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Kathua News: कभी शारीरिक व्याधियों से लड़ने की थी जद्दोजहद आज डेड लिफ्ट और बेंचप्रेस में जिला चैंपियन
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शाहिना अपने जीते अवाॅर्ड के साथ।
- फोटो : kathua news
कठुआ। कभी शारीरिक व्याधियों से लड़ने के लिए शुरू की गई जद्दोजहद में सफलता की एक सीढ़ी ने कठुआ के खरोट मोड़ निवासी शाहिना मलिक की जिंदगी को बदल दिया। आज वह डेड लिफ्ट और बेंचप्रेस जैसे खेलों में जिला चैंपियन बनकर उभर रही हैं।
48 वर्षीय शाहिना करीब छह साल पहले उच्च रक्तचाप और ह्दय संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी। 105 किलोग्राम तक शरीर का भार उन्हें पैदल भी चलने की इजाजत नहीं देता था। इसके बाद अपने वजन को काबू करने के लिए उन्होंने डॉक्टर की सलाह से जिम जाना शुरू किया। शुरूआत के दो साल तो वह अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए हल्का व्यायाम ही करती रहीं। इस दौरान उनकी ज्यादातर दवाएं बंद हो गईं और वह सामान्य जीवन जीने लगीं।
जिम में उनके सहयोगियों ने उन्हें वहां वेट लिफ्टिंग में हाथ आजमाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने इसके लिए कड़ा अभ्यास किया और अब तक दर्जन भर प्रतियोगिताओं में भाग लेकर न केवल जीत हासिल कर रही हैं। बल्कि अपने जैसी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।
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शाहिना मलिक का कहना है कि शुरूआती दौर में तो वह भी काफी निराश थीं, लेकिन जैसे-जैसे उनका वजन कम हुआ और शरीर में स्फूर्ति का संचार हुआ तो उनका जोश भी बढ़ने लगा। इसके साथ उन्होंने जिम में कड़ी मेहनत की। इस दौरान बीच-बीच में होने वाली प्रतियोगिताओं में मिलने वाले पदक और सम्मान उन्हें और बेहतर करने के लिए प्रेरित करते रहे। अपने 75 किलोभार के साथ बीते रविवार को उन्होंने मास्टर्स महिला वर्ग में भी जिला चैंपियन का खिताब जीता है। लिहाजा वह इस खुले आकाश में और ऊंची उड़ान भरना चाह रही हैं। (संवाद)
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48 वर्षीय शाहिना करीब छह साल पहले उच्च रक्तचाप और ह्दय संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी। 105 किलोग्राम तक शरीर का भार उन्हें पैदल भी चलने की इजाजत नहीं देता था। इसके बाद अपने वजन को काबू करने के लिए उन्होंने डॉक्टर की सलाह से जिम जाना शुरू किया। शुरूआत के दो साल तो वह अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए हल्का व्यायाम ही करती रहीं। इस दौरान उनकी ज्यादातर दवाएं बंद हो गईं और वह सामान्य जीवन जीने लगीं।
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जिम में उनके सहयोगियों ने उन्हें वहां वेट लिफ्टिंग में हाथ आजमाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने इसके लिए कड़ा अभ्यास किया और अब तक दर्जन भर प्रतियोगिताओं में भाग लेकर न केवल जीत हासिल कर रही हैं। बल्कि अपने जैसी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।
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शाहिना मलिक का कहना है कि शुरूआती दौर में तो वह भी काफी निराश थीं, लेकिन जैसे-जैसे उनका वजन कम हुआ और शरीर में स्फूर्ति का संचार हुआ तो उनका जोश भी बढ़ने लगा। इसके साथ उन्होंने जिम में कड़ी मेहनत की। इस दौरान बीच-बीच में होने वाली प्रतियोगिताओं में मिलने वाले पदक और सम्मान उन्हें और बेहतर करने के लिए प्रेरित करते रहे। अपने 75 किलोभार के साथ बीते रविवार को उन्होंने मास्टर्स महिला वर्ग में भी जिला चैंपियन का खिताब जीता है। लिहाजा वह इस खुले आकाश में और ऊंची उड़ान भरना चाह रही हैं। (संवाद)