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Kathua News: पुल जर्जर<bha>;</bha> चालक अंजान, जा सकती जान
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पुल से गुजरते औद्योगिक क्षेत्र को जाने वाले मालवाहक वाहन
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- रावी-तवी नहर पर मौजूद पुल औद्योगिक क्षेत्र सहार-लोगेट और राष्ट्रीय राजमार्ग के बीच एकमात्र रास्ता
- दो साल पहले लोक निर्माण विभाग ने इसे जर्जर घोषित किया था, आज भी भारी-भरकम वाहन गुजर रहे
- सिकॉप ने नए पुल के निर्माण की उठाई थी मांग, फंड की मंजूरी न मिलने से शुरू नहीं हो पाया काम
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग को औद्योगिक क्षेत्र सहार-लोगेट से जोड़ने वाला रावी-तवी नहर पर बना पुल दो साल पूर्व लोक निर्माण विभाग ने जर्जर घोषित किया था। बावजूद इसके आज भी भारी भरकम वाहन पुल से गुजर रहे हैं और इस बात से अंजान चालक किसी भी समय हादसे का शिकार हो सकते हैं।
प्रशासन की ओर से जर्जर पुल की सूचना देने वाला कोई भी नोटिस उस जगह पर चस्पा नहीं किया गया है, जिसे देखकर चालक सतर्क हो जाएं। न ही यहां से गुजरने वाले औद्योगिक इकाइयों के भारी-भरकम ट्रकों के प्रवेश पर रोक लगाई गई। कब बड़ा हादसा हो जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता। वहीं, नहर पर अभी तक नए पुल का निर्माण भी शुरू नहीं हो पाया है।
जम्मू-कश्मीर लघु उद्योग विकास निगम (सिकॉप) को सरकार की ओर से सहार में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए 900 कनाल भूमि आवंटित की गई थी। इसके बाद सिकॉप के प्रबंध निदेशक ने औद्योगिक इकाइयों की जरूरतों को ध्यान में रखकर जर्जर पुल को नष्ट कर नए पुल के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को लिखा था। प्रबंध निदेशक का कहना था कि पुल की हालत काफी खराब है, यह भारी औद्योगिक ट्रकों का वजन नहीं सहन कर सकता।
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इसके उपरांत लोक निर्माण विभाग की टीम ने भी मौका-ए-मुआयना किया और अपनी तकनीकी रिपोर्ट में पुल को तुरंत नष्ट कर इसकी जगह नए पुल के निर्माण की सिफारिश की। इसके लिए संबंधित विभाग ने एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार की थी। विभाग ने 28 मीटर लंबा डबल लेन सीमेंट कंक्रीट पुल के निर्माण के लिए 3.79 करोड़ की राशि निर्धारित की थी। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए प्रशासनिक विभाग को भी भेजा गया, लेकिन अभी तक नए पुल का निर्माण शुरू नहीं हो पाया।
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विभाग भी दे चुका है निर्माण की मंजूरी
नहर पर पुल निर्माण को लेकर सिकॉप पहले से ही विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र ले चुका है। इसमें स्पष्ट किया गया था कि नहर के बुनियादी ढांचे के साथ बिना छेड़छाड़ के कार्यकारी एजेंसी पुल का निर्माण कर सकती है। लेकिन कार्यकारी एजेंसी को प्रस्तावित पुल का निर्माण कार्य शुरू करवाने से पहले विभाग की सहमति लेनी होगी।
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औद्योगिक इकाइयों की जरूरतों को ध्यान में रखकर नए पुल के निर्माण को लेकर प्रशासनिक विभाग को लिखा जा चुका है। अभी तक विभाग को राशि आवंटित नहीं हुई है। जैसे ही राशि मिलती है, निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
