{"_id":"5f6514a68ebc3e980b4c3eb9","slug":"health-kathua-news-jmu218983425","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू में डेंगू के दो मामले सामने आने पर जिला प्रशासन सतर्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू में डेंगू के दो मामले सामने आने पर जिला प्रशासन सतर्क
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कठुआ। कोरोना महामारी में बढ़ते सामुदायिक संक्रमण के बीच डेंगू का खतरा बढ़ने लगा है। जम्मू में दो डेंगू के मामले सामने आने के बाद कठुआ जिले में भी प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने जहां मलेरिया विंग की टीमों को सक्रिय कर दिया है, वहीं नगर परिषद को भी फॉगिंग और मेलाथियान स्प्रे के लिए लिखा है। बीते एक माह से जिले में बुखार के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। वायरल के बीच कोरोना संक्रमण और अब डेंगू और भी खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से एहतियात बरतने की अपील की है।
हालांकि कठुआ में फिलहाल डेंगू का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन विभाग ने शहर भर में एहतियातन फॉगिंग और मेलाथियान स्प्रे करवाने की तैयारी कर ली है। बीते साल जिले में 60 से अधिक डेंगू के मरीज सामने आए थे। जिसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग लापरवाही बरतने के मूड में नहीं है।
नगर परिषद ने भी इसके लिए कमर कस ली है। शहर के निचले और तराई वाले इलाकों से छिड़काव अभियान की शुरूआत की तैयारी है। नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव गंडोत्रा ने बताया कोरोना महामारी शहर में तेजी से फैल रही है, ऐसे में टीमें सेनिटाइजेशन में लगी हैं। जल्द ही टीमों को फॉगिंग पर भी लगाया जाएगा, ताकि डेंगू को दस्तक देने से रोका जा सके।
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उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज नागपाल ने बताया कि डेंगू को लेकर टीमों को सक्रिय किया गया है। सभी ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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नगर परिषद ने आम लोगों को जारी की हिदायत
- घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें। किसी भी खुले बर्तन में पानी न जमा होने दें।
- बर्तन को खाली कर रखें या उसे उल्टा कर कर रखें।
- अगर आप किसी बर्तन, ड्रम या बाल्टी में पानी जमा कर रखते हैं तो उसे ढक दें।
- अगर किसी चीज में हमेशा पानी जमा कर रखते हैं तो पहले उसे साबुन और पानी से अच्छे से धो लेना चाहिए, जिससे मच्छर के लारवा को हटाया जा सके।
- घर में कीटनाशक का छिड़काव करें।
- कूलर का काम न होने पर उसमें जमा पानी निकालकर सुखा दें। जरूरत होने पर रोज कूलर का पानी बदलते रहें।
गड्ढों, गमले या कचरे में पानी जमा न होने दें। अगर पानी जमा है तो उसमें मिटटी डाल दें।
- खिड़की और दरवाजे में जाली लगाकर रखें। शाम होने से पहले दरवाजे बंद कर दें।
- पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, रात को सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करें।
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डेंगू बुखार क्या है ?
डेंगू बुखार संक्रमण से होने वाली बीमारी है। एक बार डेंगू बुखार होने के बाद इस संक्रमण से मरीज को लंबे समय के लिए प्रतिरोधक क्षमता मिल जाती है, लेकिन दूसरी बार डेंगू होना जानलेवा साबित हो सकता है। दूसरी बार बुखार को डेंगू हेमोरहेजिक फीवर कहते हैं। यह बुखार हवा, पानी, साथ खाना खाने या छूने से नहीं फैलता। यह संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। डेंगू संक्रमित व्यक्ति को दूसरे मच्छर के काटने से यह संक्रमण उस मच्छर में दाखिल हो जाता है, जिससे अन्य लोगों को भी इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
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डेंगू की पहचान, लक्षण और उपचार
ये मच्छर दिन में ज्यादा सक्रिय होते हैं और ज्यादा ऊपर तक नहीं उड़ पाते हैं। पर्दों के पीछे, ठंडी या अंधेरे वाली जगह पर रहते हैं। अपने प्रजनन क्षेत्र के 200 मीटर की दूरी के अंदर ही उड़ते हैं। पानी सूख जाने के बाद भी इनका लारवा 12 माह तक जीवित रह सकता है।
- डेंगू मच्छर के काटने के तीन से 14 दिन के भीतर लक्षण दिखाई देते हैं। सर्दी के साथ बुखार आना, सिरदर्द, आंखों में दर्द, बदनदर्द, भूख कम लगना,
