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अवैध कॉलोनियों ने फेल कर दिया शहर का मास्टर प्लान

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Illegal colonies failed the master plan of the city
कठुआ। कठुआ शहर, आसपास और हाईवे से सटे इलाकों में बड़े पैमाने पर विकसित हुई और हो रही कॉलोनियों ने मंजूरी मिलने से पहले ही शहर के मास्टर प्लान को फेल कर दिया है। दरअसल, मास्टर प्लान के अनुसार शहर में पश्चिम दिशा की ओर सिंचित कृषि क्षेत्र का व्यवसायिक इस्तेमाल न हो, इसके लिए रिहायशी इलाकों को चक गदाधर से पल्ली की ओर बढ़ाए जाने की योजना था। लेकिन भू माफिया ने राजस्व विभाग के साथ मिलकर ऐसा खेल खेला कि बड़े पैमाने पर शहर से सटी कृषि भूमि को ही बंजर कर इसे आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित कर दिया।
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ज्ञात रहे कि बेतरतीब विकास से जूझ रहे शहर का कायाकल्प करने के लिए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट रोल तैयार किया गया है। लगभग एक दशक तक चली कवायद के बाद हाल के वर्षों में परियोजना मंजूरी के लिए भी सरकार को भेज दी गई है। लेकिन इससे पहले की परियोजना मंजूर हो और शहर का योजनाबद्ध विकास हो, बड़े पैमाने पर कृषि क्षेत्र को बिना अनुमति कॉलोनियां काटकर बेचने का काम भू माफिया ने किया। खास बात यह है कि यह गोरखधंधा प्रशासन और राजस्व विभाग के साथ-साथ नगर परिषद की नाक तले चलता रहा।
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कठुआ विकास प्राधिकरण के लिए तैयार मास्टर प्लान में शहरी क्षेत्र के रिहायशी इलाकों को चक गदाधर से लेकर पल्ली तक बढ़ाने की योजना है। यानी इस इलाके को रिहायशी इलाके के रूप में विकसित करने का प्लान है। जबकि सिंचित कृषि क्षेत्रों को रिहायशी इलाकों के रूप में न बदला जाए इसके लिए कठुआ का मास्टर प्लान विशेष रूप से कंडी क्षेत्रों की ओर बढ़ाया गया। शहर के आसपास हरियाली को बढ़ावा देकर भूमि कटाव रोकने की भी योजना है जिसमें शहर के किनारे पार्क के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। उधर मास्टर प्लान ड्राफ्ट में औद्योगिक क्षेत्र को भी कई-नई जगह पर विकसित करने की योजना है। खास बात यह है कि कठुआ नगर परिषद और जम्मू टाउन प्लानिंग आर्गेनाइजेश्न के सहयोग से आरवी कंसलटेंट ने ही शहर के मास्टर प्लान की डीपीआर तैयार किया है। नगर परिषद की हद में भी बड़े पैमाने पर कृषि भूमि के स्वरूप में बदलाव कर दिया गया।
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कृषि क्षेत्र पहले ही कम हो रहे हैं। ऐसे में कृषि क्षेत्रों को बड़े पैमाने व्यावसायिक या रिहायशी तौर पर विकसित करना सरासर गलत है। ग्रामीण क्षेत्रों से आकर लोगों को कृषि सिंचित क्षेत्रों में बसाया जा रहा है। सरकार पैसा खर्च कर किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है, लेकिन यहां खेत ही खत्म कर दिए जा रहे हैं। सरकर को इसका कड़ा संज्ञान लेना चाहिए। - चरणजीत सिंह, पूर्व विधायक कठुआ
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सरकार भू माफिया को फायदा दिलाने के लिए गरीब जनता के अधिकारों का हनन कर रही है। छह सात लेन सड़क तो कहीं एक्सप्रेस वे के नाम पर गरीब किसानों की जमीनें ली जा रही हैं। शहर के आसपास कृषि जमीन खत्म होती जा रही है। सत्तर फीसदी लोग कृषि आधारित हैं। मजदूरों की आय भी कुछ महीनों इसी पर निर्भर रहती है। - सोमराज मजोत्रा, प्रदेश अध्यक्ष, बसपा

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आवासीय क्षेत्रों का जरूरत के अनुसार विस्तार सही, नियमों का न हो उल्लंघन
कठुआ। कठुआ पहुंचे मंडलायुक्त डॉ राघव लंगर ने शहर और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर तैयार हो रही कॉलोनियों और कृषि भूमि को पहुंचाए जा रहे नुकसान पर पूछे गए सवाल में कहा कि यदि कोई उल्लंघन का मामला है तो जिला उपायुक्त इसपर कार्रवाई जरूर करेंगे। कहा कि आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कॉलोनी बनाए जाने की जरूरत है तो जरूर उसे बनाया जाए। लेकिन इसके लिए कृषि भूमि को इस्तेमाल करने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया है। भूमि इस्तेमाल बदलाव नियमों का पालन करें। इसके लिए आवेदन ऑनलाइन किया जा सकता है और यह प्रक्रिया तीस दिन की है। लोगों को यह ध्यान रखना होगा कि मास्टर प्लान या प्राधिकरण या संबंधित एजेंसी से नक्शे आदि पास करवाकर ही काम पूरा करवाएं। नियमों का कोई उल्लंघन न करे और खरीद फरोख्त भी कानून के दायरे में रहकर की जानी चाहिए।
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