर में मिलने आते थे। सेना के जवानों ने शहीद के परिजनों को उनके परिवार की उपस्थिति में स्मृति चिह्न सहित एक फोटो और प्रमाणपत्र भी भेंट किए हैं।
बता दें कि मई महीने में शुरू हुए कारगिल युद्ध में जिला कठुआ से 9 जून 1999 को एक साथ दो-दो शहीदों की शहादत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था।
12 जैक लाइट इन्फेंट्री के नायक पवन कुमार और हवलदार राजिंद्र सिंह दुश्मनों से लोहा लेते हुए बलिदान हुए थे। भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांव मीशा चक के नायक पवन कुमार की गौरवगाथा आज भी इलाके में गूंजती है तो सीमावर्ती इलाके के लोग पलायन और बार बार की गोलाबारी का दर्द भी भूल जाते हैं। वहीं बसोहली तहसील के गांव मारता नगरोटा के हवलदार राजिंद्र सिंह ने भी अपनी शहादत से सैकड़ों युवाओं में देशभक्ति का जज्बा भर दिया। 1999 के 16 जून को बसोहली के सवार गांव से सटे बटाई में भी शोक की लहर दौड गई। गांव के हवलदार जगन्नाथ 13 जैक राइफल में तैनात थे। कठुआ के तारानगर के रहने वाले 12 जैक लाइट इन्फेंट्री के हवलदार अब्दुल करीम ने एक जुलाई को अपनी शहादत दी।
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ठीक पांच दिन बाद छह जुलाई 1999 को राजपुरा सारथी कलां के रहने वाले लखविंद्र सिंह ने ऑपरेशन विजय को सफल बनाने की कड़ी में अपने रक्त से कारगिल की पहाड़ियों को सोच दिया। 12 जुलाई को सिपाही सरतूल सिंह की शहादत ने महानपुर के निकटवर्ती माड़ पट्टी गांव में लोगों को देशभक्ति से भर दिया। इसके बाद कठुआ के वार्ड छह निवासी रत्न चंद ने भी शहादत पाई थी।
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परिजनों को स्मृति चिह्न सहित एक फोटो और प्रमाणपत्र किए भेंट
कठुआ। 1999 में हुआ कारगिल युद्ध भारतीय सेना की गौरवगाथा का एक स्वर्णिम अध्याय है। इसमें देश भर से 527 जांबाजों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इसमें कठुआ जिले के विभिन्न इलाकों से सात जांबाज सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय दिया।
इस बार सेना की विशेष टुकड़ी ने कारगिल शहीदों के घर-घर जाकर परिवार वालों को सम्मानित कर उन्हें शहीद वीर जवानों की गाथाओं को सुनाया। ऐसा 26 साल में पहली बार हुआ कि कारगिल में तैनात भारतीय सेना की आठवीं माउंटेन डिवीजन की विशेष टुकड़ी ने कारगिल शहीदों को घर में जाकर विशेष रूप से सम्मान दिया। इससे पहले कारगिल विजय दिवस हर वर्ष शहीद परिवार के नजदीक में तैनात सेना बटालियन के जवान ही शहीद के घर में मिलने आते थे। सेना के जवानों ने शहीद के परिजनों को उनके परिवार की उपस्थिति में स्मृति चिह्न सहित एक फोटो और प्रमाणपत्र भी भेंट किए हैं।
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बता दें कि मई महीने में शुरू हुए कारगिल युद्ध में जिला कठुआ से 9 जून 1999 को एक साथ दो-दो शहीदों की शहादत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था।
12 जैक लाइट इन्फेंट्री के नायक पवन कुमार और हवलदार राजिंद्र सिंह दुश्मनों से लोहा लेते हुए बलिदान हुए थे। भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांव मीशा चक के नायक पवन कुमार की गौरवगाथा आज भी इलाके में गूंजती है तो सीमावर्ती इलाके के लोग पलायन और बार बार की गोलाबारी का दर्द भी भूल जाते हैं। वहीं बसोहली तहसील के गांव मारता नगरोटा के हवलदार राजिंद्र सिंह ने भी अपनी शहादत से सैकड़ों युवाओं में देशभक्ति का जज्बा भर दिया। 1999 के 16 जून को बसोहली के सवार गांव से सटे बटाई में भी शोक की लहर दौड गई। गांव के हवलदार जगन्नाथ 13 जैक राइफल में तैनात थे। कठुआ के तारानगर के रहने वाले 12 जैक लाइट इन्फेंट्री के हवलदार अब्दुल करीम ने एक जुलाई को अपनी शहादत दी।
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ठीक पांच दिन बाद छह जुलाई 1999 को राजपुरा सारथी कलां के रहने वाले लखविंद्र सिंह ने ऑपरेशन विजय को सफल बनाने की कड़ी में अपने रक्त से कारगिल की पहाड़ियों को सोच दिया। 12 जुलाई को सिपाही सरतूल सिंह की शहादत ने महानपुर के निकटवर्ती माड़ पट्टी गांव में लोगों को देशभक्ति से भर दिया। इसके बाद कठुआ के वार्ड छह निवासी रत्न चंद ने भी शहादत पाई थी।