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Kathua News: फार्मासिस्ट के सहारे हेल्थ सेंटर बसंतपुर, चिकित्सकों के दोनों पद खाली
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-एकमात्र डॉक्टर का भी दो साल पहले भड्डू में कर दिया था तबादला
-ग्रामीणों को इलाज के लिए लखनपुर या निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुधारने के सरकार के दावे हवा में हैं। अभी भी कहीं फार्मासिस्ट और कहीं अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र चल रहे हैं। ऐसे ही हालात तीन हजार से ज्यादा आबादी के लिए बनाए गए न्यू टाइप प्राइमरी हेल्थ सेंटर (एनटीपीएचसी) बसंतपुर के हैं। जहां चिकित्सकों के दोनों स्वीकृत पद खाली हैं। फार्मासिस्ट के सहारे यहां सेवाएं चल रही हैं।
बसंतपुर पंचायत की पूर्व सरपंच सोनी सुनीता ने बताया कि दो साल पूर्व एनटीपीएचसी बसंतपुर में तैनात एक मात्र एमबीबीएस डॉक्टर का पीएचसी भड्डू में तबादला कर दिया गया था। इसके बाद जहां किसी भी चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। तब से एक फार्मासिस्ट के सहारे स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। छोटी- छोटी बीमारी के लिए भी स्थानीय लोगों को पीएचसी लखनपुर जाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों की कमी को लेकर कई बार विभिन्न मंचों पर जिला प्रशासन और सरकार के समक्ष मुद्दा उठाया गया लेकिन हर बार सिवाए आश्वासन के कुछ नहीं मिला है।
पंचायत घर की इमारत में चल रहा स्वास्थ्य केंद्र
ग्रामीण चेत राम ने बताया कि सरकार की ओर से स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा तो बढ़ा दिया लेकिन अभी तक न तो नई इमारत का निर्माण पूरा हुआ है और न ही एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। पिछले कई सालों से एनटीपीएचसी पंचायत घर की इमारत में चल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की नई इमारत के कार्य को पूरा करने के लिए मात्र 5 लाख की राशि की जरूरत है लेकिन इसमें स्वास्थ्य विभाग नाकाम साबित हो रहा है।
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ब्लॉक परोल के 9 पीएचसी में सात एमबीबीएस डॉक्टर नहीं
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मेडिकल ब्लॉक परोल में चार पीएचसी और पांच एनटीपीएचसी है। इनमें 17 स्वीकृत चिकित्सकों पदों में से सात पद खाली पड़े हुए हैं। इसमें बसंतपुर एनटीपीएचसी के दोनों पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इसका खामियाजा ग्रामीणों को झेलना पड़ रहा है। डॉक्टरों की तैनाती न होने के कारण गंभीर मरीजों को या तो निजी चिकित्सा केंद्रों में जाना पड़ रहा है या फिर जिला अस्पतालों तक की लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
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मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में
एनटीपीएचसी में डॉक्टरों की कमी का मामला स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है। हाल ही में जिला प्रशासन की ओर से चिकित्सकों की कमी को लेकर रिपोर्ट तलब की गई थी। उम्मीद है कि जल्द समस्या का समाधान होगा।
-डॉ. कयूम, बीएमओ, परोल।
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-ग्रामीणों को इलाज के लिए लखनपुर या निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुधारने के सरकार के दावे हवा में हैं। अभी भी कहीं फार्मासिस्ट और कहीं अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र चल रहे हैं। ऐसे ही हालात तीन हजार से ज्यादा आबादी के लिए बनाए गए न्यू टाइप प्राइमरी हेल्थ सेंटर (एनटीपीएचसी) बसंतपुर के हैं। जहां चिकित्सकों के दोनों स्वीकृत पद खाली हैं। फार्मासिस्ट के सहारे यहां सेवाएं चल रही हैं।
बसंतपुर पंचायत की पूर्व सरपंच सोनी सुनीता ने बताया कि दो साल पूर्व एनटीपीएचसी बसंतपुर में तैनात एक मात्र एमबीबीएस डॉक्टर का पीएचसी भड्डू में तबादला कर दिया गया था। इसके बाद जहां किसी भी चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। तब से एक फार्मासिस्ट के सहारे स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। छोटी- छोटी बीमारी के लिए भी स्थानीय लोगों को पीएचसी लखनपुर जाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों की कमी को लेकर कई बार विभिन्न मंचों पर जिला प्रशासन और सरकार के समक्ष मुद्दा उठाया गया लेकिन हर बार सिवाए आश्वासन के कुछ नहीं मिला है।
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पंचायत घर की इमारत में चल रहा स्वास्थ्य केंद्र
ग्रामीण चेत राम ने बताया कि सरकार की ओर से स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा तो बढ़ा दिया लेकिन अभी तक न तो नई इमारत का निर्माण पूरा हुआ है और न ही एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। पिछले कई सालों से एनटीपीएचसी पंचायत घर की इमारत में चल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की नई इमारत के कार्य को पूरा करने के लिए मात्र 5 लाख की राशि की जरूरत है लेकिन इसमें स्वास्थ्य विभाग नाकाम साबित हो रहा है।
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ब्लॉक परोल के 9 पीएचसी में सात एमबीबीएस डॉक्टर नहीं
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मेडिकल ब्लॉक परोल में चार पीएचसी और पांच एनटीपीएचसी है। इनमें 17 स्वीकृत चिकित्सकों पदों में से सात पद खाली पड़े हुए हैं। इसमें बसंतपुर एनटीपीएचसी के दोनों पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इसका खामियाजा ग्रामीणों को झेलना पड़ रहा है। डॉक्टरों की तैनाती न होने के कारण गंभीर मरीजों को या तो निजी चिकित्सा केंद्रों में जाना पड़ रहा है या फिर जिला अस्पतालों तक की लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में
एनटीपीएचसी में डॉक्टरों की कमी का मामला स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है। हाल ही में जिला प्रशासन की ओर से चिकित्सकों की कमी को लेकर रिपोर्ट तलब की गई थी। उम्मीद है कि जल्द समस्या का समाधान होगा।
-डॉ. कयूम, बीएमओ, परोल।