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मनुष्य जीवन का उद्देश्य मोक्ष प्राप्ति : संत सुभाष
Tue, 10 Mar 2026 02:01 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 10 Mar 2026 02:01 AM IST
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बन्नू चक में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान प्रवचण करते सुभाष शास्त्रीजागरूक पाठक
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बन्नू चक में श्रीमद् भागवत कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। दियालाचक से सटे गांव बन्नू चक में पिछले सात दिनों से जारी श्रीमद् भागवत कथा का सोमवार को समापन हो गया। अंतिम दिन यजमानों और ग्रामीणों ने कथा व्यास संत सुभाष शास्त्री का व्यास पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
कथा के अंतिम सत्र में संत सुभाष शास्त्री ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि मनुष्य शरीर प्राप्त होना परम सौभाग्य है और इसका सदुपयोग कर हमें जीवन के वास्तविक प्रयोजन को प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने समझाया कि विषय-सुख की प्राप्ति हर योनि में समान है, इसलिए मनुष्य शरीर का उद्देश्य केवल भोग-विलास नहीं बल्कि मोक्ष की प्राप्ति होना चाहिए। संत शास्त्री ने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन को केवल भोग में व्यतीत करता है तो उसे फिर मृत्यु लोक में आना पड़ता है और इस प्रकार मनुष्य योनि व्यर्थ चली जाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि सांसारिक मोह-माया से दूर रहकर आत्मिक साधना और धर्ममार्ग पर चलें। कथा के समापन पर भक्तों ने संत के उपदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। दियालाचक से सटे गांव बन्नू चक में पिछले सात दिनों से जारी श्रीमद् भागवत कथा का सोमवार को समापन हो गया। अंतिम दिन यजमानों और ग्रामीणों ने कथा व्यास संत सुभाष शास्त्री का व्यास पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
कथा के अंतिम सत्र में संत सुभाष शास्त्री ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि मनुष्य शरीर प्राप्त होना परम सौभाग्य है और इसका सदुपयोग कर हमें जीवन के वास्तविक प्रयोजन को प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने समझाया कि विषय-सुख की प्राप्ति हर योनि में समान है, इसलिए मनुष्य शरीर का उद्देश्य केवल भोग-विलास नहीं बल्कि मोक्ष की प्राप्ति होना चाहिए। संत शास्त्री ने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन को केवल भोग में व्यतीत करता है तो उसे फिर मृत्यु लोक में आना पड़ता है और इस प्रकार मनुष्य योनि व्यर्थ चली जाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि सांसारिक मोह-माया से दूर रहकर आत्मिक साधना और धर्ममार्ग पर चलें। कथा के समापन पर भक्तों ने संत के उपदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
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