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Kathua News: इनहेलर बेहतरीन इलाज, दमे में परहेज जरूरी
Wed, 07 May 2025 01:19 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 07 May 2025 01:19 AM IST
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हर साल मई महीने के पहले मंगलवार को मनाया जाता है विश्व अस्थमा दिवस
कठुआ। विश्व अस्थमा दिवस हर साल मई महीने के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। इस साल यह छह मई को मनाया गया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) और राष्ट्रीय हृदय, फेफड़े और रक्त संस्थान के सहयोग से ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा की स्थापना हुई और 1998 से विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाने लगा। इसका उद्देश्य अस्थमा के उपचार, रोकथाम और प्रबंधन के बेहतर उपायों को दुनियाभर में बढ़ावा देना है।
ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा की ओर से इस साल यह दिन मेक इनहेल्ड ट्रीटमेंट्स एक्सेसिबल फॉर ऑल (सांस द्वारा उपचार सभी के लिए सुलभ बनाना) है। ताकि लोगों तक सांस से जुड़ी दवाएं आसानी से पहुंच सकें। विशेषज्ञों के अनुसार परफ्यूम, अगरबत्ती, प्रदूषण, धूल से परहेज करें। साफ स्वच्छ वातावरण में रहें। सिट्रस फ्रूटस से और दवाओं से इसे नियंत्रि किया जा सकता है। लोगों में यह भ्रम है कि दवा लेना मतलब उन्हें इनहेलर लग जाएगा, लेकिन इनहेलर सबसे बेहतरीन इलाज है चूंकि यह ब्लड स्ट्रीम में नहीं जाता है।
दमे के लक्षण : इस बीमारी में फेफड़ों में वायुमार्ग सूजन और संकुचित हो जाते हैं। इससे खांसी, घरघराहट, सांस फूलना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। सांसों की कमी, और सीने में जकड़न, अस्थमा के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं और विभिन्न कारकों से ट्रिगर हो सकते हैं।
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ब्रोन्कियल अस्थमा, एलर्जी और प्रदूषण की वजह से इस सीजन में दमे के मामले बढ़ते हैं। मार्च अप्रैल के मौसम में जीएमसी कठुआ की 50 से 60 फीसदी ओपीडी में दमे से जुड़े मरीज बढ़ जाते हैं। यह समय फसलों की कटाई और धूल का होता है। ऐसे में आधा-अधूरा इलाज लेने वाले या इलाज छोड़ देने वालों को दिक्कतें बढ़ जाती हैं। कठुआ में इस तरह के मामले औद्योगिक क्षेत्रों के पास से ज्यादा हैं। यहां एलर्जिक पैटर्न से भी दमे के मामले सामने आते रहे हैं। कोरोना के बाद देखा गया है, जिन्हें कोराेना हुआ और अस्प्ताल में भर्ती करवाया गया, उन्हें भी ब्रोन्कियल अस्थमा के सिंप्टम हुए और अब मौसम बदलने पर उन्हें दिक्कतें बढ़ती हैं
-डाॅ. मानिक महाजन, विशेषज्ञ जीएमसी कठुआ
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कठुआ। विश्व अस्थमा दिवस हर साल मई महीने के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। इस साल यह छह मई को मनाया गया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) और राष्ट्रीय हृदय, फेफड़े और रक्त संस्थान के सहयोग से ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा की स्थापना हुई और 1998 से विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाने लगा। इसका उद्देश्य अस्थमा के उपचार, रोकथाम और प्रबंधन के बेहतर उपायों को दुनियाभर में बढ़ावा देना है।
ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा की ओर से इस साल यह दिन मेक इनहेल्ड ट्रीटमेंट्स एक्सेसिबल फॉर ऑल (सांस द्वारा उपचार सभी के लिए सुलभ बनाना) है। ताकि लोगों तक सांस से जुड़ी दवाएं आसानी से पहुंच सकें। विशेषज्ञों के अनुसार परफ्यूम, अगरबत्ती, प्रदूषण, धूल से परहेज करें। साफ स्वच्छ वातावरण में रहें। सिट्रस फ्रूटस से और दवाओं से इसे नियंत्रि किया जा सकता है। लोगों में यह भ्रम है कि दवा लेना मतलब उन्हें इनहेलर लग जाएगा, लेकिन इनहेलर सबसे बेहतरीन इलाज है चूंकि यह ब्लड स्ट्रीम में नहीं जाता है।
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दमे के लक्षण : इस बीमारी में फेफड़ों में वायुमार्ग सूजन और संकुचित हो जाते हैं। इससे खांसी, घरघराहट, सांस फूलना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। सांसों की कमी, और सीने में जकड़न, अस्थमा के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं और विभिन्न कारकों से ट्रिगर हो सकते हैं।
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ब्रोन्कियल अस्थमा, एलर्जी और प्रदूषण की वजह से इस सीजन में दमे के मामले बढ़ते हैं। मार्च अप्रैल के मौसम में जीएमसी कठुआ की 50 से 60 फीसदी ओपीडी में दमे से जुड़े मरीज बढ़ जाते हैं। यह समय फसलों की कटाई और धूल का होता है। ऐसे में आधा-अधूरा इलाज लेने वाले या इलाज छोड़ देने वालों को दिक्कतें बढ़ जाती हैं। कठुआ में इस तरह के मामले औद्योगिक क्षेत्रों के पास से ज्यादा हैं। यहां एलर्जिक पैटर्न से भी दमे के मामले सामने आते रहे हैं। कोरोना के बाद देखा गया है, जिन्हें कोराेना हुआ और अस्प्ताल में भर्ती करवाया गया, उन्हें भी ब्रोन्कियल अस्थमा के सिंप्टम हुए और अब मौसम बदलने पर उन्हें दिक्कतें बढ़ती हैं
-डाॅ. मानिक महाजन, विशेषज्ञ जीएमसी कठुआ