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Kathua News: जुथाना पुल तैयार, मार्च से पहले दौड़ सकते हैं वाहन
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लोगाें की आवाजाही को लेकर राह आसान करेगा जुथाना पुल
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जुथाना पुल बनकर तैयार हो गया है। लगभग 13 हजार की आबादी का सपना पूरा होने जा रहा है। अगले वर्ष मार्च की शुरुआत तक तारकोल डलने के साथ ही इस पुल पर वाहनों की आवाजाही भी शुरू हो जाएगी।
36 करोड़ की लागत से तैयार पुल का निर्माण पूरा होने में आठ साल का लंबा समय लग गया। परियोजना को जम्मू-कश्मीर प्रोजेक्स्स कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (जेकेपीसीसी) की ओर से शुरू करवाया गया। परियोजना में फंडिंग का अभाव और ठेकेदार की बकायादारी ने क्षेत्र की आबादी को आधे-अधूरे पुल के बीच अटका दिया। दो साल तक पुल का काम पूरी तरह से बंद रहने के बाद इसी साल फरवरी में फिर से काम शुरू हुआ। जेकेपीसीसी का लोक निर्माण विभाग में विलय होने के बाद काम ने रफ्तार पकड़ी और अब आखिरी स्लैब भी डाल दिए गए हैं। पुल में कुल 14 स्लैब थे जिसमें से छह का काम जेकेपीसीसी की ओर से किया गया था और शेष आठ का काम अब पूरा कर लिया गया है।
2016 में जखोल से जुथाना के बीच में उज्ज दरिया पर बन रहे पुल का काम कीड़ियां गंडियाल के पुल के साथ शुरू किया गया था। कीड़ियां गंडियाल का पुल तय समयावधि में बनकर तैयार हो चुका है। केंद्रीय सड़क फंड्स (सीआरएफ) के तहत 30 करोड़ से इस परियोजना का काम निर्धारित किया गया, जो वर्ष 2016 में शुरू हो गया। आधे-अधूरे काम के बीच सीआरएफ बंद हो गया, जिसके बाद इसे लंबित परियोजनाओं में तब्दील कर दिया गया। अंधेरा ढलने के बाद ग्रामीणों का उज्ज के पार आना लगभग नामुमकिन हो जाता है तो वहीं सुबह स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर पुल पार करना पड़ता था।
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जान जोखिम में डाल पुल पार करते हैं लोग
वर्षों तक लोग जान जोखिम में डाल इसके अधूरे पिलर के डेढ़ फुट संकरी पट्टी पर चलते रहे हैं, जो मौत के कुंए से कम नहीं रहा। रोजाना पुल पार करने वालों में स्कूली विद्यार्थी, कामकाजी लोग व स्थानीय व्यापारी थे। एक अनुमान के मुताबिक रोजाना लगभग 200 स्कूली बच्चे और सैकड़ों ग्रामीण इसी रास्ते से होकर आवाजाही करते हैं। पहले जुगाड़ लगाकर पुल पर चढ़ने के लिए लगाई लोहे की खड़ी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं और फिर डेढ़ फुट के पिलर से पुल पार करना पड़ता था। कभी कभार आने वालों की यहां पहुंचकर सांसें तक अटक जाती थीं।
बीमार लोगों को पुल पार करवाने में दिक्कत आती है : पूर्व सरपंच
जुथाना के पूर्व सरपंच रवींद्र सिंह बताते हैं कि पुल पार की पंचायतों वाले गांवों के लोग अपनी बेटियों की शादी इस ओर करने से परहेज करते थे। अगर रिश्ता पक्का हो भी जाए तो शादी की सारी रस्में पुल के इस पार जखोल में ही करनी पड़ती थीं। गर्भवती और बीमार लोगों को पुल से पार करवाने में भारी दिक्कत आती रहीं। बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती थी, बीमार लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ देते थे। उज्ज दरिया उफान पर आने के बाद इस इलाके के लोग कटकर रह जाते थे। कई पीढ़ियां पुल के इंतजार में चली गईं, लेकिन अब केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसका काम पूरा करवाया है।
.............कोट..
