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Kathua News: उत्तर भारत के बड़े औद्योगिक हब के रूप में आकार ले रहा कठुआ
Sun, 01 Dec 2024 01:20 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 01 Dec 2024 01:20 AM IST
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क्षेत्र में तीन साल में बड़े पैमाने पर हुआ औद्योगिक विकास, 185 औद्योगिक इकाइयों ने काम शुरू किया
इकाइयाें के लिए आ चुके हैं 457 आवेदनए 61,758 लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार
जिले के 14 औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए 13 हजार कनाल सरकारी जमीन का इस्तेमाल
कठुआ। जम्मू-कश्मीर का जिला कठुआ उत्तर भारत के एक बड़े औद्योगिक हब के रूप में उभरने जा रहा है। औद्योगिक विभाग तेजी से हो रहे औद्योगिक विकास के कारण इसे जम्मू-कश्मीर के गाजियाबाद के रूप में देख रहा है। यहां पिछले तीन साल में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास हुआ है।
भागथली में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित होने के बाद लोगेट से लेकर बुद्धि, नन्नन के क्षेत्रों सहित डिंगा अंब व कोटपुन्नू इलाके में औद्योगिक विकास को तरजीह दी जा रही है। अनुच्छेद 370 हटने से पहले कठुआ जिले में 248 करोड़ के निवेश के साथ यहां 115 औद्योगिक इकाइयां चल रहीं थीं और 3125 लोगों को रोजगार मिला था। वहीं, कठुआ में अब तक स्थापित हुई 185 नई इकाइयों में 1962 करोड़ का निवेश और 5531 लोगों का प्रत्यक्ष रोजगार शामिल है।
जिले में साल 2021 के बाद से अब तक 457 आवेदन औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए सामने आ चुके हैं। इन इकाइयों के सक्रिय होने से 61,758 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार हासिल होगा। वहीं प्रदेश में 29 हजार करोड़ का निवेश होने जा रहा है। 13 हजार कनाल सरकारी जमीन का इस्तेमाल जिले के 14 औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए किया गया है। कीड़ियां गंडियाल और घाटी औद्योगिक क्षेत्रों में बंजर जमीनों का अब नक्शा ही बदल चुका है। यहां कठुआ से सटा एक नया कठुआ बस चुका है।
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कठुआ में बढ़ गई फ्लोटिंग आबादी : औद्योगिक विकास ने कठुआ को एक बड़े कठुआ के रूप में भी विकसित किया है। 1965 में जिले में विकसित हुई उस समय प्रदेश की सबसे बड़ी औद्योगिक चिनाब टेक्सटाइल मिल ने कठुआ के आसपास के क्षेत्रों में फ्लोटिंग आबादी की शुरुआत की। कठुआ में काम के सिलसिले में लोग देश के अलग-अलग हिस्सों से आए थे। धीरे - धीरे एक पूरा आवासीय क्षेत्र विकसित हुआ। लगभग 15 हजार की आबादी कठुआ में रहकर जीवन यापन करती रही। अब फ्लोटिंग आबादी बढ़कर 80 हजार पहुंच गई है। इनमें औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले लोग, उनके परिवार के सदस्य, कठुआ शहर और ग्रामीण इलाकों में व्यवसाय कर रहे लोग भी शामिल हैं।
तापमान बढ़ा, प्रदूषण भी : औद्योगिक विकास के बीच जिले में पहली बार गर्मी के सीजन में अधिकतम पारा 49.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। औद्योगिकीकरण के साथ तेजी से चल रहे विकास कार्यों ने प्रदूषण में भी इजाफा किया है। बारिश न होने के बीच कठुआ में पिछले एक महीने में स्मॉग का असर साफ देखने को मिला। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इससे सांस रोगियों में हुई वृद्धि की तस्दीक कर रहे हैं। कठुआ शहर में कई जगह एक्यूआई 350 के पार तक चला गया।
गेस्ट हाउस से लेकर होटलों की संख्या भी हुई दोगुनी : जिले में औद्योगिक विकास के बीच मांग और जरूरतें बढ़ने से रोजगार को बढ़ावा मिला है। वहीं, ढांचागत विकास भी हुआ है। कुछ एक होटल और गेस्ट हाउस वाले कठुआ में अब एक दर्जन होटल हो चुके हैं। यही नहीं नए होटल और गेस्ट हाउस खुलने का सिलसिला जारी है। शहर में पीजी से लेकर निजी कंपनियों और इकाइयों के स्टाफ के लिए गेस्ट हाउस बनते जा रहे हैं।
दवा उत्पादन इकाइयां हो रहीं स्थापित
