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Kathua News: जीएमसी में मार्च से पहले आग से निपटने के पूरे होंगे इंतजाम
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कठुआ। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान को आग की घटनाओं से निपटने के इंतजाम का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। मार्च 2025 से पहले इस काम को पूरा कर लिया जाएगा।
जीएमसी कठुआ और सहायक अस्पताल में अब तक आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। अग्निशमन दस्ते और छोटे अग्निशामकों के भरोसे अस्पताल के मरीजों, तीमारदारों, स्टाफ और इमारत की सुरक्षा की जा रही थी। ऐसा तब था, जब रोजाना लगभग तीन हजार की ओपीडी और 300 बेड की आईपीडी इस अस्पताल में उपलब्ध है। फिलहाल दो करोड़ की लागत से यह काम करवाया जा रहा है।
देश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में आग लगने की घटनाओं के बाद जीएमसी कठुआ में आग की घटनाओं से निपटने के इंतजाम का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए यहां करीब तीन हजार मीटर लंबी पाइप लाइनों का जाल बिछाया जा रहा है। इसके अलावा परिसर में एक बोरवेल, पंप हाउस, ढाई लाख लीटर क्षमता का अंडरग्राउंड वाटर टैंक और ट्रांसफार्मर जैसी सुविधाएं तैयार कर दी गई हैं, जबकि ऑटोमेटिक फायर एंड स्मोक डिटेकटर और फायर अलार्म जैसी सुविधा पूरी की जानी है।
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दरअसल, इस स्वास्थ्य संस्थान को आग से सुरक्षित रखने के लिए जून 2022 में सरकार की ओर से जारी किए गए निर्देश के बाद फायर फाइटिंग एक्यूपमेंट से लैस करने की कवायद शुरू हुई थी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार परिसर को आग से पूरी तरह से सुरक्षित बनाने वाली इस योजना काे इसी वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद परिसर में अगर आग लगने का हादसा पेश आता है तो परिसर स्वयं ही इनसे निपटने में सक्षम हो जाएगा।
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अभी तक परिसर था अस्थायी इंतजामों और दमकल पर आश्रित
अपने इलाज के लिए प्रतिदिन पहुंचने वाले हजारों लोगों से गुलजार रहने वाला जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल के मुख्य भवन का निर्माण करीब ढाई दशक पूर्व हुआ था। जिला अस्पताल के रूप में अपनी सेवा देने वाली इमारत को छह वर्ष पूर्व जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में तबदील कर दिया गया। इसके बाद से यहां बढ़ी स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण आने वाले लोगों की संख्या में भी तीन गुना से भी ज्यादा हो गई लेकिन परिसर में आग से सुरक्षा के नाम पर कहीं-कहीं पर लगे फायर एक्सटीन्गुइशेर के अलावा कुछ नहीं था। ऐसी हालत में यहां आग लगने की घटनाओं के दौरान दमकल विभाग की सेवा लेने के अलावा कोई अन्य साधन नहीं था।
जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल परिसर को आग से सुरक्षित रखने की पहल सरकार के निर्देशानुसार की जा रही है। इसमें पहले मैकेनिकल एंड इंजीनियरिंग विभाग से निमार्ण की डीपीआर तैयार करवाई गई। इसके बाद फायर एंड इमरजेंसी विभाग से परिसर का आडिट करवाया गया, जिसकी मंजूरी के बाद निर्माण शुरू किया गया है। इसके लिए सरकार की ओर से दो करोड़ 87 लाख रुपये जारी किए गए हैं लेकिन उम्मीद की पूरी योजना दो करोड़ में ही पूरी कर ली जाएगी।
-सरदार सिंह, सहायक निदेशक प्लानिंग जीएमसी कठुआ
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जीएमसी कठुआ और सहायक अस्पताल में अब तक आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। अग्निशमन दस्ते और छोटे अग्निशामकों के भरोसे अस्पताल के मरीजों, तीमारदारों, स्टाफ और इमारत की सुरक्षा की जा रही थी। ऐसा तब था, जब रोजाना लगभग तीन हजार की ओपीडी और 300 बेड की आईपीडी इस अस्पताल में उपलब्ध है। फिलहाल दो करोड़ की लागत से यह काम करवाया जा रहा है।
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देश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में आग लगने की घटनाओं के बाद जीएमसी कठुआ में आग की घटनाओं से निपटने के इंतजाम का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए यहां करीब तीन हजार मीटर लंबी पाइप लाइनों का जाल बिछाया जा रहा है। इसके अलावा परिसर में एक बोरवेल, पंप हाउस, ढाई लाख लीटर क्षमता का अंडरग्राउंड वाटर टैंक और ट्रांसफार्मर जैसी सुविधाएं तैयार कर दी गई हैं, जबकि ऑटोमेटिक फायर एंड स्मोक डिटेकटर और फायर अलार्म जैसी सुविधा पूरी की जानी है।
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दरअसल, इस स्वास्थ्य संस्थान को आग से सुरक्षित रखने के लिए जून 2022 में सरकार की ओर से जारी किए गए निर्देश के बाद फायर फाइटिंग एक्यूपमेंट से लैस करने की कवायद शुरू हुई थी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार परिसर को आग से पूरी तरह से सुरक्षित बनाने वाली इस योजना काे इसी वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद परिसर में अगर आग लगने का हादसा पेश आता है तो परिसर स्वयं ही इनसे निपटने में सक्षम हो जाएगा।
अभी तक परिसर था अस्थायी इंतजामों और दमकल पर आश्रित
अपने इलाज के लिए प्रतिदिन पहुंचने वाले हजारों लोगों से गुलजार रहने वाला जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल के मुख्य भवन का निर्माण करीब ढाई दशक पूर्व हुआ था। जिला अस्पताल के रूप में अपनी सेवा देने वाली इमारत को छह वर्ष पूर्व जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में तबदील कर दिया गया। इसके बाद से यहां बढ़ी स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण आने वाले लोगों की संख्या में भी तीन गुना से भी ज्यादा हो गई लेकिन परिसर में आग से सुरक्षा के नाम पर कहीं-कहीं पर लगे फायर एक्सटीन्गुइशेर के अलावा कुछ नहीं था। ऐसी हालत में यहां आग लगने की घटनाओं के दौरान दमकल विभाग की सेवा लेने के अलावा कोई अन्य साधन नहीं था।
जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल परिसर को आग से सुरक्षित रखने की पहल सरकार के निर्देशानुसार की जा रही है। इसमें पहले मैकेनिकल एंड इंजीनियरिंग विभाग से निमार्ण की डीपीआर तैयार करवाई गई। इसके बाद फायर एंड इमरजेंसी विभाग से परिसर का आडिट करवाया गया, जिसकी मंजूरी के बाद निर्माण शुरू किया गया है। इसके लिए सरकार की ओर से दो करोड़ 87 लाख रुपये जारी किए गए हैं लेकिन उम्मीद की पूरी योजना दो करोड़ में ही पूरी कर ली जाएगी।
-सरदार सिंह, सहायक निदेशक प्लानिंग जीएमसी कठुआ