पुल की आखिरी स्लैब डालने का काम कर लिया गया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से बात कर जल्द यह पुल जनता को समर्पित किया जाएगा। यह पुल इस क्षेत्र की आबादी के सपनों का पुल है जो साकार हुआ है। जसरोटा विधानसभा क्षेत्र को बांटने वाले उज्ज दरिया पर यह महत्वपूर्ण पुलों में से एक होगा।
- राजीव जसरोटिया, विधायक जसरोटा
.............. कोट
पुल का काम हो गया है। साथ ही अप्रोच सड़क का काम भी जारी है। यह जनवरी तक पूरा हो जाएगा। उचित तापमान मिलने के साथ ही फरवरी अंत तक इस पर स्लैब डालकर इसे आम जनता की आवाजाही के खोला जा सकता है।
- महेश शर्मा, सहायक कार्यकारी अभियंता
लोक निर्माण विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जुथाना पुल बनकर तैयार हो गया है। लगभग 13 हजार की आबादी का सपना पूरा होने जा रहा है। अगले वर्ष मार्च की शुरुआत तक तारकोल डलने के साथ ही इस पुल पर वाहनों की आवाजाही भी शुरू हो जाएगी।
36 करोड़ की लागत से तैयार पुल का निर्माण पूरा होने में आठ साल का लंबा समय लग गया। परियोजना को जम्मू-कश्मीर प्रोजेक्स्स कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (जेकेपीसीसी) की ओर से शुरू करवाया गया। परियोजना में फंडिंग का अभाव और ठेकेदार की बकायादारी ने क्षेत्र की आबादी को आधे-अधूरे पुल के बीच अटका दिया। दो साल तक पुल का काम पूरी तरह से बंद रहने के बाद इसी साल फरवरी में फिर से काम शुरू हुआ। जेकेपीसीसी का लोक निर्माण विभाग में विलय होने के बाद काम ने रफ्तार पकड़ी और अब आखिरी स्लैब भी डाल दिए गए हैं। पुल में कुल 14 स्लैब थे जिसमें से छह का काम जेकेपीसीसी की ओर से किया गया था और शेष आठ का काम अब पूरा कर लिया गया है।
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2016 में जखोल से जुथाना के बीच में उज्ज दरिया पर बन रहे पुल का काम कीड़ियां गंडियाल के पुल के साथ शुरू किया गया था। कीड़ियां गंडियाल का पुल तय समयावधि में बनकर तैयार हो चुका है। केंद्रीय सड़क फंड्स (सीआरएफ) के तहत 30 करोड़ से इस परियोजना का काम निर्धारित किया गया, जो वर्ष 2016 में शुरू हो गया। आधे-अधूरे काम के बीच सीआरएफ बंद हो गया, जिसके बाद इसे लंबित परियोजनाओं में तब्दील कर दिया गया। अंधेरा ढलने के बाद ग्रामीणों का उज्ज के पार आना लगभग नामुमकिन हो जाता है तो वहीं सुबह स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर पुल पार करना पड़ता था।
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जान जोखिम में डाल पुल पार करते हैं लोग
वर्षों तक लोग जान जोखिम में डाल इसके अधूरे पिलर के डेढ़ फुट संकरी पट्टी पर चलते रहे हैं, जो मौत के कुंए से कम नहीं रहा। रोजाना पुल पार करने वालों में स्कूली विद्यार्थी, कामकाजी लोग व स्थानीय व्यापारी थे। एक अनुमान के मुताबिक रोजाना लगभग 200 स्कूली बच्चे और सैकड़ों ग्रामीण इसी रास्ते से होकर आवाजाही करते हैं। पहले जुगाड़ लगाकर पुल पर चढ़ने के लिए लगाई लोहे की खड़ी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं और फिर डेढ़ फुट के पिलर से पुल पार करना पड़ता था। कभी कभार आने वालों की यहां पहुंचकर सांसें तक अटक जाती थीं।
बीमार लोगों को पुल पार करवाने में दिक्कत आती है : पूर्व सरपंच
जुथाना के पूर्व सरपंच रवींद्र सिंह बताते हैं कि पुल पार की पंचायतों वाले गांवों के लोग अपनी बेटियों की शादी इस ओर करने से परहेज करते थे। अगर रिश्ता पक्का हो भी जाए तो शादी की सारी रस्में पुल के इस पार जखोल में ही करनी पड़ती थीं। गर्भवती और बीमार लोगों को पुल से पार करवाने में भारी दिक्कत आती रहीं। बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती थी, बीमार लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ देते थे। उज्ज दरिया उफान पर आने के बाद इस इलाके के लोग कटकर रह जाते थे। कई पीढ़ियां पुल के इंतजार में चली गईं, लेकिन अब केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसका काम पूरा करवाया है।
.............कोट..
पुल की आखिरी स्लैब डालने का काम कर लिया गया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से बात कर जल्द यह पुल जनता को समर्पित किया जाएगा। यह पुल इस क्षेत्र की आबादी के सपनों का पुल है जो साकार हुआ है। जसरोटा विधानसभा क्षेत्र को बांटने वाले उज्ज दरिया पर यह महत्वपूर्ण पुलों में से एक होगा।
- राजीव जसरोटिया, विधायक जसरोटा
.............. कोट
पुल का काम हो गया है। साथ ही अप्रोच सड़क का काम भी जारी है। यह जनवरी तक पूरा हो जाएगा। उचित तापमान मिलने के साथ ही फरवरी अंत तक इस पर स्लैब डालकर इसे आम जनता की आवाजाही के खोला जा सकता है।
- महेश शर्मा, सहायक कार्यकारी अभियंता
लोक निर्माण विभाग