640 कनाल में सोलर पैनल बनाने वाले ग्रयू एनर्जी की ओर से 3.2 गीगावॉट क्षमता का सोलर पैनल बनाने का औद्योगिक यूनिट लगाया जा रहा है। इसकी लागत 4500 करोड़ रुपये है। जिंदल ग्रुप, पेप्सी, जुपिटर एल्युमिनियम ग्रुप, ग्रीनलैम प्लाईवुड, बायो फ्यूल प्लांट, ब्लूटैक्स इंडस्ट्री, हल्दीराम, दामिनी ग्रुप कंधारी बेवरेजेज जैसे बड़ी औद्योगिक इकाइयां नए औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित हो रही हैं।
विकास के साथ चुनौतियां भी कम नहीं
अगले साल तक 400 मेगावाट बिजली और फ्लोटिंग आबादी के लिए रहने के स्थानों की जरूरत भी कठुआ में होगी। सरकार के सामने यह बड़ी चुनौतियां होंगी। जम्मू-कश्मीर में सस्ती मिलने वाली बिजली के आधार पर ही औद्योगिक इकाइयों को आकर्षित किया गया है। हर साल प्रदेश सरकार सरप्लस बिजली लेकर प्रदेश के लोगों के बिजली आपूर्ति करती है। सरकार के लिए यह आने वाले दो साल में बड़ी चुनौती होगी। प्रदेश के बाहर से काम के सिलसिले में आने वाले हर वर्ग के लोगों के साथ उनके परिवार भी आने वाले समय में आकर बसेंगे। इनकी व्यवस्था बेहद जरूरी होगी।
जमीनों के कई गुना बढ़े दाम: कठुआ जिले में औद्योगिक विकास ही नहीं हुआ, बल्कि शहर का दायरा भी बढ़ा है। नई कॉलोनियां विकसित हुई हैं। अनुछेद 370 के बाद से अब तक यहां कठुआ शहर में जमीनों के दाम दोगुणा हो गए हैं। वहीं, औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास भी कौड़ियों के भाव बिकने वाली जमीन के भाव बढ़ गए हैं।
कठुआ प्रदेश का अन्य राज्यों से सटा सीमावर्ती जिला है। यह प्लस प्वाइंट है। प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए आए आवेदनाें में सबसे ज्यादा 60 फीसदी आवेदन और निवेश इसी कारण रहा है। पहले माल ढुलाई और कच्चे माल की उपलब्धता के साथ तैयार माल की खपत नहीं होने से औद्योगिक इकाइयां ज्यादा आकर्षित नहीं हो पाती थीं। कठुआ से पंजाब, हिमाचल, हरियाणा का सीधा संपर्क है। यह दिल्ली कटड़ा एक्सप्रेस वे से सटा हुआ है। रेलवे और सड़क नेटवर्क की उपलब्धता ने इसे एक बड़ी आवासीय कॉलोनी में विकसित किया है। कठुआ आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर का औद्योगिक गाजियाबाद बनने जा रहा है। -अरुण मन्हास, निदेशक, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग
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इकाइयाें के लिए आ चुके हैं 457 आवेदनए 61,758 लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार
जिले के 14 औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए 13 हजार कनाल सरकारी जमीन का इस्तेमाल
कठुआ। जम्मू-कश्मीर का जिला कठुआ उत्तर भारत के एक बड़े औद्योगिक हब के रूप में उभरने जा रहा है। औद्योगिक विभाग तेजी से हो रहे औद्योगिक विकास के कारण इसे जम्मू-कश्मीर के गाजियाबाद के रूप में देख रहा है। यहां पिछले तीन साल में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास हुआ है।
भागथली में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित होने के बाद लोगेट से लेकर बुद्धि, नन्नन के क्षेत्रों सहित डिंगा अंब व कोटपुन्नू इलाके में औद्योगिक विकास को तरजीह दी जा रही है। अनुच्छेद 370 हटने से पहले कठुआ जिले में 248 करोड़ के निवेश के साथ यहां 115 औद्योगिक इकाइयां चल रहीं थीं और 3125 लोगों को रोजगार मिला था। वहीं, कठुआ में अब तक स्थापित हुई 185 नई इकाइयों में 1962 करोड़ का निवेश और 5531 लोगों का प्रत्यक्ष रोजगार शामिल है।
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जिले में साल 2021 के बाद से अब तक 457 आवेदन औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए सामने आ चुके हैं। इन इकाइयों के सक्रिय होने से 61,758 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार हासिल होगा। वहीं प्रदेश में 29 हजार करोड़ का निवेश होने जा रहा है। 13 हजार कनाल सरकारी जमीन का इस्तेमाल जिले के 14 औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए किया गया है। कीड़ियां गंडियाल और घाटी औद्योगिक क्षेत्रों में बंजर जमीनों का अब नक्शा ही बदल चुका है। यहां कठुआ से सटा एक नया कठुआ बस चुका है।
