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Kathua News: भगवान श्रीकृष्ण व रुक्मिणी के विवाह की झांकी ने किया भाव विभोर
Sun, 04 May 2025 01:27 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 04 May 2025 01:27 AM IST
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श्रीमद् भागवत कथा के दौरान मौजूद संगत। संवाद
- फोटो : kathua
शहर के पटेलनगर में जारी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का छठा दिन
कठुआ। शहर के पटेलनगर में जारी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण व रुक्मिणी के विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर खुशी का इजहार किया।
कथाव्यास विजय कृष्ण पराशर ने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। ठाकुरजी के इन पांच गीतों को जो भाव से गाता है, वह भव सागर से पार हो जाता है। कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, ऊधव-गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारिका की स्थापना एवं श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। कथाव्यास ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को रास से सदैव के लिए परमानंद की अनुभूति करवाई।
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कठुआ। शहर के पटेलनगर में जारी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण व रुक्मिणी के विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर खुशी का इजहार किया।
कथाव्यास विजय कृष्ण पराशर ने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। ठाकुरजी के इन पांच गीतों को जो भाव से गाता है, वह भव सागर से पार हो जाता है। कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, ऊधव-गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारिका की स्थापना एवं श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। कथाव्यास ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को रास से सदैव के लिए परमानंद की अनुभूति करवाई।
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