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Kathua News: सुकराला मंदिर के बाहर एक जैसे स्वरूप में दिखेंगी दुकानें
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धार्मिक स्थल सुकराला में प्राचीन बावली। संवाद
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- ऐतिहासिक बावली का होने जा रहा जीर्णोद्धार
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साहिल खजूरिया
कठुआ। जम्मू संभाग के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री माता सुकराला देवी भवन से सटे बाजार को आकर्षक रूप मिलने जा रहा है। देश के अन्य धार्मिक पर्यटन स्थालों की तर्ज पर सुकराला में दुकानों को एक जैसी दिखाई देंगे। सुकराला में पचास के लगभग दुकानों की फेसलिफ्टिंग को लेकर कवायद शुरू हो गई है।
सुकराला देवी भवन के बाजार में दुकानों के साइन बोर्ड से लेकर दरवाजे एक ही रंग और एक ही रूप के होंगे। ऐसे में यह धार्मिक पर्यटन स्थल और भी आकर्षक दिखाई देगा। बिलावर डुग्गन विकास प्राधिकरण की ओर से नए साल में इस परियोजना पर काम शुरू करवाए जाने की तैयारी है। उधर, सुकराला में ऐतिहासिक बावली को भी इसके प्राकृतिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए खूबसूरत बनाए जाने की योजना है।
सुकराला माता के स्थानीय लोगों की इस बावली के प्रति भी गहरी आस्था है। मंदिर से इसका इतिहास जुड़ा होने के साथ ही यह बावली यहां के परिवारों के लिए पेयजल का एक प्राकृतिक स्त्रोत भी है। धार्मिक पर्यटन में इस बावली को विकसित करने का प्रयास भी शामिल कर लिया गया है। दोनों ही परियोजनाओं को छह लाख रुपये की लागत से पूरा कर लिया जाएगा।
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प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश लखन ने बताया कि परियोजना पर इसी साल काम पूरा कर लिया जाएगा। एक जैसी और एक ही रंग में दिखने वाली यह दुकानें दिखने में भी खूबसूरत होंगी। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और यहां की ऐतिहासिक बावलियों को संरक्षित करने के लिए भी काम शुरू करवाया जा रहा है।
राज राजेश्वरी मल्ल देवी का स्थान है सुकराला, दूर-दूर से आते हैं भक्त
ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में यह स्थान शुक्रालय और फिर सुकराला के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इतिहासकार जेएन गुनहार के अनुसार माता सुकराला भगवती शारदा का ही अवतार है। अधिकतर लोगों का विश्वास है कि यह मंदिर चंबा के राजा उमेध सिंह ने बनवाया था। मंदिर के भीतरी भाग को सुंदर ढंग से सजाया गया है। माता के दरबार में पहुंच कर श्रद्धालुओं को असीम आनंद का अनुभव होता है। मंदिर की बाहरी दीवार पर द्वारपाल के रूप में भैरव तथा महावीर जी की मूर्तियां हैं।
लगभग 150 सीढि़यां चढ़नी पड़ती हैं
मंदिर तक पहुंचने के लिए यात्रियों को लगभग 150 सीढि़यां चढ़नी पड़ती हैं। सीढि़यों के दोनों ओर दुकानें हैं जहां से यात्री माता की भेंट, प्रसाद तथा चित्र आदि खरीदते हैं। आसपास का वातावरण बड़ा स्वच्छ और आकर्षक है। रविवार, मंगलवार और खासतौर पर नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है। मंदिर में भगवती मल्ल देवी की पिंडी के अतिरिक्त महालक्ष्मी, महाकाली, मां सरस्वती की मूर्तियां भी स्थापित की गई। वर्ष 2013 में इसे श्री माता सुकराला देवी और श्री माता बालासुंदरी श्राइन बोर्ड के अधीन लाया गया था। वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त माता के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं।
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साहिल खजूरिया
कठुआ। जम्मू संभाग के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री माता सुकराला देवी भवन से सटे बाजार को आकर्षक रूप मिलने जा रहा है। देश के अन्य धार्मिक पर्यटन स्थालों की तर्ज पर सुकराला में दुकानों को एक जैसी दिखाई देंगे। सुकराला में पचास के लगभग दुकानों की फेसलिफ्टिंग को लेकर कवायद शुरू हो गई है।
सुकराला देवी भवन के बाजार में दुकानों के साइन बोर्ड से लेकर दरवाजे एक ही रंग और एक ही रूप के होंगे। ऐसे में यह धार्मिक पर्यटन स्थल और भी आकर्षक दिखाई देगा। बिलावर डुग्गन विकास प्राधिकरण की ओर से नए साल में इस परियोजना पर काम शुरू करवाए जाने की तैयारी है। उधर, सुकराला में ऐतिहासिक बावली को भी इसके प्राकृतिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए खूबसूरत बनाए जाने की योजना है।
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सुकराला माता के स्थानीय लोगों की इस बावली के प्रति भी गहरी आस्था है। मंदिर से इसका इतिहास जुड़ा होने के साथ ही यह बावली यहां के परिवारों के लिए पेयजल का एक प्राकृतिक स्त्रोत भी है। धार्मिक पर्यटन में इस बावली को विकसित करने का प्रयास भी शामिल कर लिया गया है। दोनों ही परियोजनाओं को छह लाख रुपये की लागत से पूरा कर लिया जाएगा।
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प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश लखन ने बताया कि परियोजना पर इसी साल काम पूरा कर लिया जाएगा। एक जैसी और एक ही रंग में दिखने वाली यह दुकानें दिखने में भी खूबसूरत होंगी। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और यहां की ऐतिहासिक बावलियों को संरक्षित करने के लिए भी काम शुरू करवाया जा रहा है।
राज राजेश्वरी मल्ल देवी का स्थान है सुकराला, दूर-दूर से आते हैं भक्त
ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में यह स्थान शुक्रालय और फिर सुकराला के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इतिहासकार जेएन गुनहार के अनुसार माता सुकराला भगवती शारदा का ही अवतार है। अधिकतर लोगों का विश्वास है कि यह मंदिर चंबा के राजा उमेध सिंह ने बनवाया था। मंदिर के भीतरी भाग को सुंदर ढंग से सजाया गया है। माता के दरबार में पहुंच कर श्रद्धालुओं को असीम आनंद का अनुभव होता है। मंदिर की बाहरी दीवार पर द्वारपाल के रूप में भैरव तथा महावीर जी की मूर्तियां हैं।
लगभग 150 सीढि़यां चढ़नी पड़ती हैं
मंदिर तक पहुंचने के लिए यात्रियों को लगभग 150 सीढि़यां चढ़नी पड़ती हैं। सीढि़यों के दोनों ओर दुकानें हैं जहां से यात्री माता की भेंट, प्रसाद तथा चित्र आदि खरीदते हैं। आसपास का वातावरण बड़ा स्वच्छ और आकर्षक है। रविवार, मंगलवार और खासतौर पर नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है। मंदिर में भगवती मल्ल देवी की पिंडी के अतिरिक्त महालक्ष्मी, महाकाली, मां सरस्वती की मूर्तियां भी स्थापित की गई। वर्ष 2013 में इसे श्री माता सुकराला देवी और श्री माता बालासुंदरी श्राइन बोर्ड के अधीन लाया गया था। वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त माता के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं।