हीरानगर। गांव देवो चक में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी है। तीसरे दिन की कथा के दौरान कथावाचक सुभाष शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मुक्ति के लिए राग रहित जीवन अपनाने पर बल दिया। भीषण सर्दी के बावजूद कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई।
अपने प्रवचन के दौरान कथावाचक सुभाष शास्त्री ने कबीर दास जी के एक दोहे ‘कबीरा इह जग आयके बहुत से कीनी मीत। जिन दिल बांधा एक से वो सोए निश्चिंत’ का उदाहरण देते हुए कहा कि उपरोक्त दोहे में कबीर दास जी ने बताया है कि इस मनुष्य तन को तभी मुक्ति मिलती है जब वह राग रहित हो जाता है। राग आदमी का ईमान बिगाड़ देता है। राग से ही आदमी कर्मों में बंध जाता है और यही राग उसे चिंता में उलझा देता है। इसलिए यदि मुक्ति चाहते हैं तो राग को छोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि जब हम राग रहित संतो के समीप बैठते हैं तो मन से काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार इत्यादि सब शांत होने लगते हैं और उसके स्थान पर आपके मन में प्रेम, आनंद, भगवत प्राप्ति के भाव जागने लगते हैं। शास्त्री जी ने बताया कि राग रहित हो जाने का अर्थ यह है कि मनुष्य का ब्रह्म हो जाना और जब मनुष्य ब्रह्म हो गया तो फिर कुछ और होना शेष नहीं रहता। प्रकृति भी प्रभु द्वारा निर्धारित नियम के अनुसार चलती है और उसी नियम के अनुसार पृथ्वी धर्म का पालन करती है। उसमें आप जिस प्रकार का बीज बो देंगे। उसी प्रकार के फल फूल निकलते हैं। इसी प्रकार मानव का मन है इसमें जिस प्रकार के विचारों के बीज आप बोते हैं। उसी प्रकार के कर्म आपके द्वारा होंगे और उनका परिणाम भी वैसा ही होगा। इसलिए अंत: करण में सदा स्वच्छ भाव विचार लाए। इससे आपको हरि की प्राप्ति होगी। अपने दोहे में कबीर दास जी ने मनुष्य को यही समझाने का प्रयास किया है कि इस जग में आने वाला व्यक्ति अपने अंत:करण में एक अर्थात प्रभु को स्थान देता है तो वह सदा के लिए निश्चिंत अर्थात आवागमन के चक्र से मुक्त हो जाता है। कथा के अंत में सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण किया गया।

देवो चक में श्रीमद भगवत कथा के दौरान प्रवचन का श्रवण करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : KATHUA