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Kathua News: जीएमसी में मरीजों को स्थिति के अनुरूप मिलेगी आकस्मिक चिकित्सा सेवा
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- चिकित्सा सेवा को वर्गीकृत करने के लिए बनाया गया रेड, ग्रीन और यलो जोन
- रेड जोन में लगातार चिकित्सक की निगरानी की जरूरत वाले मरीज आएंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान जीएमसी कठुआ के आकस्मिक चिकित्सा सेवा विभाग में आने वाले मरीजों की चिकित्सीय सेवाओं को वर्गीकृत कर दिया गया है। इसके तहत आकस्मिक चिकित्सा सेवा विभाग को तीन भागों में विभाजित किया गया है।
यहां आने वाले वाले मरीजों को अब उनकी स्थिति के अनुसार बनाए गए खंड में ही रखकर उपचार दिया जाएगा। नई व्यवस्था में रेड जोन में छह ऐसे मरीजों को उपचार देने की सुविधा है, जिन्हें लगातार चिकित्सक की निगरानी की जरूरत है। इसी तरह यलो जोन में 12 ऐसे मरीजों को रखा जाएगा जिन्हें आकस्मिक चिकित्सा की जरूरत तो है लेकिन उनके जीवन पर कोई संकट नहीं है। इसी तरह, ग्रीन जोन में भी 12 ऐसे मरीजों को उपचार दिया जाएगा, जिन्हें गंभीर मरीजों के उपचार के उपरांत ही इलाज की सहूलियत मिलेगी।
दरअसल जिले भर से उपचार के आने वाले मरीजों की चिकित्सकीय देखभाल के लिए जीएमसी कठुआ के आकस्मिक चिकित्सा सेवा विभाग में 30 बेड की क्षमता है, जबकि इसके साथ ही 30 बेड वाला रिकवरी वार्ड है। जहां मरीजों को प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद स्थानांतरित किए जाने की व्यवस्था है। जहां प्रतिदिन 150 से 200 के करीब मरीज इलाज के पंजीकृत होते हैं। कई बार एक साथ ज्यादा संख्या में आने वाले मरीजों के कारण उपचार में कई तरह की परेशानियां आती थीं। इसी को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने आकस्मिक चिकित्सा सेवा विभाग के प्राथमिक चिकित्सा खंड को रेड, यलो और ग्रीन जोन में विभाजित कर दिया है।
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जीएमसी कठुआ के प्रधानाचार्य डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री ने बताया कि कई बार सड़क दुर्घटना या किसी अन्य स्थिति में जब एक साथ कई मरीज आ जाते हैं तो मरीजों की उनकी हालत के अनुरूप चिकित्सकीय देखभाल में समस्या आती थी। इसी का समाधान करने के लिए इस नई व्यवस्था को शुरू किया गया है। भविष्य में अगर किसी सुधार की जरूरत पड़ती है तो उसे भी किया जाएगा।
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- रेड जोन में लगातार चिकित्सक की निगरानी की जरूरत वाले मरीज आएंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान जीएमसी कठुआ के आकस्मिक चिकित्सा सेवा विभाग में आने वाले मरीजों की चिकित्सीय सेवाओं को वर्गीकृत कर दिया गया है। इसके तहत आकस्मिक चिकित्सा सेवा विभाग को तीन भागों में विभाजित किया गया है।
यहां आने वाले वाले मरीजों को अब उनकी स्थिति के अनुसार बनाए गए खंड में ही रखकर उपचार दिया जाएगा। नई व्यवस्था में रेड जोन में छह ऐसे मरीजों को उपचार देने की सुविधा है, जिन्हें लगातार चिकित्सक की निगरानी की जरूरत है। इसी तरह यलो जोन में 12 ऐसे मरीजों को रखा जाएगा जिन्हें आकस्मिक चिकित्सा की जरूरत तो है लेकिन उनके जीवन पर कोई संकट नहीं है। इसी तरह, ग्रीन जोन में भी 12 ऐसे मरीजों को उपचार दिया जाएगा, जिन्हें गंभीर मरीजों के उपचार के उपरांत ही इलाज की सहूलियत मिलेगी।
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दरअसल जिले भर से उपचार के आने वाले मरीजों की चिकित्सकीय देखभाल के लिए जीएमसी कठुआ के आकस्मिक चिकित्सा सेवा विभाग में 30 बेड की क्षमता है, जबकि इसके साथ ही 30 बेड वाला रिकवरी वार्ड है। जहां मरीजों को प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद स्थानांतरित किए जाने की व्यवस्था है। जहां प्रतिदिन 150 से 200 के करीब मरीज इलाज के पंजीकृत होते हैं। कई बार एक साथ ज्यादा संख्या में आने वाले मरीजों के कारण उपचार में कई तरह की परेशानियां आती थीं। इसी को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने आकस्मिक चिकित्सा सेवा विभाग के प्राथमिक चिकित्सा खंड को रेड, यलो और ग्रीन जोन में विभाजित कर दिया है।
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जीएमसी कठुआ के प्रधानाचार्य डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री ने बताया कि कई बार सड़क दुर्घटना या किसी अन्य स्थिति में जब एक साथ कई मरीज आ जाते हैं तो मरीजों की उनकी हालत के अनुरूप चिकित्सकीय देखभाल में समस्या आती थी। इसी का समाधान करने के लिए इस नई व्यवस्था को शुरू किया गया है। भविष्य में अगर किसी सुधार की जरूरत पड़ती है तो उसे भी किया जाएगा।