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Kathua News: आर्थिक तंगी में जीवन गुजार रहे अस्थायी कर्मचारी
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जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर किया प्रदर्शन। संवाद
- फोटो : KATHUA
कठुआ। पिछले 157 दिनों से जारी हड़ताल के बावजूद सरकार द्वारा नियमित करने के लिए पहल न किए जाने पर जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने कड़ा रोष जताया है। कर्मचारियों ने कहा कि नियमित न किए जाने से वह आर्थिक तंगी में जीवन गुजार रहे हैं। वीरवार को विभाग के कार्यकारी अभियंता कार्यालय में प्रदर्शन कर रहे अस्थायी कर्मचारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार उनकी मांग पर गौर नहीं करती है तो आने वाले दिनों में 22 हजार अस्थायी कर्मचारियों के रोष का समाना करने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे कर्मचारी नेता पुष्पराज ने कहा कि जलशक्ति विभाग में सेवा दे रहे अस्थायी कर्मचारी दिन रात एक कर लोगों की प्यास बुझाते हैं। लेकिन उनके घर में चूल्हा जलाने के लिए उधार मांगना पड़ रहा है। लोगों के वोट लेकर सरकार बनाने वाले प्रतिनिधि उनकी समस्या का समाधान के नाम पर वोट लेकर जब विधानसभा में पहुंच जाते हैं तो उन्हें वहां पर अपने वेतन भत्ते बढ़ाने के सिवाय और कुछ याद नहीं रहता है। उन्होंने कहा कि जब भी अस्थायी कर्मचारी अपने आंदोलन से सरकार पर दबाव बनाते हैं तो सरकार द्वारा उनके मसले का हल निकालने के नाम पर कमेटी बना दी जाती है, जिसका फैसला कभी नहीं आता है। मौजूदा समय में भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और सरकार ने दो अलग-अलग कमेटियों का गठन किया है। लेकिन उसका फैसला नहीं आ रहा है।
वहीं शक्ति सिंह ने कहा कि सरकार विकास की बड़ी-बड़ी परियोजनाओं में करोड़ों के फंड खर्च कर रही है। लेकिन अस्थायी कर्मचारियों को उनका हक नहीं दिया जा रहा है। पैसों के अभाव में उनके कई साथी समय से पहले काल का ग्रास बन चुके हैै, तो कुछ ने परेशान होकर आत्महत्या तक कर ली है। आर्थिक तंगी में जी रहे अस्थायी कर्मचारियों के बच्चों को न अच्छी शिक्षा मिल रही है न अच्छा भोजन मिल रहा है। ऐसे हालात हड़ताल पर बैठे अस्थायी कर्मचारियों को उग्र कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो उस परिस्थिति के लिए भी सरकार ही जिम्मेदार होगी।
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प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे कर्मचारी नेता पुष्पराज ने कहा कि जलशक्ति विभाग में सेवा दे रहे अस्थायी कर्मचारी दिन रात एक कर लोगों की प्यास बुझाते हैं। लेकिन उनके घर में चूल्हा जलाने के लिए उधार मांगना पड़ रहा है। लोगों के वोट लेकर सरकार बनाने वाले प्रतिनिधि उनकी समस्या का समाधान के नाम पर वोट लेकर जब विधानसभा में पहुंच जाते हैं तो उन्हें वहां पर अपने वेतन भत्ते बढ़ाने के सिवाय और कुछ याद नहीं रहता है। उन्होंने कहा कि जब भी अस्थायी कर्मचारी अपने आंदोलन से सरकार पर दबाव बनाते हैं तो सरकार द्वारा उनके मसले का हल निकालने के नाम पर कमेटी बना दी जाती है, जिसका फैसला कभी नहीं आता है। मौजूदा समय में भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और सरकार ने दो अलग-अलग कमेटियों का गठन किया है। लेकिन उसका फैसला नहीं आ रहा है।
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वहीं शक्ति सिंह ने कहा कि सरकार विकास की बड़ी-बड़ी परियोजनाओं में करोड़ों के फंड खर्च कर रही है। लेकिन अस्थायी कर्मचारियों को उनका हक नहीं दिया जा रहा है। पैसों के अभाव में उनके कई साथी समय से पहले काल का ग्रास बन चुके हैै, तो कुछ ने परेशान होकर आत्महत्या तक कर ली है। आर्थिक तंगी में जी रहे अस्थायी कर्मचारियों के बच्चों को न अच्छी शिक्षा मिल रही है न अच्छा भोजन मिल रहा है। ऐसे हालात हड़ताल पर बैठे अस्थायी कर्मचारियों को उग्र कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो उस परिस्थिति के लिए भी सरकार ही जिम्मेदार होगी।
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