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कठुआ में बढ़ गई फ्लोटिंग आबादी : औद्योगिक विकास ने कठुआ को एक बड़े कठुआ के रूप में भी विकसित किया है। 1965 में जिले में विकसित हुई उस समय प्रदेश की सबसे बड़ी औद्योगिक चिनाब टेक्सटाइल मिल ने कठुआ के आसपास के क्षेत्रों में फ्लोटिंग आबादी की शुरुआत की। कठुआ में काम के सिलसिले में लोग देश के अलग-अलग हिस्सों से आए थे। धीरे - धीरे एक पूरा आवासीय क्षेत्र विकसित हुआ। लगभग 15 हजार की आबादी कठुआ में रहकर जीवन यापन करती रही। अब फ्लोटिंग आबादी बढ़कर 80 हजार पहुंच गई है। इनमें औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले लोग, उनके परिवार के सदस्य, कठुआ शहर और ग्रामीण इलाकों में व्यवसाय कर रहे लोग भी शामिल हैं।
तापमान बढ़ा, प्रदूषण भी : औद्योगिक विकास के बीच जिले में पहली बार गर्मी के सीजन में अधिकतम पारा 49.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। औद्योगिकीकरण के साथ तेजी से चल रहे विकास कार्यों ने प्रदूषण में भी इजाफा किया है। बारिश न होने के बीच कठुआ में पिछले एक महीने में स्मॉग का असर साफ देखने को मिला। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इससे सांस रोगियों में हुई वृद्धि की तस्दीक कर रहे हैं। कठुआ शहर में कई जगह एक्यूआई 350 के पार तक चला गया।
गेस्ट हाउस से लेकर होटलों की संख्या भी हुई दोगुनी : जिले में औद्योगिक विकास के बीच मांग और जरूरतें बढ़ने से रोजगार को बढ़ावा मिला है। वहीं, ढांचागत विकास भी हुआ है। कुछ एक होटल और गेस्ट हाउस वाले कठुआ में अब एक दर्जन होटल हो चुके हैं। यही नहीं नए होटल और गेस्ट हाउस खुलने का सिलसिला जारी है। शहर में पीजी से लेकर निजी कंपनियों और इकाइयों के स्टाफ के लिए गेस्ट हाउस बनते जा रहे हैं।
दवा उत्पादन इकाइयां हो रहीं स्थापित
640 कनाल में सोलर पैनल बनाने वाले ग्रयू एनर्जी की ओर से 3.2 गीगावॉट क्षमता का सोलर पैनल बनाने का औद्योगिक यूनिट लगाया जा रहा है। इसकी लागत 4500 करोड़ रुपये है। जिंदल ग्रुप, पेप्सी, जुपिटर एल्युमिनियम ग्रुप, ग्रीनलैम प्लाईवुड, बायो फ्यूल प्लांट, ब्लूटैक्स इंडस्ट्री, हल्दीराम, दामिनी ग्रुप कंधारी बेवरेजेज जैसे बड़ी औद्योगिक इकाइयां नए औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित हो रही हैं।
विकास के साथ चुनौतियां भी कम नहीं
अगले साल तक 400 मेगावाट बिजली और फ्लोटिंग आबादी के लिए रहने के स्थानों की जरूरत भी कठुआ में होगी। सरकार के सामने यह बड़ी चुनौतियां होंगी। जम्मू-कश्मीर में सस्ती मिलने वाली बिजली के आधार पर ही औद्योगिक इकाइयों को आकर्षित किया गया है। हर साल प्रदेश सरकार सरप्लस बिजली लेकर प्रदेश के लोगों के बिजली आपूर्ति करती है। सरकार के लिए यह आने वाले दो साल में बड़ी चुनौती होगी। प्रदेश के बाहर से काम के सिलसिले में आने वाले हर वर्ग के लोगों के साथ उनके परिवार भी आने वाले समय में आकर बसेंगे। इनकी व्यवस्था बेहद जरूरी होगी।
जमीनों के कई गुना बढ़े दाम: कठुआ जिले में औद्योगिक विकास ही नहीं हुआ, बल्कि शहर का दायरा भी बढ़ा है। नई कॉलोनियां विकसित हुई हैं। अनुछेद 370 के बाद से अब तक यहां कठुआ शहर में जमीनों के दाम दोगुणा हो गए हैं। वहीं, औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास भी कौड़ियों के भाव बिकने वाली जमीन के भाव बढ़ गए हैं।
कठुआ प्रदेश का अन्य राज्यों से सटा सीमावर्ती जिला है। यह प्लस प्वाइंट है। प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए आए आवेदनाें में सबसे ज्यादा 60 फीसदी आवेदन और निवेश इसी कारण रहा है। पहले माल ढुलाई और कच्चे माल की उपलब्धता के साथ तैयार माल की खपत नहीं होने से औद्योगिक इकाइयां ज्यादा आकर्षित नहीं हो पाती थीं। कठुआ से पंजाब, हिमाचल, हरियाणा का सीधा संपर्क है। यह दिल्ली कटड़ा एक्सप्रेस वे से सटा हुआ है। रेलवे और सड़क नेटवर्क की उपलब्धता ने इसे एक बड़ी आवासीय कॉलोनी में विकसित किया है। कठुआ आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर का औद्योगिक गाजियाबाद बनने जा रहा है। -अरुण मन्हास, निदेशक, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग