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Kathua News: बिलावर के इसी इलाके में लंबे समय से महसूस होती रही आतंकियों की मौजूदगी
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कठुआ। बिलावर के बाथरी के जिस इलाके में शमशेर और रोशन लाल के शव बरामद हुए हैं उससे सटे इलाकों में आतंकियों की मौजूदगी पिछले साल से ही महसूस की जाती रही है। बिलावर का यह इलाका अगस्त महीने से ही आतंकी गतिविधियों का केंद्र भी रहा है।
कोहग, धनु परोल, गोडू फलाल में हथियारबंद संदिग्ध देखे जाने की जानकारियां अक्सर सामने आती रही हैं। लगातार इन इलाकों को सुरक्षाबल खंगालते भी रहे रहे हैं। भटौडी में सेना के कैंप पर फायरिंग के बाद उज्ज दरिया से सटे कोहग के ऊपरी पहाड़ी हिस्सों में कुछ सप्ताह पहले आतंकवादी देखे जाने की सूचना सामने भी आई थी। यही नहीं इलाके में जनवरी माह में भी कई तलाशी अभियान चलाए गए थे। बाथरी की वारदात के बाद क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ गई है। बिलावर के कोहग मांडली इलाके में 28 सितंबर को सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। यहां आतंकियों के एक घर में मौजूद होने की सूचना पर तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान घेरा सख्त होने पर दहशतगर्दों ने फायरिंग शुरू कर दी थी। एनकाउंटर में पुलिस के एक हेड कांस्टेबल भी शहीद हुए थे।
बाथरी मामले में यदि आतंकी कनेक्शन निकलता है तो यह जिले में पहला मामला नहीं है। हाल फिलहाल आतंक के सिर उठाने के दौरान इससे पहले नौ जून 2024 की रात को हीरानगर के मेला गांव में हुई दवा विक्रेता अमरजीत शर्मा की हत्या भी आतंकियों ने ही की थी। सीएफएसएल की रिपोर्ट में वारदात में मिले जूते के निशान और सैडा सोहल के आतंकियों के जूतों के निशान एक से पाए गए। अमरजीत का परिवार शुरूआत से ही उनकी हत्या के पीछे आतंकियों का हाथ होने की आशंका जताता रहा था। मेला गांव के अमरजीत का गला रेता शव उनके घर से कुछ दूरी पर बरामद हुआ था।
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अमरजीत रात के समय घर से बाहर निकले थे, जब काफी देर तक नहीं लौटे तो परिवार के सदस्यों ने आसपास के इलाके को खंगालना शुरू किया। परिवार के सदस्यों के अनुसार अमरजीत की तलाश करते समय पहले उनका फोन घर से कुछ ही दूरी पर झाड़ियों में बरामद हुआ। इसके बाद अनहोनी का शक हुआ तो तलाश में बाकी लोग भी जुटे। कुछ देर बाद अमरजीत का खून से लथपथ शव घर से कुछ ही दूरी पर बरामद कर लिया गया। परिजनों ने अगले दिन प्रदर्शन करते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी।
साथ ही पशु तस्करों पर हत्या में शामिल होने की आशंका जताई थी। अभी इलाके में पुलिस जांच चल ही रही थी कि मेला गांव के इसी इलाके से सटे सैड सोहल गांव में 11 जून को आतंकियों ने देर शाम गोलीबारी करते हुए एक व्यक्ति को घायल कर दिया था। सुरक्षाबलों ने दो दिन चले इस ऑपरेशन में दोनों आतंकियों का सफाया किया। जिनसे भारी मात्रा में असलहा और कैश भी बरामद किया गया था। इस आप्रेशन में एक सीआरपीएफ जवान ने शहादत पाई थी।
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कोहग, धनु परोल, गोडू फलाल में हथियारबंद संदिग्ध देखे जाने की जानकारियां अक्सर सामने आती रही हैं। लगातार इन इलाकों को सुरक्षाबल खंगालते भी रहे रहे हैं। भटौडी में सेना के कैंप पर फायरिंग के बाद उज्ज दरिया से सटे कोहग के ऊपरी पहाड़ी हिस्सों में कुछ सप्ताह पहले आतंकवादी देखे जाने की सूचना सामने भी आई थी। यही नहीं इलाके में जनवरी माह में भी कई तलाशी अभियान चलाए गए थे। बाथरी की वारदात के बाद क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ गई है। बिलावर के कोहग मांडली इलाके में 28 सितंबर को सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। यहां आतंकियों के एक घर में मौजूद होने की सूचना पर तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान घेरा सख्त होने पर दहशतगर्दों ने फायरिंग शुरू कर दी थी। एनकाउंटर में पुलिस के एक हेड कांस्टेबल भी शहीद हुए थे।
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बाथरी मामले में यदि आतंकी कनेक्शन निकलता है तो यह जिले में पहला मामला नहीं है। हाल फिलहाल आतंक के सिर उठाने के दौरान इससे पहले नौ जून 2024 की रात को हीरानगर के मेला गांव में हुई दवा विक्रेता अमरजीत शर्मा की हत्या भी आतंकियों ने ही की थी। सीएफएसएल की रिपोर्ट में वारदात में मिले जूते के निशान और सैडा सोहल के आतंकियों के जूतों के निशान एक से पाए गए। अमरजीत का परिवार शुरूआत से ही उनकी हत्या के पीछे आतंकियों का हाथ होने की आशंका जताता रहा था। मेला गांव के अमरजीत का गला रेता शव उनके घर से कुछ दूरी पर बरामद हुआ था।
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अमरजीत रात के समय घर से बाहर निकले थे, जब काफी देर तक नहीं लौटे तो परिवार के सदस्यों ने आसपास के इलाके को खंगालना शुरू किया। परिवार के सदस्यों के अनुसार अमरजीत की तलाश करते समय पहले उनका फोन घर से कुछ ही दूरी पर झाड़ियों में बरामद हुआ। इसके बाद अनहोनी का शक हुआ तो तलाश में बाकी लोग भी जुटे। कुछ देर बाद अमरजीत का खून से लथपथ शव घर से कुछ ही दूरी पर बरामद कर लिया गया। परिजनों ने अगले दिन प्रदर्शन करते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी।
साथ ही पशु तस्करों पर हत्या में शामिल होने की आशंका जताई थी। अभी इलाके में पुलिस जांच चल ही रही थी कि मेला गांव के इसी इलाके से सटे सैड सोहल गांव में 11 जून को आतंकियों ने देर शाम गोलीबारी करते हुए एक व्यक्ति को घायल कर दिया था। सुरक्षाबलों ने दो दिन चले इस ऑपरेशन में दोनों आतंकियों का सफाया किया। जिनसे भारी मात्रा में असलहा और कैश भी बरामद किया गया था। इस आप्रेशन में एक सीआरपीएफ जवान ने शहादत पाई थी।