-- अरविंद कुमार लंगेह, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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असुरक्षित पुल को तुरंत नष्ट कर जल्द नए पुल का निर्माण किया जाना चाहिए। ताकि किसी तरह के जानमाल का नुकसान से बचा जा सके। संबंधित विभाग को इस पर जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। अगर विभाग के पास फंड नहीं है तो संबंधित मंत्री से बात कर फंड की व्यवस्था की जाएगी।
-- राजीव जसरोटिया, विधायक जसरोटा।
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- दो साल पहले लोक निर्माण विभाग ने इसे जर्जर घोषित किया था, आज भी भारी-भरकम वाहन गुजर रहे
- सिकॉप ने नए पुल के निर्माण की उठाई थी मांग, फंड की मंजूरी न मिलने से शुरू नहीं हो पाया काम
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग को औद्योगिक क्षेत्र सहार-लोगेट से जोड़ने वाला रावी-तवी नहर पर बना पुल दो साल पूर्व लोक निर्माण विभाग ने जर्जर घोषित किया था। बावजूद इसके आज भी भारी भरकम वाहन पुल से गुजर रहे हैं और इस बात से अंजान चालक किसी भी समय हादसे का शिकार हो सकते हैं।
प्रशासन की ओर से जर्जर पुल की सूचना देने वाला कोई भी नोटिस उस जगह पर चस्पा नहीं किया गया है, जिसे देखकर चालक सतर्क हो जाएं। न ही यहां से गुजरने वाले औद्योगिक इकाइयों के भारी-भरकम ट्रकों के प्रवेश पर रोक लगाई गई। कब बड़ा हादसा हो जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता। वहीं, नहर पर अभी तक नए पुल का निर्माण भी शुरू नहीं हो पाया है।
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जम्मू-कश्मीर लघु उद्योग विकास निगम (सिकॉप) को सरकार की ओर से सहार में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए 900 कनाल भूमि आवंटित की गई थी। इसके बाद सिकॉप के प्रबंध निदेशक ने औद्योगिक इकाइयों की जरूरतों को ध्यान में रखकर जर्जर पुल को नष्ट कर नए पुल के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को लिखा था। प्रबंध निदेशक का कहना था कि पुल की हालत काफी खराब है, यह भारी औद्योगिक ट्रकों का वजन नहीं सहन कर सकता।
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इसके उपरांत लोक निर्माण विभाग की टीम ने भी मौका-ए-मुआयना किया और अपनी तकनीकी रिपोर्ट में पुल को तुरंत नष्ट कर इसकी जगह नए पुल के निर्माण की सिफारिश की। इसके लिए संबंधित विभाग ने एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार की थी। विभाग ने 28 मीटर लंबा डबल लेन सीमेंट कंक्रीट पुल के निर्माण के लिए 3.79 करोड़ की राशि निर्धारित की थी। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए प्रशासनिक विभाग को भी भेजा गया, लेकिन अभी तक नए पुल का निर्माण शुरू नहीं हो पाया।
विभाग भी दे चुका है निर्माण की मंजूरी
नहर पर पुल निर्माण को लेकर सिकॉप पहले से ही विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र ले चुका है। इसमें स्पष्ट किया गया था कि नहर के बुनियादी ढांचे के साथ बिना छेड़छाड़ के कार्यकारी एजेंसी पुल का निर्माण कर सकती है। लेकिन कार्यकारी एजेंसी को प्रस्तावित पुल का निर्माण कार्य शुरू करवाने से पहले विभाग की सहमति लेनी होगी।
औद्योगिक इकाइयों की जरूरतों को ध्यान में रखकर नए पुल के निर्माण को लेकर प्रशासनिक विभाग को लिखा जा चुका है। अभी तक विभाग को राशि आवंटित नहीं हुई है। जैसे ही राशि मिलती है, निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
असुरक्षित पुल को तुरंत नष्ट कर जल्द नए पुल का निर्माण किया जाना चाहिए। ताकि किसी तरह के जानमाल का नुकसान से बचा जा सके। संबंधित विभाग को इस पर जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। अगर विभाग के पास फंड नहीं है तो संबंधित मंत्री से बात कर फंड की व्यवस्था की जाएगी।