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Kathua News: भगवत कथा श्रवण करने वाले का सदैव होता है मंगल
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कठुआ। शहर के वार्ड नंबर 10 राधा कृष्ण मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी है। कथा के दूसरे दिन पंडित दादू दयाल शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भागवत कथा श्रवण का महत्व समझाया। कहा कि भागवत कथा के श्रवण से बड़ी कोई और सुख संपदा नहीं है। भगवत कथा श्रवण करने वाले का सदैव मंगल होता है।
शास्त्री ही महाराज ने बताया कि श्रीमद् भागवत पुराण में राजा परीक्षित ने भगवान शुकदेव से छह प्रश्न पूछे थे। इन प्रश्नों पर ही पूरी पर भागवत कथा है। इसमें उन्होंने शुकदेव महाराज से पहले प्रश्न में पूछा कि प्राणियों का कल्याण कैसे होगा, जीवन का सार क्या है, भगवान अगर सर्व समर्थ है तो फिर अवतार क्यों लेते हैं, भगवान के कितने अवतार हैं, सर्वश्रेष्ठ शास्त्र कौन सा है और भगवान के अपने धाम में जाने के बाद धर्म किसकी शरण में गया। इन प्रश्नों का उत्तर हमें नागवत कथा के श्रवण से मिलता है।
उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य भगवान की भक्ति को छोड़कर विषय वस्तुओं को भोगने में लगा हुआ है। उसका सारा बल और ज्ञान सांसारिक विषयों को प्राप्त करने में ही लग रहा है। हमें जानना होगा कि हमें यह मानव जीवन कृष्ण भक्ति के लिए प्राप्त हुआ है। हमारे जीवन का उद्देश्य प्रभु के पावन चरणों में स्थान पाना है अगर हम निश्चय कर लेंगे कि हमें जीवन में भगवान को पाना है तो इससे बढ़कर कल्याण का कोई और मार्ग नहीं है।
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शास्त्री ही महाराज ने बताया कि श्रीमद् भागवत पुराण में राजा परीक्षित ने भगवान शुकदेव से छह प्रश्न पूछे थे। इन प्रश्नों पर ही पूरी पर भागवत कथा है। इसमें उन्होंने शुकदेव महाराज से पहले प्रश्न में पूछा कि प्राणियों का कल्याण कैसे होगा, जीवन का सार क्या है, भगवान अगर सर्व समर्थ है तो फिर अवतार क्यों लेते हैं, भगवान के कितने अवतार हैं, सर्वश्रेष्ठ शास्त्र कौन सा है और भगवान के अपने धाम में जाने के बाद धर्म किसकी शरण में गया। इन प्रश्नों का उत्तर हमें नागवत कथा के श्रवण से मिलता है।
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उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य भगवान की भक्ति को छोड़कर विषय वस्तुओं को भोगने में लगा हुआ है। उसका सारा बल और ज्ञान सांसारिक विषयों को प्राप्त करने में ही लग रहा है। हमें जानना होगा कि हमें यह मानव जीवन कृष्ण भक्ति के लिए प्राप्त हुआ है। हमारे जीवन का उद्देश्य प्रभु के पावन चरणों में स्थान पाना है अगर हम निश्चय कर लेंगे कि हमें जीवन में भगवान को पाना है तो इससे बढ़कर कल्याण का कोई और मार्ग नहीं है।
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