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Kathua News: सामाजिक समरसता की पुजारिन थीं अहिल्याबाई होलकर
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सामाजिक समरस्ता के तहत आयोजित कार्यक्रम के तहत संबोधित करते वक्ता
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। सामाजिक समरसता जिला कठुआ की ओर से किडियां गंडियाल में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के त्रैशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सामाजिक समरसता प्रमुख प्रमोद ने लोगों को बताया कि देवी अहिल्या न्याय की प्रतिमूर्ति थी। उन्होंने प्रजा व परिवार में कभी भेद नहीं किया।
उन्होंने बताया कि देवी अहिल्या सामाजिक समरसता की पुजारिन थीं। उनके शासन में समरसता का भाव साफ तौर पर देखा जा सकता है। उन्होंने अनेक मंदिरों का निर्माण करवाया, घाट बनवाए और यह सभी वार्तालाप, विचारों के आदान-प्रदान के साधन के तौर पर बनाए गए थे। ताकि लोगों में मेल-जोल बढ़े, अपनापन बढ़े। हर वर्ग, हर जाति के व्यक्ति को मंदिर में या घाट में आने की अनुमति थी। जहां बिना किसी विषमताओं व भेदभाव के सब आते थे। जहां तक कि स्वच्छता का कार्य करने वालों के साथ देवी अहिल्या स्वयं बैठकर भोजन करती थीं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में हम पांच प्रण पर केंद्रित है जिसमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध, नागरिक कर्तव्य व कुटुंब प्रबोधन हैं। लेकिन अगर हम माता अहिल्या के नेतृत्व में देखें तो अपना समाज इन पांचों पहलुओं पर सशक्त था इसलिए उनके दिखाए पदचिन्हों पर चलने के लिए हमें प्रयास करना होगा। कार्यक्रम में अंचल दास मुख्य अतिथि के रूप में और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक अश्विनी, विभाग प्रचारक अनुराग व अन्य लोग उपस्थित रहे।
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कठुआ। सामाजिक समरसता जिला कठुआ की ओर से किडियां गंडियाल में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के त्रैशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सामाजिक समरसता प्रमुख प्रमोद ने लोगों को बताया कि देवी अहिल्या न्याय की प्रतिमूर्ति थी। उन्होंने प्रजा व परिवार में कभी भेद नहीं किया।
उन्होंने बताया कि देवी अहिल्या सामाजिक समरसता की पुजारिन थीं। उनके शासन में समरसता का भाव साफ तौर पर देखा जा सकता है। उन्होंने अनेक मंदिरों का निर्माण करवाया, घाट बनवाए और यह सभी वार्तालाप, विचारों के आदान-प्रदान के साधन के तौर पर बनाए गए थे। ताकि लोगों में मेल-जोल बढ़े, अपनापन बढ़े। हर वर्ग, हर जाति के व्यक्ति को मंदिर में या घाट में आने की अनुमति थी। जहां बिना किसी विषमताओं व भेदभाव के सब आते थे। जहां तक कि स्वच्छता का कार्य करने वालों के साथ देवी अहिल्या स्वयं बैठकर भोजन करती थीं।
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उन्होंने बताया कि वर्तमान में हम पांच प्रण पर केंद्रित है जिसमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध, नागरिक कर्तव्य व कुटुंब प्रबोधन हैं। लेकिन अगर हम माता अहिल्या के नेतृत्व में देखें तो अपना समाज इन पांचों पहलुओं पर सशक्त था इसलिए उनके दिखाए पदचिन्हों पर चलने के लिए हमें प्रयास करना होगा। कार्यक्रम में अंचल दास मुख्य अतिथि के रूप में और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक अश्विनी, विभाग प्रचारक अनुराग व अन्य लोग उपस्थित रहे।
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