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Kathua News: कई गांव आज भी सड़क सुविधा से हैं वंचित
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बिलावर। उपमंडल मुख्यालय से सटे कई ग्रामीण क्षेत्र आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अगर कोई बीमार हो जाए तो मरीज को पालकी में बिठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। काला डवर, सयारू बडोला, गलु धट सहित अन्य कई गांवों के लोगों ने बताया कि कोटी गांव तक सरकार की ओर से सड़क का निर्माण किया जा चुका है, लेकिन गांव से ऊपरी क्षेत्रों के कई ग्रामीणों को अपने घरों में पहुंचने के लिए करीब एक घंटे का पैदल रास्ता तय करना पड़ता है। कई बार सरकार से मांग कर चुके हैं कि उनके गांवों को सड़क संपर्क से जोड़ा जाए, लेकिन इस संबंध में कोई सुनवाई नहीं हुई।
स्थानीय इलाके के पंच जोगेंद्र सिंह, गगन सिंह, राकेश सिंह, पूर्ण सिंह, मुंशी राम और ज्ञानचंद शर्मा ने बताया कि सरकार की ओर से कोटी से घट गांव के लिए सड़क का निर्माण करने के लिए कई वर्ष पूर्व योजना तैयार की गई थी, जो ठंडे बस्ते में है। उन्होंने बताया कि 14 किलोमीटर लंबी सड़क केवल 7 किलोमीटर तक ही बन पाई है और कई वर्ष बीत जाने के बाद भी अगले गांवों को जोड़ने के लिए सड़क का काम शुरू नहीं किया गया। चार गांवों के करीब 2000 से अधिक आबादी के लोगों को पैदल रास्ता तय करना पड़ता है। गांव में सड़क संपर्क न होने से कई प्रकार के विकास कार्य भी इलाके में नहीं हो पाते हैं। सड़क सुविधा न होने के कारण घरों का निर्माण करने के लिए खच्चरों और घोड़ों पर निर्माण सामग्री ले जानी पड़ती है, जिससे लोगों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ता है। गांवों के कई छात्र-छात्राएं हायर सेकेंडरी स्कूल बिलावर और राजकीय डिग्री कॉलेज बिलावर में पढ़ाई करते हैं, जो जंगल के रास्ते से होकर एक घंटा पैदल सफर करते हैं, इसके बाद विद्यार्थी सड़क किनारे पहुंचते हैं। लोगों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द कोटी गांव से घट के लिए सड़क बनाने की योजना बनाई जाए।
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स्थानीय इलाके के पंच जोगेंद्र सिंह, गगन सिंह, राकेश सिंह, पूर्ण सिंह, मुंशी राम और ज्ञानचंद शर्मा ने बताया कि सरकार की ओर से कोटी से घट गांव के लिए सड़क का निर्माण करने के लिए कई वर्ष पूर्व योजना तैयार की गई थी, जो ठंडे बस्ते में है। उन्होंने बताया कि 14 किलोमीटर लंबी सड़क केवल 7 किलोमीटर तक ही बन पाई है और कई वर्ष बीत जाने के बाद भी अगले गांवों को जोड़ने के लिए सड़क का काम शुरू नहीं किया गया। चार गांवों के करीब 2000 से अधिक आबादी के लोगों को पैदल रास्ता तय करना पड़ता है। गांव में सड़क संपर्क न होने से कई प्रकार के विकास कार्य भी इलाके में नहीं हो पाते हैं। सड़क सुविधा न होने के कारण घरों का निर्माण करने के लिए खच्चरों और घोड़ों पर निर्माण सामग्री ले जानी पड़ती है, जिससे लोगों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ता है। गांवों के कई छात्र-छात्राएं हायर सेकेंडरी स्कूल बिलावर और राजकीय डिग्री कॉलेज बिलावर में पढ़ाई करते हैं, जो जंगल के रास्ते से होकर एक घंटा पैदल सफर करते हैं, इसके बाद विद्यार्थी सड़क किनारे पहुंचते हैं। लोगों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द कोटी गांव से घट के लिए सड़क बनाने की योजना बनाई जाए।
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