उल्टी-दस्त, चमड़ी के नीचे लाल चट्टे आना, गंभीर स्थिति में आंख, नाक में से खून भी निकल सकता है।
- डेंगू की रोकथाम ही इसका सबसे बेहतर इलाज है। रोगी को डॉक्टर की तुरंत सलाह लेकर उसके अनुरूप ही दवा लेनी चाहिए। इस दौरान बुखार में सिरदर्द की दवाका प्रयोग नहीं करना चाहिए। नियमित रूप से रक्त में प्लेटलेट्स कांउट की जांच करवानी चाहिए।
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हालांकि कठुआ में फिलहाल डेंगू का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन विभाग ने शहर भर में एहतियातन फॉगिंग और मेलाथियान स्प्रे करवाने की तैयारी कर ली है। बीते साल जिले में 60 से अधिक डेंगू के मरीज सामने आए थे। जिसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग लापरवाही बरतने के मूड में नहीं है।
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नगर परिषद ने भी इसके लिए कमर कस ली है। शहर के निचले और तराई वाले इलाकों से छिड़काव अभियान की शुरूआत की तैयारी है। नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव गंडोत्रा ने बताया कोरोना महामारी शहर में तेजी से फैल रही है, ऐसे में टीमें सेनिटाइजेशन में लगी हैं। जल्द ही टीमों को फॉगिंग पर भी लगाया जाएगा, ताकि डेंगू को दस्तक देने से रोका जा सके।
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उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज नागपाल ने बताया कि डेंगू को लेकर टीमों को सक्रिय किया गया है। सभी ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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नगर परिषद ने आम लोगों को जारी की हिदायत
- घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें। किसी भी खुले बर्तन में पानी न जमा होने दें।
- बर्तन को खाली कर रखें या उसे उल्टा कर कर रखें।
- अगर आप किसी बर्तन, ड्रम या बाल्टी में पानी जमा कर रखते हैं तो उसे ढक दें।
- अगर किसी चीज में हमेशा पानी जमा कर रखते हैं तो पहले उसे साबुन और पानी से अच्छे से धो लेना चाहिए, जिससे मच्छर के लारवा को हटाया जा सके।
- घर में कीटनाशक का छिड़काव करें।
- कूलर का काम न होने पर उसमें जमा पानी निकालकर सुखा दें। जरूरत होने पर रोज कूलर का पानी बदलते रहें।
गड्ढों, गमले या कचरे में पानी जमा न होने दें। अगर पानी जमा है तो उसमें मिटटी डाल दें।
- खिड़की और दरवाजे में जाली लगाकर रखें। शाम होने से पहले दरवाजे बंद कर दें।
- पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, रात को सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करें।
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डेंगू बुखार क्या है ?
डेंगू बुखार संक्रमण से होने वाली बीमारी है। एक बार डेंगू बुखार होने के बाद इस संक्रमण से मरीज को लंबे समय के लिए प्रतिरोधक क्षमता मिल जाती है, लेकिन दूसरी बार डेंगू होना जानलेवा साबित हो सकता है। दूसरी बार बुखार को डेंगू हेमोरहेजिक फीवर कहते हैं। यह बुखार हवा, पानी, साथ खाना खाने या छूने से नहीं फैलता। यह संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। डेंगू संक्रमित व्यक्ति को दूसरे मच्छर के काटने से यह संक्रमण उस मच्छर में दाखिल हो जाता है, जिससे अन्य लोगों को भी इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
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डेंगू की पहचान, लक्षण और उपचार
ये मच्छर दिन में ज्यादा सक्रिय होते हैं और ज्यादा ऊपर तक नहीं उड़ पाते हैं। पर्दों के पीछे, ठंडी या अंधेरे वाली जगह पर रहते हैं। अपने प्रजनन क्षेत्र के 200 मीटर की दूरी के अंदर ही उड़ते हैं। पानी सूख जाने के बाद भी इनका लारवा 12 माह तक जीवित रह सकता है।
- डेंगू मच्छर के काटने के तीन से 14 दिन के भीतर लक्षण दिखाई देते हैं। सर्दी के साथ बुखार आना, सिरदर्द, आंखों में दर्द, बदनदर्द, भूख कम लगना,
उल्टी-दस्त, चमड़ी के नीचे लाल चट्टे आना, गंभीर स्थिति में आंख, नाक में से खून भी निकल सकता है।
- डेंगू की रोकथाम ही इसका सबसे बेहतर इलाज है। रोगी को डॉक्टर की तुरंत सलाह लेकर उसके अनुरूप ही दवा लेनी चाहिए। इस दौरान बुखार में सिरदर्द की दवाका प्रयोग नहीं करना चाहिए। नियमित रूप से रक्त में प्लेटलेट्स कांउट की जांच करवानी चाहिए।