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रंजीत सागर झील में हो रही मछली चोरी
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बसोहली। वीरवार को कालका फिश कंपनी के सदस्यों ने पत्रकार वार्ता कर यह जानकारी दी कि मौजूदा समय में भारी संख्या में रंजीत सागर झील से मछली चोरी हो रही है जबकि मत्स्य विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने बताया यह सारी चोरी मत्स्य विभाग की नाक के नीचे हो रही है और उन्हीं की मिलीभगत से संभव है। कालका फिश कंपनी के राम प्रसाद, राकेश मेहरा ने बताया कि रोजाना रात 9 बजे से लेकर सुबह 4 बजे तक रजीत सागर झील में भारी संख्या में मछली की चोरी हो रही है। मछली को झील से निकालने के बाद पंजाब जम्मू आदि राज्यों में बेचा जा रहा है, मछली चोरी रोकने और मछली चोरी करने वाले लोगों को पकड़ने के लिए विभाग सिर्फ दिखावा कर रहा है, असल में कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
रंजीत सागर झील का 60 प्रतिशत हिस्सा जम्मू कश्मीर का है, जिसका 94 लाख का टेंडर भी हुआ था। कोरोना कॉल में बाजार में मंदी का दौर छाने से टेंडर वापस कर दिया गया था। जबकि दूसरे स्थान पर रहने वाले कालका फिश कंपनी का जो 75 लाख का टेंडर था, मत्स्य विभाग की ओर से कालका फिश कंपनी को देने के लिए कहा गया था, लेकिन विभाग में कोई भी संतुष्ट जवाब ना देने पर दो रिमाइंडर लगाए जा चुके हैं और तीसरी बार कोर्ट में केस किया जा चुका है। टेंडर प्रक्रिया ना होने से रोजाना 20 से 25 क्विंटल मछली की चोरी रंजीत सागर झील से मछली चोर कर रहे हैं। इसका मत्स्य विभाग कोई संज्ञान नहीं ले रहा है। टेंडर प्रक्रिया ना होने से बसोहली क्षेत्र में काम करने वाले 80 नाब के साथ मछुआरे बेरोजगार हो चुके है। कंपनी के सदस्यों ने जम्मू कश्मीर के एलजी से मांग की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर जरूरी निर्देश जारी करें और टेंडर की प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर करवाएं। इसमें कोई बाहरी राज्य का ठेकेदार हिस्सा ना लें। मछली पालन विभाग के सहायक निदेशक लाल हुसैन ने बताया कि उनके पास स्टाफ की कमी है, उच्च अधिकारियों को इस संदर्भ में लिखा गया है। मछली चोरों पर निगाह रखने के लिए रंजीत सागर झील के किनारे कर्मियों की तैनाती की जाएगी। बीते दिनों जो मछली चोर पकड़े गए थे उन्हें 17 हजार रुपये का जुर्माना किया गया था, विभाग फिर से टेंडर प्रक्रिया करवाने जा रहा है, जिसमें स्थानीय ठेकेदार भी भाग ले सकते हैं।
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रंजीत सागर झील का 60 प्रतिशत हिस्सा जम्मू कश्मीर का है, जिसका 94 लाख का टेंडर भी हुआ था। कोरोना कॉल में बाजार में मंदी का दौर छाने से टेंडर वापस कर दिया गया था। जबकि दूसरे स्थान पर रहने वाले कालका फिश कंपनी का जो 75 लाख का टेंडर था, मत्स्य विभाग की ओर से कालका फिश कंपनी को देने के लिए कहा गया था, लेकिन विभाग में कोई भी संतुष्ट जवाब ना देने पर दो रिमाइंडर लगाए जा चुके हैं और तीसरी बार कोर्ट में केस किया जा चुका है। टेंडर प्रक्रिया ना होने से रोजाना 20 से 25 क्विंटल मछली की चोरी रंजीत सागर झील से मछली चोर कर रहे हैं। इसका मत्स्य विभाग कोई संज्ञान नहीं ले रहा है। टेंडर प्रक्रिया ना होने से बसोहली क्षेत्र में काम करने वाले 80 नाब के साथ मछुआरे बेरोजगार हो चुके है। कंपनी के सदस्यों ने जम्मू कश्मीर के एलजी से मांग की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर जरूरी निर्देश जारी करें और टेंडर की प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर करवाएं। इसमें कोई बाहरी राज्य का ठेकेदार हिस्सा ना लें। मछली पालन विभाग के सहायक निदेशक लाल हुसैन ने बताया कि उनके पास स्टाफ की कमी है, उच्च अधिकारियों को इस संदर्भ में लिखा गया है। मछली चोरों पर निगाह रखने के लिए रंजीत सागर झील के किनारे कर्मियों की तैनाती की जाएगी। बीते दिनों जो मछली चोर पकड़े गए थे उन्हें 17 हजार रुपये का जुर्माना किया गया था, विभाग फिर से टेंडर प्रक्रिया करवाने जा रहा है, जिसमें स्थानीय ठेकेदार भी भाग ले सकते हैं।
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