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Kathua News: एक कमरे में पशु डिस्पेंसरी, न दवाएं न ही डॉक्टर मिलता है
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कठुआ। जराई क्षेत्र के पशुओं के उपचार के लिए बनाई डिस्पेंसरी की सेवाओं में विस्तार किए जाने की स्थानीय पशु पालकों ने मांग की है। लोगों का कहना है कि इलाके में पशु चिकित्सा सेवा को सातों दिन 24 घंटे किए जाने की जरूरत है।
इस बारे में जराई गांव के पूर्व नायब सरपंच रशीद अहमद का कहना है कि ग्रामीण इलाका होने के कारण क्षेत्र के हर घर में जहां दो-चार मवेशी पाल रखे हैं। वहीं, इलाके में रहने वाले गुज्जर समुदाय के लोगों का पेशा ही पशुपालन से जुड़ा है। उनके पास सैकड़ों मवेशी हैं। सरकार की ओर से गांव में पशु चिकित्सा के लिए एक डिस्पेंसरी तो बनाई गई है, लेकिन किराए के एक कमरे में चलने वाली इस डिस्पेंसरी में न तो पर्याप्त दवाएं उपलब्ध होती हैं और न ही डॉक्टर।
ऐसे में मात्र फार्मासिस्ट के सहारे चलने वाली डिस्पेंसरी से उनके मवेशियों को कई बार समय पर उपचार भी नहीं मिल पाता है।
वहीं, रमेश कुमार ने कहा कि जिस प्रकार से मनुष्य किसी भी समय बीमार हो सकता है तो उसके लिए आकस्मिक चिकित्सा सेवा की जरूरत पड़ती है।
उसी प्रकार से पशुओं की भी कई बार रात के समय तबीयत खराब हो जाती है। उस वक्त न तो कठुआ शहर में उनके उपचार की कोई व्यवस्था होती है और न ही गांव में उपचार मिल पाता है। ऐसे में पशुपालक केमिस्ट की बताई दवा ही लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। स्थानीय लोगों ने क्षेत्र की जरूरत के अनुसार पशु चिकित्सा सुविधा को विस्तार दिए जाने की मांग की है, ताकि पशु पालकों को अपने बीमार पशुओं का उपचार करवाने के लिए परेशान न होना पड़े।
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इस बारे में जराई गांव के पूर्व नायब सरपंच रशीद अहमद का कहना है कि ग्रामीण इलाका होने के कारण क्षेत्र के हर घर में जहां दो-चार मवेशी पाल रखे हैं। वहीं, इलाके में रहने वाले गुज्जर समुदाय के लोगों का पेशा ही पशुपालन से जुड़ा है। उनके पास सैकड़ों मवेशी हैं। सरकार की ओर से गांव में पशु चिकित्सा के लिए एक डिस्पेंसरी तो बनाई गई है, लेकिन किराए के एक कमरे में चलने वाली इस डिस्पेंसरी में न तो पर्याप्त दवाएं उपलब्ध होती हैं और न ही डॉक्टर।
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ऐसे में मात्र फार्मासिस्ट के सहारे चलने वाली डिस्पेंसरी से उनके मवेशियों को कई बार समय पर उपचार भी नहीं मिल पाता है।
वहीं, रमेश कुमार ने कहा कि जिस प्रकार से मनुष्य किसी भी समय बीमार हो सकता है तो उसके लिए आकस्मिक चिकित्सा सेवा की जरूरत पड़ती है।
उसी प्रकार से पशुओं की भी कई बार रात के समय तबीयत खराब हो जाती है। उस वक्त न तो कठुआ शहर में उनके उपचार की कोई व्यवस्था होती है और न ही गांव में उपचार मिल पाता है। ऐसे में पशुपालक केमिस्ट की बताई दवा ही लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। स्थानीय लोगों ने क्षेत्र की जरूरत के अनुसार पशु चिकित्सा सुविधा को विस्तार दिए जाने की मांग की है, ताकि पशु पालकों को अपने बीमार पशुओं का उपचार करवाने के लिए परेशान न होना पड़े।
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