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Kathua News: बारिश और बाढ़ से तबाह किसानों को सहायता का इंतजार
Wed, 17 Sep 2025 02:37 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 17 Sep 2025 02:37 AM IST
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- 10 दिनों से अधिक समय के बाद भी नुकसान की रिपोर्ट नहीं हुई तैयार
- किसानों को थी तुरंत सहायता मिलने की उम्मीद
हीरानगर। भारी बारिश और बाढ़ ने उपमंडल के किसानों की कमर तोड़ दी है। सबसे अधिक नुकसान हीरानगर तहसील और मढीन तहसील के किसानों को झेलना पड़ा है। उज्ज दरिया और तरनाह नाला ने पिछले दिनों भारी तबाही मचाई।
किसानों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर करीब 6500 कनाल भूमि पर लगी फसल को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में रेत की मोटी चादर बिछ गई है। ऐसे हालात में किसानों को उम्मीद थी कि प्रशासन उनके नुकसान का तुरंत आकलन कर सहायता का प्रबंध करेगा लेकिन करीब 10 दिनों से अधिक का समय होने के बाद भी नुकसान की रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाई है। किसानों का कहना है कि प्रशासन को तुरंत नुकसान का सर्वेक्षण कर राहत पैकेज और मुआवजे की घोषणा करनी चाहिए थी। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि नुकसान का आकलन करने की प्रक्रिया जारी है। लेकिन इसमें हो रही देरी से किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है जिसका सामना कभी भी प्रशासन को करना पड़ सकता है।
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भारी बारिश और बाढ़ के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ है। धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। इसके अलावा इस क्षेत्र में सभी किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। किसानों को प्रशासन और सरकार की ओर से सहायता की उम्मीद है।
संजीव माथुर, निवासी करोल मात्रयां
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साल भर की मेहनत बर्बाद हो गई। खेतों में रेत की मोटी चादर से अब आगे खेती की उम्मीद भी खत्म हो गई है। प्रशासन को जल्द नुकसान का मुआवजा देना चाहिए।
सुरेंद्र सिंह, निवासी पहाड़पुर
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प्रशासन की सहायता की बेहद जरूरत है। अफसोस की बात है कि प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई सहायता नहीं मिली है। उन्होंने मांग की कि फसलों के नुकसान का मुआवजा और केसीसी लोन माफ किया जाए।
विजय कुमार, निवासी पहाड़ीपुर
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बारिश और बाढ़ से फसलों, जमीनों को हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने के लिए टीमें अपना काम कर रही हैं। कोई भी प्रभावित छूटे न इस उद्देश्य से हर इलाके में राजस्व विभाग और कृषि विभाग मिलकर नुकसान के आकलन में जुटे हुए हैं।
- फुलेल सिंह , एसडीएम।
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- किसानों को थी तुरंत सहायता मिलने की उम्मीद
हीरानगर। भारी बारिश और बाढ़ ने उपमंडल के किसानों की कमर तोड़ दी है। सबसे अधिक नुकसान हीरानगर तहसील और मढीन तहसील के किसानों को झेलना पड़ा है। उज्ज दरिया और तरनाह नाला ने पिछले दिनों भारी तबाही मचाई।
किसानों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर करीब 6500 कनाल भूमि पर लगी फसल को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में रेत की मोटी चादर बिछ गई है। ऐसे हालात में किसानों को उम्मीद थी कि प्रशासन उनके नुकसान का तुरंत आकलन कर सहायता का प्रबंध करेगा लेकिन करीब 10 दिनों से अधिक का समय होने के बाद भी नुकसान की रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाई है। किसानों का कहना है कि प्रशासन को तुरंत नुकसान का सर्वेक्षण कर राहत पैकेज और मुआवजे की घोषणा करनी चाहिए थी। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि नुकसान का आकलन करने की प्रक्रिया जारी है। लेकिन इसमें हो रही देरी से किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है जिसका सामना कभी भी प्रशासन को करना पड़ सकता है।
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भारी बारिश और बाढ़ के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ है। धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। इसके अलावा इस क्षेत्र में सभी किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। किसानों को प्रशासन और सरकार की ओर से सहायता की उम्मीद है।
संजीव माथुर, निवासी करोल मात्रयां
साल भर की मेहनत बर्बाद हो गई। खेतों में रेत की मोटी चादर से अब आगे खेती की उम्मीद भी खत्म हो गई है। प्रशासन को जल्द नुकसान का मुआवजा देना चाहिए।
सुरेंद्र सिंह, निवासी पहाड़पुर
प्रशासन की सहायता की बेहद जरूरत है। अफसोस की बात है कि प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई सहायता नहीं मिली है। उन्होंने मांग की कि फसलों के नुकसान का मुआवजा और केसीसी लोन माफ किया जाए।
विजय कुमार, निवासी पहाड़ीपुर
बारिश और बाढ़ से फसलों, जमीनों को हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने के लिए टीमें अपना काम कर रही हैं। कोई भी प्रभावित छूटे न इस उद्देश्य से हर इलाके में राजस्व विभाग और कृषि विभाग मिलकर नुकसान के आकलन में जुटे हुए हैं।
- फुलेल सिंह , एसडीएम।