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बारिश से निराश किसानों ने प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ किया प्रदर्शन
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बिना शर्त धान की खरीद किए जाने की मांग को लेकर कठुआ में प्रदर्शन करते किसान। संवाद
- फोटो : KATHUA
कठुआ। गत शनिवार से शुरू हुई बारिश से खराब हो रही धान की फसल को देख निराश किसानों ने इसके लिए प्रशासनिक व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया है। अपनी छह माह की मेहनत पर पानी फिरता देख किसानों ने आत्महत्या तक करने की चेतावनी दे दी है। प्रशासन व सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए किसानों ने मंडियों में पड़े हजारों कुंतल धान को बिना किसी शर्त दो दिनों के भीतर खरीदे जाने की मांग करते हुए कहा कि अगर ऐसा नही हुआ तो किसानों को इसके खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करना पड़ जाएगा।
प्रदर्शनकारियों में शामिल किसान रंजीत सिंह ने कहा कि मंडी लगाने के लिए जगह के चयन में प्रशासन की ओर से बरती गई कोताही का नतीजा आज किसानों को भुगतना पड़ रहा है। भले ही आसमान से बादल छट गए हैं लेकिन निचली जगह में लगाई गई मंडी में हुए जलभराव के कारण किसानों की फसल पर संकट है। उन्होंने कहा कि रावी दरिया की सूखी जमीन में मंडी की जगह निश्चित हो जाने के बाद भी प्रशासन आज तक पक्की मंडी का निर्माण पूरा नही करवा पाया है। जिसका, खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि जिस स्थान पर मंडी बनाई गई है वहां न पर्याप्त कर्मचारी हैं और न ही धान की सफाई के लिए उचित व्यवस्था। जिसके कारण मंडी में धान पहुंचाने वाले किसानों को कई-कई दिनों तक तौल होने का इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने मंडी में लगी धान की ढेरियों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि अगर मंडियों में पर्याप्त व्यवस्था होती तो किसानों की इतनी ढेरियां नही लगती और इतनी बड़ी संख्या में किसानों को नुकसान भी नही उठाना पड़ता।
वहीं किसान विशु अंदोत्रा ने मंडियों में पर्याप्त व्यवस्था न होने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की निजी डीलरों से मिली भगत का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने भले ही किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य देने के लिए मंडियों का प्रावधान बनाया है। लेकिन इसके बावजूद यहां ऐसी व्यवस्था की गई है कि किसान परेशान होकर निजी डीलरों को अपनी फसल औने पौने दामों में बेच दें। उन्होंने कहा कि मंडी में किसान अपनी फसल को सुखा कर लाता है लेकिन यहां कई-कई दिनों तक कच्ची जमीन में पड़े धान में जब नमी आ जाती है तो उसे इसके नाम पर भी परेशान करने की साजिश की जाती है। आज अगर मंडी में किसानों का धान भीग कर खराब हो रहा है तो उसके लिए मंडियों में खरीद के लिए सुस्त इंतजाम जिम्मेदार है। किसानों ने कर्ज लेकर अपनी फसल लगाई है। अगर उसके पूरे दाम नही मिलेंगे तो किसान अपना कर्ज कैसे चुकाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दो दिनों दिनों के भीतर बिना किसी शर्त किसानों के धान की तौल नही की गई। तो वह इसके खिलाफ आत्महत्या करने से भी पीछे नही हटेंगे।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल किसान रंजीत सिंह ने कहा कि मंडी लगाने के लिए जगह के चयन में प्रशासन की ओर से बरती गई कोताही का नतीजा आज किसानों को भुगतना पड़ रहा है। भले ही आसमान से बादल छट गए हैं लेकिन निचली जगह में लगाई गई मंडी में हुए जलभराव के कारण किसानों की फसल पर संकट है। उन्होंने कहा कि रावी दरिया की सूखी जमीन में मंडी की जगह निश्चित हो जाने के बाद भी प्रशासन आज तक पक्की मंडी का निर्माण पूरा नही करवा पाया है। जिसका, खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि जिस स्थान पर मंडी बनाई गई है वहां न पर्याप्त कर्मचारी हैं और न ही धान की सफाई के लिए उचित व्यवस्था। जिसके कारण मंडी में धान पहुंचाने वाले किसानों को कई-कई दिनों तक तौल होने का इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने मंडी में लगी धान की ढेरियों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि अगर मंडियों में पर्याप्त व्यवस्था होती तो किसानों की इतनी ढेरियां नही लगती और इतनी बड़ी संख्या में किसानों को नुकसान भी नही उठाना पड़ता।
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वहीं किसान विशु अंदोत्रा ने मंडियों में पर्याप्त व्यवस्था न होने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की निजी डीलरों से मिली भगत का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने भले ही किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य देने के लिए मंडियों का प्रावधान बनाया है। लेकिन इसके बावजूद यहां ऐसी व्यवस्था की गई है कि किसान परेशान होकर निजी डीलरों को अपनी फसल औने पौने दामों में बेच दें। उन्होंने कहा कि मंडी में किसान अपनी फसल को सुखा कर लाता है लेकिन यहां कई-कई दिनों तक कच्ची जमीन में पड़े धान में जब नमी आ जाती है तो उसे इसके नाम पर भी परेशान करने की साजिश की जाती है। आज अगर मंडी में किसानों का धान भीग कर खराब हो रहा है तो उसके लिए मंडियों में खरीद के लिए सुस्त इंतजाम जिम्मेदार है। किसानों ने कर्ज लेकर अपनी फसल लगाई है। अगर उसके पूरे दाम नही मिलेंगे तो किसान अपना कर्ज कैसे चुकाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दो दिनों दिनों के भीतर बिना किसी शर्त किसानों के धान की तौल नही की गई। तो वह इसके खिलाफ आत्महत्या करने से भी पीछे नही हटेंगे।
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